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माइग्रेशन ट्रैकिंग सिस्टम

(प्रारंभिक परीक्षा- आर्थिक और सामाजिक विकास- सतत् विकास, गरीबी, समावेशन, जनसांख्यिकी, सामाजिक क्षेत्र में की गई पहल आदि)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 1 : जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय)

संदर्भ

हाल ही में, देश में अपनी तरह की पहली परियोजना के रूप में महाराष्ट्र सरकार ने ‘व्यक्तिगत विशिष्ट पहचान संख्या’ के माध्यम से सुभेद्य मौसमी प्रवासी श्रमिकों के प्रवासन के संबंध में जानकारी हेतु एक वेबसाइट-आधारित ‘माइग्रेशन ट्रैकिंग सिस्टम’ (Migration Tracking System : MTS) एप्लिकेशन विकसित किया है।

एम.टी.एस. परियोजना

  • इस परियोजना की परिकल्पना 18 वर्ष तक के बच्चों, स्तनपान कराने वाली माताओं और गर्भवती महिलाओं सहित प्रवासी लाभार्थियों को पोषण आपूर्ति, टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच आदि जैसी एकीकृत बाल विकास सेवाओं (Integrated Child Development Scheme : ICDS) की निरंतरता बनाए रखने के लिये की गई है। 
  • राज्य के भीतर से या बाहर से अपने मूल स्थानों पर प्रवासी श्रमिकों के लौटने तक उनके परिवारों के लिये आई.सी.डी.एस. की पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिये उनके प्रवास को ट्रैक किया जाएगा।
  • राज्य सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग ने विगत वर्ष नवंबर माह में आदिवासी बहुल छह जिलों- गढ़चिरौली, चंद्रपुर, अमरावती, जालना, पालघर और नंदुरबार में इसे पायलट परियोजना के रूप में लॉन्च किया था।

परियोजना की आवश्यकता

  • व्यापक स्तर पर श्रमिकों के मौसमी प्रवास के बावजूद अन्य राज्यों की तरह महाराष्ट्र में इसकी गणना के लिये कोई संस्थागत तंत्र नहीं है। इस पहल के माध्यम से राज्य को जिले के भीतर, अंतर-जिला और अंतर्राज्यीय श्रमिक प्रवास के आँकड़ों को एकत्र करने में सहायता मिलेगी।
  • कोविड-19 जनित लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में विस्थापन के कारण महिलाएँ और बच्चे आई.सी.डी.एस. योजना के तहत प्राप्त होने वाले पोषण, टीकाकरण और अन्य सेवाओं से वंचित हो गए थे। यह पोर्टल इन वंचित समूहों की निगरानी कर इन्हें उचित सुविधाएँ मुहैया कराएगा।

परियोजना की कार्यप्रणाली

  • इस पायलट परियोजना के कार्यान्वयन के लिये महाराष्ट्र ने गुजरात के सूरत और तेलंगाना के चार जिलों आदिलाबाद, निर्मल, मंचेरियल और आसिफाबाद के साथ करार किया है।
  • इसे सुविधाजनक बनाने के लिये इस ऐप को इन दोनों राज्यों के साथ साझा किया गया तथा उनकी भाषा में इसे डिज़ाइन किया गया।
  • इस परियोजना के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सर्वप्रथम अपने क्षेत्रों के प्रवासी लाभार्थियों को एम.टी.एस. वेबसाइट ऐप पर श्रमिकों के आधार, पैन कार्ड या राशन कार्ड आदि पहचान पत्र का उपयोग करके पंजीकृत करना होगा। 
  • नाम के अतिरिक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रवासी बच्चों की आयु, वजन, लम्बाई का उल्लेख करना होगा, जिन्हें पोषण संबंधी- गंभीर, मध्यम या तीव्र श्रेणियों में रखा जाएगा। इसके आधार पर बच्चों को उनके नए स्थान पर पोषण लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।
  • इस ऐप पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता विभिन्न अनौपचारिक क्षेत्रों के बारे में विवरण एकत्र करेंगे जहाँ श्रमिक बच्चों के साथ प्रवास कर रहे हैं।

निष्कर्ष

महाराष्ट्र सरकार द्वारा आरंभ की गई यह परियोजना प्रवासी श्रमिकों को आई.सी.डी.एस. योजना के तहत प्राप्त होने वाले पोषण, टीकाकरण और अन्य सेवाओं को उपलब्ध कराने में मदद करेगा। यह प्रवासी श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार करेगा और वर्ष 2030 के लिये निर्धारित सतत् विकास लक्ष्य-2 (भुखमरी) को भी प्राप्त करने में सहायक होगा।

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