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‘मिलेट्स-स्मार्ट न्यूट्रिटिव फूड' कॉन्क्लेव

(प्रारंभिक परीक्षा :  राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)

चर्चा में क्यों

हाल ही में, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने नई दिल्ली में ‘मिलेट्स-स्मार्ट न्यूट्रिटिव फूड' कॉन्क्लेव का आयोजन किया है। 

प्रमुख बिंदु

  • इस कॉन्क्लेव का आयोजन मंत्रालय द्वारा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के माध्यम से मोटे अनाज के निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। 
  • विदित है कि वर्ष 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के रूप में मनाए जाने की घोषणा की है। 
  • मोटे अनाज की 16 प्रमुख किस्में हैं, जिनमें ज्वार, बाजरा, रागी, कंगणी, चीना, कोदो, सावा/संवा/झंगोरा, कुटकी, बक व्हीट एवं कुट्टु, चैलाई आदि शामिल हैं।

भारत की स्थिति

  • खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, वर्ष 2020 में लगभग 30 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) मोटे अनाज के वैश्विक उत्पादन में से भारत द्वारा लगभग 12.49 एम.एम.टी. का उत्पादन किया गया, जो कुल मोटा अनाज उत्पादन का 41% है।
  • भारत ने वर्ष 2021-22 में मोटे अनाज के उत्पादन में 27% की वृद्धि दर्ज की है। देश के शीर्ष पाँच मोटा अनाज उत्पादक राज्य क्रमशः राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और मध्य प्रदेश हैं। 

मोटे अनाज का निर्यात 

  • भारत में मोटे अनाज के कुल उत्पादन का लगभग 1% निर्यात किया जाता है जबकि भारत से मोटे अनाज के मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्यात लगभग नगण्य है।
  • विदित है कि भारत ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में मोटे अनाज के निर्यात में 8.02% की वृद्धि दर्ज की है।  
  • भारत के प्रमुख मोटे अनाज निर्यातक देशों में यू.ए.ई., नेपाल, सऊदी अरब, लीबिया, ओमान, मिस्र, ट्यूनीशिया, यमन, यू.के. और अमेरिका आदि शामिल हैं। 
  • भारत द्वारा निर्यात किये जाने वाले मोटे अनाज की किस्मों में बाजरा, रागी, कैनरी, ज्वार और कुट्टू प्रमुख रूप से शामिल हैं। 

सरकारी प्रयास 

  • केंद्र सरकार ने मोटे अनाज से निर्मित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और पोषक अनाज की आपूर्ति शृंखला में बाधाओं को दूर करने के लिये ‘पोषक अनाज निर्यात संवर्द्धन फोरम’ का गठन किया है।
  • सरकार ने महत्त्वपूर्ण मोटे अनाज के प्रचार के लिये प्रमुख देशों में फ़ूड शो, क्रेता-विक्रेता बैठकों और रोड शो गतिविधियों को आयोजित करने की योजना बनाई है। 

‘पोषक खाद्य’ के रूप में  

  • चावल और गेहूं जैसे अत्यधिक उपभोग वाले अनाजों की तुलना में मोटे अनाज में बेहतर पोषण संबंधी गुण होते हैं। 
  • मोटे अनाज कैल्शियम, लोहा और फाइबर से भरपूर होते हैं जो बच्चों में संपूर्ण विकास के लिये आवश्यक पोषक तत्त्वों को बढ़ाने में सहायता करते हैं।
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