संदर्भ
- केंद्रीय बजट में लद्दाख में दो नई दूरबीनों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है जिसमें एक सूर्य के विस्तृत अध्ययन के लिए और दूसरी ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्यों की खोज हेतु है। साथ ही, वहाँ पहले से कार्यरत एक दूरबीन को उन्नत करने का निर्णय भी लिया गया है।
- लद्दाख पहले ही भारत के प्रमुख खगोलीय केंद्रों में गिना जाता है। यहाँ अनेक वेधशालाएँ मौजूद हैं और हानले (Hanle) को देश के पहले डार्क स्काई रिज़र्व का दर्जा दिया गया है जहाँ रात्रि आकाश की स्वच्छता और प्राकृतिक अंधकार को संरक्षित रखा जाता है।
- इन पहलों से भारत और व्यापक रूप में ग्लोबल साउथ को अत्याधुनिक अंतरिक्ष अनुसंधान तथा गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण में उल्लेखनीय बढ़त मिलने की संभावना है।
नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST): भारत की नई सौर अनुसंधान सुविधा
- नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST) 2-मीटर एपर्चर वाला सौर दूरबीन होगा, जिसे लद्दाख के मेराक क्षेत्र में पैंगोंग त्सो झील के निकट स्थापित किया जाएगा।
- यह दूरबीन दृश्य तथा निकट-अवरक्त तरंगदैर्ध्य में कार्य करेगी, जिससे पृथ्वी से सूर्य की गतिविधियों का अत्यंत सूक्ष्म अध्ययन संभव हो सकेगा। चूँकि विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के अलग-अलग भागों की प्रकृति भिन्न होती है और सभी प्रकार का विकिरण पृथ्वी के वायुमंडल को भेदकर नहीं पहुँच पाता है, इसलिए दूरबीनों की संरचना उनके विशिष्ट वैज्ञानिक उद्देश्यों के अनुरूप तैयार की जाती है।
प्रमुख वैज्ञानिक लक्ष्य
- NLST की सहायता से वैज्ञानिक निम्न विषयों का गहन विश्लेषण कर पाएंगे:
- सूर्य की आंतरिक गतिशीलता और चुंबकीय संरचना
- सौर ज्वालाएँ तथा अन्य उग्र विस्फोटक घटनाएँ
- अंतरिक्ष मौसम की प्रक्रियाएँ, जो पृथ्वी को प्रभावित करती हैं
- सौर व्यवधान उपग्रहों, संचार तंत्रों व अंतरिक्ष अभियानों को प्रभावित कर सकते हैं। इस कारण यह अध्ययन राष्ट्रीय अंतरिक्ष अवसंरचना की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत के सौर अनुसंधान तंत्र को मजबूती
- अगले पाँच से छह वर्षों में इसके संचालन में आने की संभावना है। इसके बाद NLST भारत की तीसरी स्थलीय सौर वेधशाला बन जाएगी। यह निम्न संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करेगी:
- Kodaikanal Solar Observatory (स्थापना वर्ष 1899)
- Udaipur Solar Observatory (स्थापना वर्ष 1975)
- इसके अतिरिक्त यह 2023 में प्रक्षेपित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सौर मिशन आदित्य-L1 के साथ मिलकर कार्य करेगा।
- आदित्य-L1 और NLST का संयुक्त योगदान भारत को हेलियोफिज़िक्स के क्षेत्र में अधिक सक्षम बनाएगा तथा वैश्विक सौर अनुसंधान और अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान में उसकी भूमिका को सुदृढ़ करेगा।
नेशनल लार्ज ऑप्टिकल–नियर इन्फ्रारेड टेलीस्कोप (NLOT): ब्रह्मांड की गहराइयों की ओर
- नेशनल लार्ज ऑप्टिकल–नियर इन्फ्रारेड टेलीस्कोप (NLOT) 13.7-मीटर एपर्चर वाला खंडित दर्पण युक्त दूरबीन होगा, जिसे हानले में स्थापित किया जाएगा।
- इसका मुख्य दर्पण 90 षट्भुज खंडों से मिलकर बनेगा, जो समन्वित रूप से एक बड़े दर्पण की तरह कार्य करेंगे और अत्यंत मंद खगोलीय प्रकाश को एकत्र करने में सक्षम होंगे।
