हाल ही में, छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित जुडिया पारा में आयोजित एक ग्रामोत्सव के दौरान दंडामी मड़िया (Dandami Maria) जनजाति के लोगों ने अपने पारंपरिक बाइसन हॉर्न (गौर सिंग) मारिया नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी, जिसने स्थानीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को उजागर किया।
दंडामी मड़िया जनजाति: एक परिचय
- दंडामी मड़िया जनजाति को बाइसन हॉर्न मारिया या खलपति मारिया जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह जनजाति मुख्यत: छत्तीसगढ़ के वनवासी क्षेत्रों में निवास करती है और स्वयं को व्यापक गोंड सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग मानती है।
- इस जनजाति की पहचान सिर पर पहनने वाले उनके विशिष्ट आभूषण से जुड़ी है जो जंगली बाइसन के सींगों के आकार का होता है। विशेष अवसरों और उत्सवों के दौरान पुरुष प्रायः सिर ढकने वाले इस पारंपरिक आभूषण को धारण करते हैं जिससे उन्हें ‘बाइसन हॉर्न मारिया’ नाम मिला।
- दंडामी मड़िया समुदाय की अपनी विशिष्ट भाषा है जिसे ‘दंडामी मड़िया’ कहा जाता है। इसके अतिरिक्त, इस समुदाय के कुछ सदस्य गोंडी भाषा की विभिन्न बोलियाँ भी बोलते हैं जो द्रविड़ भाषा परिवार से संबंधित एक मौखिक परंपरा वाली भाषा है।
सामाजिक संरचना एवं जीवन शैली
- दंडामी मड़िया समाज की अर्थव्यवस्था मुख्यत: कृषि पर आधारित है जिसे शिकार एवं मछली पकड़ने जैसी पारंपरिक गतिविधियाँ सहारा देती हैं। इस समुदाय के धार्मिक विश्वासों में हिंदू आस्थाओं और जीववाद (Animism) का समन्वय देखने को मिलता है।
- इस समुदाय की सामाजिक व्यवस्था में ‘घोटुल’ का विशेष स्थान है जो अविवाहित युवक-युवतियों के लिए एक पारंपरिक सामुदायिक छात्रावास होता है और सामाजिक प्रशिक्षण का केंद्र माना जाता है। दंडामी मड़िया समाज में तलाक एवं विधवा पुनर्विवाह को सामाजिक स्वीकृति प्राप्त है।
बाइसन हॉर्न मारिया नृत्य
- दंडामी मड़िया जनजाति की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का प्रमुख माध्यम उनका पारंपरिक बाइसन हॉर्न मारिया नृत्य है जिसे प्राय: ग्राम उत्सवों और विशेष समारोहों के अवसर पर प्रस्तुत किया जाता है।
- इस नृत्य में पुरुष व महिलाएँ दोनों भाग लेते हैं और यह उनकी सामूहिक पहचान, उत्सवधर्मिता एवं सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक है।