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केरल सरकार द्वारा भारतीय दंड संहिता तथा आपराधिक प्रक्रिया संहिता में संशोधन

(प्रारंभिक परीक्षा के लिए - भारतीय दंड संहिता की धारा 292, आपराधिक प्रक्रिया संहिता)
(मुख्य परीक्षा के लिए, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र : 2 – सरकारी नीतियाँ)

चर्चा में क्यों 

  • केरल सरकार द्वारा, ब्लैकमेल के उद्देश्य से मोटे तौर पर अशोभनीय या घटिया सामग्री के मुद्रण, प्रकाशन और वितरण पर अंकुश लगाने के लिए, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में संशोधन करने का प्रस्ताव लाया गया है।
  • प्रस्तावित संशोधन, आपराधिक कानून (केरल संशोधन) विधेयक, 2022, वर्तमान में केरल के गृह विभाग के पास विचाराधीन है।
  • मसौदा कानून में "अपमानजनक" शब्द को, किसी भी ऐसे मामले के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसके नैतिकता के लिए हानिकारक होने की संभावना है।
  • प्रस्तावित कानून में, किसी लोकसेवक के सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में या उसके चरित्र और आचरण के संबंध में, मुद्रित या प्रकाशित होने वाले अशुद्ध मामले को भी शामिल किया गया है। 
  • इसके अलावा, मसौदा कानून में उन लोगों को भी शामिल किया गया है, जो किसी भी समाचार पत्र, आवधिक या परिपत्र में प्रिंट करते हैं, या प्रिंट करवाते हैं, या प्रदर्शित करते हैं, या प्रदर्शित करने का कारण बनते है।
  • किसी भी तस्वीर या मुद्रित या लिखित दस्तावेज़, जो अशोभनीय या निंदनीय है-
    • ऐसी तस्वीरों या लिखित दस्तावेजों को बेचना, किराए पर देना, वितरण करना या रखना भी प्रस्तावित कानून के तहत एक अपराध माना जाएगा। 
    • ब्लैकमेल करने के इरादे से, ऐसी तस्वीरों के वितरण से संबंधित किसी भी व्यवसाय में भाग लेने या उससे लाभ प्राप्त करने या विज्ञापन करने का कार्य भी अधिनियम के तहत दंडनीय होगा।
  • केरल सरकार, आईपीसी की धारा 292 में संशोधन करने, और किसी को धमकाने, अपमान करने या बदनाम करने के इरादे से' सामग्री के प्रकाशन को दंडित करने के लिए एक नई उप-धारा 292 ए पेश करने की योजना बना रही है, जो अश्लील पुस्तकों, पैम्फलेट, चित्र, पेंटिंग की बिक्री से संबंधित है।
  • प्रस्तावित कानून, में दोषी पाए जाने वालों के लिए, दो साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। 
  • प्रस्तावित संशोधनों के, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और आईपीसी के मौजूदा प्रावधानों के खिलाफ होने के कारण, विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता होगी।

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 292

  • इसके अनुसार, किसी पुस्तक, पैम्फलेट, पेपर, लेखन, ड्राइंग, पेंटिंग, प्रतिनिधित्व, आकृति आदि का प्रकाशन अश्लील माना जाएगा, यदि-
    • यह कामुक है (यौन इच्छा व्यक्त करना या पैदा करना)
    • कामुक रुचि के लिए अपील करता है (यौन मामलों में अत्यधिक रुचि)
    • यदि इसका प्रभाव, या किसी एक वस्तु का प्रभाव, उन व्यक्तियों को भ्रष्ट करता है, जो ऐसी सामग्री में निहित मामले को पढ़ने, देखने या सुनने की संभावना रखते हैं।
  • यह खंड ना केवल अश्लील सामग्री को परिभाषित करता है, बल्कि इसकी बिक्री, संचालन, आयात-निर्यात और विज्ञापन को दंडनीय भी बनाता है। ऐसी सामग्री के माध्यम से लाभ कमाना भी, इस धारा के अर्थ में एक अपराध है।
  • धारा 292, के अंतर्गत अपराधों के मामले में, पहली बार दोषसिद्धि होने पर दो साल की सजा एवं 2000 रुपए तक का जुर्माना एवं दूसरी या उससे अधिक बार दोषसिद्धि होने पर पाँच साल की सजा एवं 5000 रुपए तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
  • इस धारा का विस्तार निम्नलिखित पर नहीं होगा -
  • कोई ऐसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण या आकॄति -
    • जिसका प्रकाशन लोकहित में होने के कारण इस आधार पर न्यायोचित साबित हो गया है, कि ऐसी पुस्तक, पुस्तिका, कागज, लेख, रेखाचित्र, रंगचित्र, रूपण या आकॄति विज्ञान, साहित्य, कला या विद्या या सर्वजन सम्बन्धी अन्य उद्देश्यों के हित में है।
    • जो सद्भावपूर्वक धार्मिक प्रयाजनों के लिए रखी या उपयोग में लाई जाती है।
  • कोई ऐसा रूपण जो -
    • प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (1958 का 24) के अर्थ में प्राचीन संस्मारक पर तक्षित, उत्कीर्ण, रंगचित्रित या अन्यथा रूपित हो।
    • किसी मंदिर पर या उसमें या मूर्तियों के प्रवहण के उपयोग में लाए जाने वाले या किसी धार्मिक प्रयोजन के लिए रखे या उपयोग में लाए जाने वाले, किसी रथ पर तक्षित, उत्कीर्ण, रंगचित्रित या अन्यथा रूपित हो।
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