(प्रारंभिक परीक्षा: आर्थिक और सामाजिक विकास) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय) |
संदर्भ
हाल ही में, भारत सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन (Export Promotion Mission: EPM) के अंतर्गत बाजार पहुँच सहायता (Market Access Support: MAS) पहल की शुरुआत की है।
बाजार पहुँच सहायता (Market Access Support: MAS) पहल के बारे में
- यह पहल निर्यात प्रोत्साहन मिशन की निर्यात दिशा उप-योजना के तहत कार्यान्वित की जा रही है।
- इसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों —विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), पहली बार निर्यात करने वालों तथा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की इकाइयों— को वैश्विक बाजारों से बेहतर ढंग से जोड़ना है।
संस्थागत ढांचा एवं क्रियान्वयन व्यवस्था
- MAS पहल का संचालन वाणिज्य विभाग, MSME मंत्रालय और वित्त मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
- इसके क्रियान्वयन में विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों, निर्यात प्रोत्साहन परिषदों (EPCs), कमोडिटी बोर्ड्स तथा अन्य उद्योग संघों का सहयोग लिया जा रहा है।
- इस बहु-हितधारक मॉडल का उद्देश्य संरचित और परिणामोन्मुखी उपायों के माध्यम से खरीदारों से संपर्क बढ़ाना तथा वैश्विक बाजारों में भारत की उपस्थिति को सुदृढ़ करना है।
MAS के प्रमुख घटक
- MAS हस्तक्षेप के अंतर्गत निर्यात संवर्धन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को वित्तीय एवं संस्थागत समर्थन प्रदान किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
- क्रेता–विक्रेता बैठकें (BSM)
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले एवं प्रदर्शनियाँ
- भारत में आयोजित मेगा रिवर्स BSM (RBSM)
- प्राथमिकता वाले एवं उभरते बाजारों में व्यापार प्रतिनिधिमंडल
- इन गतिविधियों का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों और विदेशी खरीदारों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क को बढ़ाना है।
दीर्घकालिक योजना और MSME पर विशेष फोकस
- MAS के तहत प्रमुख बाजार पहुंच कार्यक्रमों का 3 से 5 वर्ष का पूर्व-स्वीकृत रोलिंग कैलेंडर तैयार किया जाएगा। इससे निर्यातकों एवं आयोजन एजेंसियों को पहले से योजना बनाने और बाजार विकास में निरंतरता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
- साथ ही, समर्थित कार्यक्रमों में कम-से-कम 35% भागीदारी MSME की अनिवार्य की गई है। निर्यात विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए नए भौगोलिक क्षेत्रों और छोटे बाजारों को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रतिनिधिमंडल का न्यूनतम आकार 50 प्रतिभागियों का निर्धारित किया गया है जिसमें रणनीतिक आवश्यकताओं के अनुसार लचीलापन रखा गया है।
वित्तीय युक्तिकरण और डिजिटल शासन
- आयोजन-स्तर पर वित्तीय सहायता की अधिकतम सीमा और लागत-साझाकरण अनुपात को युक्तिसंगत बनाया गया है। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों एवं बाजारों को तरजीही सहायता प्रदान की जाएगी।
- इसके अतिरिक्त ₹75 लाख तक के वार्षिक निर्यात कारोबार वाले छोटे निर्यातकों को आंशिक हवाई किराया सहायता दी जाएगी ताकि नए एवं छोटे निर्यातकों की भागीदारी बढ़ सके।
- सभी प्रक्रियाएँ, जैसे- आयोजन सूचीकरण, प्रस्ताव प्रस्तुत करना, अनुमोदन, प्रतिभागियों का चयन, निधि जारी करना और निगरानी को trade.gov.in पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह डिजिटल रूप से संचालित किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता एवं सुगमता सुनिश्चित होगी।
परिणाम-आधारित मूल्यांकन और तकनीकी विस्तार
- प्रत्येक समर्थित कार्यक्रम में भाग लेने वाले निर्यातकों के लिए अनिवार्य ऑनलाइन फीडबैक तंत्र लागू किया जाएगा, जिसमें खरीदारों की गुणवत्ता, उत्पन्न व्यापारिक अवसरों और बाजार प्रासंगिकता जैसे मापदंड शामिल होंगे। प्राप्त फीडबैक के आधार पर MAS दिशानिर्देशों को क्रमिक रूप से परिष्कृत किया जाएगा।
- इसके अतिरिक्त, मौजूदा बाजार पहुँच उपायों के पूरक के रूप में प्रौद्योगिकी-प्रधान, उभरते और नवविकास क्षेत्रों में संभावित विदेशी खरीदारों के लिए प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट तथा उत्पाद प्रदर्शन से संबंधित एक नया घटक शीघ्र शुरू किए जाने की योजना है। लीड ट्रैकिंग और बाजार सूचना के एकीकरण के लिए अतिरिक्त डिजिटल टूल भी चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे।
महत्व
- MAS पहल भारत के निर्यात संवर्धन दृष्टिकोण में एक संरचनात्मक और डेटा-आधारित परिवर्तन का संकेत देती है। यह MSME और नए निर्यातकों के लिए वैश्विक बाजारों में प्रवेश की बाधाओं को कम करती है, निर्यात विविधीकरण को बढ़ावा देती है तथा भारतीय निर्यातकों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने में सहायक है।
- समग्र रूप से बाजार पहुँच सहायता पहल भारत के निर्यात को टिकाऊ, प्रतिस्पर्धी एवं समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो दीर्घकाल में निर्यात वृद्धि व आर्थिक विकास को गति प्रदान कर सकती है।