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लिंगायत और पंचमसाली लिंगायत

संदर्भ 

कर्नाटक के लिंगायत समुदाय की एक उप-जाति ‘पंचमसाली लिंगायत’ ने एक बार फिर राज्य के अंतर्गत अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणी 2A में शामिल किए जाने की मांग की है। 

गौरतलब है कि, वर्तमान में लिंगायत समुदाय को कर्नाटक के OBC कोटा की श्रेणी 3B के तहत 5 % कोटा प्राप्त है।

लिंगायत समुदाय के बारे में

  • लिंगायत समुदाय को आधिकारिक तौर पर हिंदू उप-जाति 'वीरशैव लिंगायत' के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, ये ‘बसवन्ना’ के अनुयायी हैं।
  • लिंगायत कर्नाटक में सबसे बड़ा जाति समूह है एवं राज्य की आबादी में लगभग 17 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। 
  • कर्नाटक में अब तक हुए 23 मुख्यमंत्रियों में से 10 इस समुदाय से रहे हैं।

बसवन्ना

  • बसवन्ना 12वीं शताब्दी के समाज सुधारक, दार्शनिक व संत थे, जिन्होंने एक कट्टरपंथी जाति-विरोधी आंदोलन शुरू किया था। 
    • इन्होने विशेष रूप से भगवान शिव के साथ अधिक व्यक्तिगत एवं भावनात्मक रिश्तों पर जोर दिया गया।
  • संत बनने से पहले वे कल्याणी चालुक्य साम्राज्य के राजा बिज्जला द्वितीय के दरबार में कोषाध्यक्ष हुआ करते थे।
  • उन्हें भक्तिभंडारी ('भक्ति का कोषाध्यक्ष'), बसव या बसवेश्वर के नाम से भी जाना जाता है।
  • पल्कुरिकी सोमनाथ द्वारा रचित 13वीं सदी के तेलुगु ग्रंथ, बसव पुराण में जीवन का वर्णन है।

कार्य :   

  • बसव ने अपनी कविता, जिसे ‘वचन’ के नाम से जाना जाता है, के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाने का कार्य किया। इनकी साहित्यिक कृतियों को कन्नड़ भाषा में ‘वचन साहित्य’ के नाम से शामिल किया गया है। 
  • उन्होंने ब्राह्मण अनुष्ठानों एवं मंदिर पूजा का विरोध किया है और एक ऐसे समाज की परिकल्पना की जो जाति विहीन एवं भेदभाव से मुक्त हो तथा जहां पुरुषों व महिलाओं को समान अवसर मिलता हो।
  • पंचमसाली लिंगायत उप-जाति : लिंगायत समुदाय के अंतर्गत 99 उप-जातियां हैं, जिसमें पंचमसाली सबसे बड़ी हैं, लिंगायत समुदाय में इनकी भागीदारी लगभग 70 प्रतिशत है।
    • अन्य प्रमुख उप-जातियों में गनीगा, जंगमा, बनजिगा, रेड्डी लिंगायत, सदर, नोनबा और गौड़-लिंगायत शामिल हैं।

वीरशैव और लिंगायत के बीच अंतर

वीरशैव और लिंगायत शब्द कुछ जगहों पर एक दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार दोनों के बीच कई अंतर हैं; जैसे- 

  • लिंगायत अपनी उत्पत्ति बसवन्ना से मानते हैं, जबकि वीरशैव स्वयं को भगवान् शिव से जोड़ते हैं।
  • लिंगायत अपने ईष्ट के रूप में शिवलिंग की उपासना करते हैं और भगवन शिव को एक निराकार इकाई मानते हैं, जबकि वीरशैव मानते हैं कि शिव एक वैदिक देवता हैं। 
  • वीरशैव के विपरीत, लिंगायत वैदिक साहित्य में विश्वास नहीं करते हैं और बासवन्ना के वचनों (शिक्षाओं) का पालन करते हैं।
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