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मारबर्ग वायरस रोग

हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इथियोपिया में पहली बार मारबर्ग वायरस रोग (MVD) का प्रकोप सामने आया है।

मारबर्ग वायरस रोग के बारे में

  • यह मारबर्ग वायरस के कारण होने वाला एक गंभीर एवं प्राय: घातक रक्तस्रावी बुखार है। इसकी पहली पहचान 1967 में जर्मन शहर मारबर्ग में हुई थी।
  • मारबर्ग वायरस रोग के कारक एजेंट ऑर्थोमारबर्गवायरस मार्बर्गेंस (Orthomarburgvirus Marburgense) प्रजाति के मारबर्ग वायरस (MARV) एवं रेवन वायरस (RAVV) हैं।
  • टेरोपोडिडे कुल (Pteropodidae Family) के एक फ्रूट बैट (एक प्रकार का चमगादड़) राउसेटस एजिप्टियाकस (Rousettus aegyptiacus) को इस वायरस का प्राकृतिक मेजबान माना जाता है। 

मारबर्ग वायरस रोग का संचरण

  • प्रारंभ में यह रोग फ्रूट बैट (Rousettus aegyptiacus) से मनुष्यों में फैलता है। यह संक्रमित व्यक्तियों के शारीरिक द्रव्यों या दूषित सतहों के सीधे संपर्क से अन्य मनुष्यों में फैलता है।
  • इसके अधिकांश प्रकोप उप-सहारा अफ्रीका में हुए हैं जिनमें तंजानिया, युगांडा, अंगोला, घाना, केन्या व जिम्बाब्वे जैसे देश शामिल हैं।

मारबर्ग वायरस रोग के लक्षण

  • इसके प्रारंभिक लक्षण तेज बुखार, गंभीर सिरदर्द व अस्वस्थता हैं। उन्नत चरण में इसमें गंभीर रक्तस्राव, यकृत में समस्या, बहु-अंग विकार, आघात और लक्षण शुरू होने के 8-9 दिनों के भीतर मृत्यु शामिल है।
  • इसका कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है। सहायक देखभाल में पुनर्जलीकरण, इलेक्ट्रोलाइट प्रतिस्थापन व लक्षण प्रबंधन शामिल हैं जिससे जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है। 
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