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 गैलापागोस द्वीपसमूह  

चर्चा में क्यों ? 

  • गैलापागोस नेशनल पार्क ने फ्लोरेआना द्वीप के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। हाल ही में 158 हाइब्रिड (संकर) विशाल कछुओं को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। ये कछुए Chelonoidis niger प्रजाति का वह महत्वपूर्ण डीएनए साझा करते हैं, जिसे लगभग डेढ़ सदी से विलुप्त मान लिया गया था। 

गैलापागोस द्वीपसमूह: प्रकृति का सजीव प्रयोगशाला

  • यह द्वीपसमूह केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि जैव विविधता का वैश्विक केंद्र है।
  • भौगोलिक परिचय: प्रशांत महासागर में इक्वाडोर से लगभग 1,000 किमी दूर स्थित यह क्षेत्र 19 मुख्य और 100 से अधिक छोटे द्वीपों का समूह है।
  • ज्वालामुखीय जन्म: इसका निर्माण नाज़्का, कोकोस और प्रशांत विवर्तनिक प्लेटों के संगम पर होने वाली ज्वालामुखीय गतिविधियों से हुआ है।
  • डार्विन का प्रेरणा स्रोत: इसे "विकासवाद का जीवित संग्रहालय" कहा जाता है। यहीं के अद्वितीय जीवों का अध्ययन कर चार्ल्स डार्विन ने 'प्राकृतिक चयन' (Natural Selection) का विश्व प्रसिद्ध सिद्धांत दिया था। 
  • विशिष्ट प्रजातियाँ: समुद्री इगुआना, ब्लू-फुटेड बूबी और विशाल कछुए जैसी प्रजातियाँ केवल यहीं पाई जाती हैं। इसी विशिष्टता के कारण 1978 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिला।  

संकर (हाइब्रिड) कछुए और विलुप्त प्रजाति का पुनरुद्धार 

  • 19वीं शताब्दी के मध्य तक अत्यधिक शिकार के कारण फ्लोरेआना द्वीप की मूल कछुआ प्रजाति विलुप्त हो गई थी।
  • वैज्ञानिक चमत्कार: वैज्ञानिकों ने इसाबेला द्वीप के वुल्फ ज्वालामुखी क्षेत्र में इन कछुओं के ऐसे वंशज खोजे, जिनमें मूल प्रजाति का डीएनए मौजूद था। चयनात्मक प्रजनन कार्यक्रम के माध्यम से तैयार किए गए इन संकर कछुओं में 40% से 80% तक मूल डीएनए है। 
  • IUCN स्थिति: Chelonoidis वंश की अधिकांश प्रजातियाँ 'संकटग्रस्त' (Endangered) या 'अत्यंत संकटग्रस्त' श्रेणी में हैं। मूल Chelonoidis niger को जंगली अवस्था में विलुप्त माना जाता है, इसलिए ये हाइब्रिड कछुए उस प्रजाति की आखिरी उम्मीद हैं। 

पारिस्थितिकी अभियंता के रूप में भूमिका 

  • इन कछुओं को केवल उनकी प्रजाति बचाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे द्वीप के स्वास्थ्य के लिए छोड़ा गया है। 
  • परिदृश्य का निर्माण: ये कछुए 'इकोलॉजिकल इंजीनियर्स' कहलाते हैं। ये बीजों का प्रसार करते हैं और वनस्पति को नियंत्रित रखते हैं। इनके द्वारा बनाए गए मिट्टी के गड्ढे (Wallows) छोटे जीवों के लिए घर का काम करते हैं। 
  • विशिष्ट शारीरिक बनावट: फ्लोरेआना के इन कछुओं का कवच 'सैडलबैक' (काठी के आकार का) होता है। यह संरचना उन्हें गर्दन ऊँची उठाकर ऊँचे कैक्टस खाने में मदद करती है।
  • सुरक्षा और आयु: छोड़े गए कछुओं की आयु 8 से 13 वर्ष के बीच है। इस उम्र तक वे इतने मजबूत हो जाते हैं कि बाहरी शिकारियों (जैसे जंगली बिल्ली या चूहे) से खुद को बचा सकें। इनकी जीवन प्रत्याशा 100 वर्ष से भी अधिक होती है। 
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