New
Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM Navratri offer UPTO 75% + 10% Off | Valid till 26th March GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 17th March 2026 Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM Navratri offer UPTO 75% + 10% Off | Valid till 26th March GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 17th March 2026

नैनोबोट्स

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के डॉ. अंबरीश घोष को वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित ‘न्यूयॉर्क एकेडमी ऑफ साइंसेज-टाटा संस ट्रांसफॉर्मेशन पुरस्कार’ प्रदान किया गया है। यह सम्मान उन्हें लक्षित कैंसर थेरेपी (Targeted Cancer Therapy) के लिए विकसित किए गए चुंबकीय नैनोबोट्स के लिए मिला है जो चिकित्सा जगत में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।

क्या हैं नैनोबोट्स

  • नैनोबोट्स नैनोमीटर पैमाने पर निर्मित ऐसी सूक्ष्म मशीनें हैं जिन्हें मानव शरीर के भीतर उन स्थानों तक पहुँचने के लिए डिज़ाइन किया गया है जहाँ पारंपरिक दवाएँ या सर्जिकल उपकरण नहीं पहुँच सकते। 
  • यह विशेष रूप से आंतरिक ट्यूमर और दुर्गम ऊतकों के निदान एवं उपचार में अत्यंत प्रभावी हैं।

कार्यप्रणाली 

  • ये नैनोबोट्स बैक्टीरिया से प्रेरित सर्पिलाकार (Helical) संरचना वाले ‘नैनोस्विमर’ हैं जो प्रोपेलर या कॉर्कस्क्रू की भांति गति करते हैं।
  • इनमें मौजूद आयरन (लोहा) घटक बाह्य चुंबकीय क्षेत्र की मदद से इन्हें रक्त प्रवाह और सघन ऊतकों के माध्यम से सटीक दिशा में संचालित करने की अनुमति देता है।
  • इन नैनोबोट्स की सतह पर दवाओं को लेपित किया जाता है ताकि वे स्वस्थ कोशिकाओं को प्रभावित किए बिना सीधे कैंसर कोशिकाओं तक पहुँचती हैं।
  • ये नैनोबोट्स चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव से स्थानीय स्तर पर 42°C से अधिक ऊष्मा उत्पन्न कर सकते हैं जिससे कैंसर कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं।

मुख्य विशेषताएँ एवं लाभ 

  • यह तकनीक कैंसर कोशिकाओं को प्राथमिकता से चुनती है जिससे कीमोथेरेपी जैसे उपचारों के दुष्प्रभाव (Side-effects) कम हो जाते हैं।
  • ये नैनोबोट्स उन सघन ट्यूमर तक पहुँचने में सक्षम हैं जहाँ रक्त वाहिकाएँ कम होती हैं और जो सामान्य स्कैन में दिखाई नहीं देते हैं।
  • ये एक साथ दवा वाहक (Drug Carrier), उपचार एजेंट एवं इमेजिंग बीकन (MRI के लिए) के रूप में कार्य करते हैं।
  • ये सिलिका और लोहे जैसे जैव-अनुकूल (Bio-compatible) पदार्थों से बने हैं जो चिकित्सा उपयोग के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।
  • इनका सफल परीक्षण स्तन और अंडाशय के कैंसर के साथ-साथ दंत संक्रमण (Dental Infections) के उपचार में भी किया गया है।  

चुनौतियाँ 

  • वर्तमान में यह तकनीक मुख्यत: लैब (सेल कल्चर) और पशु मॉडलों पर सफल रही है; मानव नैदानिक परीक्षण (Clinical Trials) अभी प्रतीक्षित हैं।
  • मानव शरीर के लिए पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सत्यापन एवं विनियामक अनुमोदन की आवश्यकता है।
  • भविष्य में इसकी सफलता बड़े पैमाने पर उत्पादन लागत, सामर्थ्य एवं डॉक्टरों द्वारा इसे स्वीकार किए जाने पर निर्भर करेगी।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X