New
Civil Services Day Offer - Valid Till : 23rd April GS Foundation (P+M) - Delhi : 4th May 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 4th May 2026, 5:30PM Civil Services Day Offer - Valid Till : 23rd April GS Foundation (P+M) - Delhi : 4th May 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 4th May 2026, 5:30PM

लेडी-स्लिपर ऑर्किड

(प्रारंभिक परीक्षा : पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी)

चर्चा में क्यों 

ब्रिटेन में एक दुर्लभ और लगभग विलुप्त मानी जाने वाली दुर्लभ ऑर्किड की प्रजाति ‘लेडी-स्लिपर ऑर्किड’ (Lady slipper's orchid) को 100 वर्षों बाद पुनः प्राकृतिक रूप से खिलते हुए देखा गया है।

लेडी-स्लिपर ऑर्किड के बारे में 

  • परिचय : यह एक पीले रंग की कप-आकार की फूल वाली और बैंगनी पंखुड़ियों वाली ऑर्किड प्रजाति है। 
    • यह ऑर्किड अपनी अनूठी थैलीनुमा पंखुड़ियों के लिए जाना जाता है, जिसे "लैबेलम" कहते हैं।
  • नामकरण : इसका नाम "लेडी-स्लिपर" इसलिए पड़ा क्योंकि इसकी पंखुड़ी महिलाओं के स्लिपर जैसी दिखती है।
  • परिवार : ऑर्किडेसी (Orchidaceae)
  • उपपरिवार : साइप्रिपेडियोइडी (Cypripedioideae)
  • संरचना: इसमें गुलाबी, पीले, सफेद, बैंगनी या हरे रंग के संयोजन हो सकते हैं। स्लिपर जैसी थैली परागणकों (मुख्य रूप से मधुमक्खियों) को आकर्षित करती है।
  • प्रमुख प्रजातियाँ
    • पिंक लेडी-स्लिपर (Cypripedium acaule)
    • शोई लेडी-स्लिपर (Cypripedium reginae)
    • येलो लेडी-स्लिपर (Cypripedium calceolus)
  • विस्तार : यह ऑर्किड विश्व भर में विभिन्न क्षेत्रों विशेष रूप से उत्तरी गोलार्ध के समशीतोष्ण और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों मे में पाया जाता है। 
    • भारत में, यह हिमालयी क्षेत्रों जैसे उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में देखा जा सकता है।
  • विलुप्ति का कारण : 19वीं शताब्दी के विक्टोरियन काल में इसके अत्यधिक संग्रह और दोहन के कारण यह लगभग विलुप्त हो गई थी।
  • पुनः खोज एवं संरक्षण : वर्ष 1930 में यॉर्कशायर डेल्स के एक सुदूर क्षेत्र में एक एकल पौधा खोजा गया, जिसकी स्थिति को गुप्त रखा गया और स्वयंसेवकों द्वारा इसकी चोरी से बचाने के लिए निरंतर निगरानी के साथ संरक्षण प्रयास किए गए। 

हालिया घटना का महत्त्व 

यह घटना केवल एक दुर्लभ पौधे की पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संरक्षण की दीर्घकालिक और सुनियोजित रणनीति की सफलता का महत्वपूर्ण उदाहरण भी है। 

भारत के लिए निहितार्थ

  • स्थानीय जैव विविधता की सुरक्षा : भारत में भी कई दुर्लभ वनस्पति प्रजातियाँ खतरे में हैं, जिन्हें स्थानीय समुदायों और वैज्ञानिकों के सहयोग से पुनर्जीवित किया जा सकता है।
  • दीर्घकालिक दृष्टिकोण आवश्यक : संरक्षण कोई अल्पकालिक प्रयास नहीं है, बल्कि इसे दीर्घकालिक संकल्प और विज्ञान आधारित योजना की आवश्यकता होती है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR