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खसरे का प्रकोप

(प्रारंभिक परीक्षा- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2 : स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।)

चर्चा में क्यों 

वर्तमान में मुंबई शहर को खसरे (Measles) के भीषण प्रकोप का सामना करना पड़ रहा है।

क्या है खसरा

  • खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है जो अधिकांशतः बच्चों को प्रभावित करती है। यह छोटे बच्चों में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है।
  • यद्यपि इस रोग का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है परंतु इससे सुरक्षित रहने के लिये एक टीके का प्रयोग किया जाता है जो सुरक्षित होने के साथ-साथ किफायती भी है।
  • यह खांसने और छींकने, निकट व्यक्तिगत संपर्क या संक्रमित नाक या गले के स्राव के सीधे संपर्क से फैलने वाली बीमारी है। 
  • इस रोग से होने वाली मृत्यु के लिये अंधापन, इन्सेफलाइटिस, गंभीर दस्त और निमोनिया जैसी बीमारी से जुड़ी जटिलताएं उत्तरदायी है।
  • इस रोग में खराब पोषण, विटामिन ए की कमी और बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर स्थिति गंभीर हो जाती है।

लक्षण

  • वायरस के संपर्क में आने के लगभग 10 से 14 दिन बाद व्यक्ति में लक्षण दिखने लगते हैं।
  • इसके मुख्य लक्षण बुखार, सूखी खांसी, नाक बहना, गले में खराश और दाने हैं।
  • शरीर पर चकत्ते छोटे लाल धब्बों की तरह दिखाई देते हैं जो थोड़े उभरे हुए रहते हैं। सबसे पहले चेहरे पर दाने निकलते हैं जो कुछ ही दिनों में शरीर के बाकी हिस्सों में भी फैल जाते हैं।

खसरे का टीका

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन सभी बच्चों के लिये खसरे के टीके की दो खुराक की सिफारिश करता है, जिसमें अकेले खसरा या खसरा-रूबेला (MR) या खसरा-मम्प्स-रूबेला (MMR) के संयोजन में टीकाकरण शामिल है।
  • विदित है कि भारत में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत 9-12 महीने की उम्र में खसरे के टीकाकरण की पहली और 16-24 महीने की उम्र में दूसरी खुराक दी जाती है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, टीके की खुराक से वंचित बच्चों में इस बीमारी के प्रति उच्च जोखिम होता है, जो कुछ मामलों में घातक हो सकता है या महत्त्वपूर्ण रुग्णता का कारण बन सकता है।
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