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खनिज सुरक्षा वित्त नेटवर्क

(मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र-3 खनिज संसाधन)

संदर्भ 

हाल ही में भारत आधिकारिक रूप से अमेरिका के नेतृत्व वाले खनिज सुरक्षा वित्त नेटवर्क (Minerals Security Finance Network) में शामिल हो गया है। जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिज (critical mineral ) आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने में वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है।

खनिज सुरक्षा वित्त नेटवर्क (MSFN)

  • MFSN, खनिज सुरक्षा भागीदारी (MSP) की वित्त पोषण संबंधी एक नई पहल है। 
  • उद्देश्य : इस वित्त नेटवर्क का उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और यूरोप के संस्थानों को एक साथ लाकर  सहयोग, सूचना विनिमय और सह-वित्तपोषण को बढ़ावा देना है। 

खनिज सुरक्षा भागीदारी (MSP) 

  • खनिज सुरक्षा भागीदारी स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों और धातुओं की आपूर्ति श्रृंखलाओं पर केंद्रित एक ढांचा है।
    • इसकी स्थापना वर्ष 2022 में अमेरिका द्वारा की गई थी। 
  • उद्देश्य : मूल्य श्रृंखला के साथ रणनीतिक परियोजनाओं के लिए लक्षित वित्तीय और राजनयिक समर्थन की सुविधा के लिए मेजबान सरकारों और उद्योग के साथ काम करने के माध्यम से विविध और टिकाऊ महत्वपूर्ण ऊर्जा खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास में तेजी लाना। 
  • भागीदार देश : एमएसपी विश्व स्तर पर जिम्मेदार महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में सार्वजनिक और निजी निवेश को उत्प्रेरित करने के लिए 14 देशों और यूरोपीय संघ का सहयोग मंच है।
    • एमएसपी साझेदारों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, नॉर्वे, कोरिया गणराज्य, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ (यूरोपीय आयोग द्वारा प्रतिनिधित्व) शामिल हैं। 
  • MSP भागीदार वैश्विक खनिज क्षेत्र में पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) मानकों को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। यह केवल उन परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है जो उच्च, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ESG मानकों को पूरा करती हैं। 
  • एमएसपी चार प्रमुख महत्वपूर्ण खनिज चुनौतियों के समाधान पर आधारित है - 
    1. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना और उन्हें स्थिर बनाना;
    2. उन आपूर्ति श्रृंखलाओं में निवेश करना;
    3. खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण क्षेत्रों में उच्च पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन मानकों को बढ़ावा देना; और
    4. महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण में वृद्धि करना।

भारत के हित

  • महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति में विविधता : इस पहल में भारत की भागीदारी अर्जेंटीना, चिली, ऑस्ट्रेलिया और कुछ अफ्रीकी देशों से महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) की आपूर्ति में विविधता लाने और उसे सुरक्षित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। 
    • इसके आलावा मध्य एशियाई देश कजाकिस्तान को भी भारत की खनिज आवश्यकताओं के लिए संभावित स्रोत के रूप में माना जा रहा है।
  • मेक इन इंडिया को बल : यह भारत में एक मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग के प्रोत्साहन के साथ, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को सुरक्षित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
  • आयात निर्भरता में कमी : भारत के लिए यह साझेदारी महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता कम करने और अपनी हरित ऊर्जा पहलों के लिए एक मजबूत, आत्मनिर्भर आपूर्ति श्रृंखला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

महत्वपूर्ण खनिज (critical mineral) 

  • महत्त्वपूर्ण खनिज ऐसे तत्त्व हैं जो आवश्यक आधुनिक प्रौद्योगिकियों के निर्माण के प्रमुख बुनियादी घटक हैं। 
    • इन खनिजों के अंतर्गत मुख्यतः ग्रेफाइट, लिथियम और कोबाल्ट शामिल हैं।
  • इन खनिजों का उपयोग मोबाइल फोन, कंप्यूटर, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन एवं हरित प्रौद्योगिकियों जैसे सौर पैनल व पवन टरबाइन बनाने में किया जाता है। इस प्रकार, ये खनिज हरित ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा में सहायक हैं। 
  • इसके आलावा एयरोस्पेस, संचार एवं रक्षा उद्योग भी इन खनिजों पर निर्भर हैं, जिनका उपयोग लड़ाकू जेट, ड्रोन, रेडियो सेट एवं अन्य महत्त्वपूर्ण उपकरणों के निर्माण में किया जाता है। 
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