- आने वाले दशक में इसके पूर्ण होने की उम्मीद है जिसके बाद यह विश्व के सबसे बड़े ऑप्टिकल–इन्फ्रारेड दूरबीनों में शामिल होगा।
लद्दाख की उपयुक्तता
लद्दाख की अधिक ऊँचाई, शुष्क एवं ठंडी जलवायु तथा स्वच्छ आकाश इसे खगोलीय अवलोकन के लिए आदर्श स्थान बनाते हैं। यहाँ वायुमंडलीय विक्षोभ कम होता है जिससे अधिक स्पष्ट और सटीक चित्र प्राप्त किए जा सकते हैं।
अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्र
- NLOT निम्नलिखित विषयों में अग्रणी शोध को प्रोत्साहित करेगा:
- बाह्यग्रहों की खोज
- तारकीय और आकाशगंगीय विकास
- सुपरनोवा जैसी घटनाओं का अध्ययन
- ब्रह्मांड की उत्पत्ति से जुड़े प्रश्नों की जांच
- इसकी ऑप्टिकल–इन्फ्रारेड क्षमता दूरस्थ और अत्यंत क्षीण खगोलीय पिंडों के अध्ययन को संभव बनाएगी।
TMT परियोजना से प्राप्त तकनीकी अनुभव
- भारत की थर्टी मीटर टेलीस्कोप (Thirty Meter Telescope: TMT) परियोजना में सहभागिता ने उसे उच्च स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान की है।
- TMT के 30-मीटर दर्पण में 494 षट्भुज खंड सम्मिलित हैं और भारत;
- सेगमेंट सपोर्ट असेंबली का अभिकल्प तैयार कर रहा है
- 80 षट्भुज दर्पण खंडों की आपूर्ति कर रहा है
- यह अनुभव NLOT के जटिल दर्पण तंत्र और संरचनात्मक घटकों के निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।
उन्नत हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (HCT): क्षणिक घटनाओं का अध्ययन
हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (Himalayan Chandra Telescope) (2-मीटर) लद्दाख की प्रारंभिक प्रमुख वेधशालाओं में से एक है। पिछले पच्चीस वर्षों में इसने सुपरनोवा जैसी अल्पकालिक खगोलीय घटनाओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्नयन की योजना
अब इसे 3.7-मीटर खंडित दर्पण दूरबीन में परिवर्तित किया जाएगा, जो ऑप्टिकल–इन्फ्रारेड तरंगदैर्ध्य में कार्य करेगी। इससे इसकी संवेदनशीलता और अवलोकन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं के साथ सहयोग
- उन्नत HCT निम्न वैश्विक परियोजनाओं के साथ तालमेल स्थापित करेगा:
- लीगो-इंडिया (LIGO-India) (हिंगोली, महाराष्ट्र)
- स्क्वायर किलोमीटर ऐरे (Square Kilometre Array) (ऑस्ट्रेलिया एवं दक्षिण अफ्रीका)
- इस सहयोग से गुरुत्वीय तरंगों और रेडियो संकेतों द्वारा पहचानी गई खगोलीय घटनाओं का विस्तृत ऑप्टिकल अध्ययन संभव होगा।
भारतीय खगोल विज्ञान के लिए इन परियोजनाओं का महत्व
- भौगोलिक विशिष्टता: लद्दाख की स्थिति इन तरंगदैर्ध्यों में वैश्विक स्तर पर अद्वितीय अवलोकन अवसर प्रदान करती है।
- उच्च गुणवत्ता का डेटा: ये दूरबीनें सौर भौतिकी, गहन अंतरिक्ष अध्ययन और ब्रह्मांड विज्ञान के लिए नई और महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएँगी।
- अवलोकन समय की उपलब्धता: अंतर्राष्ट्रीय दूरबीनों में सीमित समय मिलता है जबकि इन भारतीय सुविधाओं से देश के वैज्ञानिकों को प्राथमिक व सुनिश्चित पहुंच प्राप्त होगी।
- वैश्विक स्तर पर प्रभाव: NLST एवं NLOT मिलकर भारत को वैश्विक खगोल विज्ञान के अग्रणी देशों में स्थापित कर सकते हैं तथा अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय को महत्वपूर्ण नई जानकारियाँ प्रदान करेंगे।