New
Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 17th March 2026 Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 17th March 2026

NAP-AMR 2.0: भारत की नई एंटीमाइक्रोबियल रणनीति

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।)

संदर्भ

हाल ही में भारत ने नेशनल एक्शन प्लान ऑन एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (NAP-AMR 2.0) जारी किया है, जो वर्ष 2025–29 की अवधि के लिए बनाया गया है। यह योजना ऐसे समय में आई है जब एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (AMR) मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, कृषि, मछली पालन, खाद्य श्रृंखला और पर्यावरण सभी को प्रभावित कर रहा है।

पृष्ठभूमि

  • भारत ने वर्ष 2017 में पहला NAP-AMR लॉन्च किया था। उस योजना से:
    • AMR के प्रति राष्ट्रीय जागरूकता बढ़ी
    • बहु-क्षेत्रीय भागीदारी में सुधार हुआ
    • लैब नेटवर्क मजबूत हुए
    • निगरानी और एंटीमाइक्रोबियल स्ट्यूअर्डशिप को बढ़ावा मिला
    • वन हेल्थ (One Health) दृष्टिकोण को आधिकारिक मान्यता मिली
  • हालांकि, राज्य स्तर पर क्रियान्वयन बहुत सीमित रहा। 
  • केवल कुछ राज्यों केरल, मध्य प्रदेश, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, गुजरात, सिक्किम और पंजाब ने राज्य स्तरीय AMR एक्शन प्लान बनाए और उन पर आंशिक रूप से काम किया। 
  • सभी मुख्य निर्धारक जैसे स्वास्थ्य सेवाएँ, पशु चिकित्सा, फार्मेसी नियमन, कृषि में एंटीबायोटिक उपयोग और कचरा प्रबंधन राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, इसलिए सिर्फ राष्ट्रीय दिशा-निर्देश पर्याप्त नहीं थे।

NAP-AMR 2.0 के बारे में

  • NAP-AMR 2.0 एक अधिक परिपक्व और कार्यान्वयन-उन्मुख राष्ट्रीय योजना है, जिसमें स्पष्ट टाइमलाइन, स्पष्ट जिम्मेदारियाँ, संसाधन योजना, वैज्ञानिक नवाचार पर अधिक ध्यान और ‘वन हेल्थ’ प्रणाली का गहन विस्तार शामिल हैं।
  • यह योजना AMR को सिर्फ स्वास्थ्य समस्या नहीं बल्कि राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकता के रूप में देखती है।

मुख्य विशेषताएँ

  • ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण का विस्तार
    • मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, कृषि, जलीय कृषि, खाद्य श्रृंखला और पर्यावरण को जोड़ती है।
  • नवाचार पर फोकस
    • रैपिड डायग्नोस्टिक्स
    • एंटीबायोटिक विकल्प
    • पॉइंट-ऑफ़-केयर टूल
    • पर्यावरण निगरानी
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी
    • क्योंकि स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा सेवाओं का बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र में है।
  • इंटीग्रेटेड सर्विलांस
    • मानव, पशु, कृषि और पर्यावरण क्षेत्रों के बीच एकीकृत डेटा प्रणाली।
  • सशक्त राष्ट्रीय शासन ढाँचा
    • नीति आयोग के तहत सहयोगी एवं निगरानी समिति
    • राज्यों में राज्य AMR सेल की स्थापना
    • राष्ट्रीय डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी
  • स्पष्ट जिम्मेदारी विभाजन
    • केंद्र और राज्यों के बीच भूमिकाएँ स्पष्ट की गई हैं।

यह भी जानिए!

वन हेल्थ एक ऐसा एकीकृत दृष्टिकोण है जो मानव, पशु, पौधों और पर्यावरण के स्वास्थ्य को आपस में जुड़ा हुआ मानता है और उन्हें एक साथ संतुलित और अनुकूलित करने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य कई विषयों के सहयोगात्मक प्रयासों से लोगों, जानवरों और पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। यह दृष्टिकोण नई और उभरती बीमारियों को रोकने, एंटीबायोटिक प्रतिरोध से निपटने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

महत्व

  • AMR भारत में बढ़ती मौतों और बीमारी के लिए प्रमुख खतरा है।
  • खाद्य श्रृंखला, पानी, मानव-पशु संपर्क और पर्यावरण प्रदूषण से AMR तेजी से बढ़ता है।
  • अस्पतालों से बाहर भी AMR का व्यापक प्रसार हुआ है।
  • यह योजना राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत कार्रवाई का ढाँचा देती है।
  • निजी और सार्वजनिक सभी क्षेत्रों को जोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी नियंत्रण की संभावना बढ़ती है।

चिंताएँ

  • राज्य स्तर पर योजना को लागू करने की बाध्यकारी व्यवस्था नहीं है।
  • राज्यों को ‘AMR कार्य योजना’ बनाने की अनिवार्यता नहीं।
  • कोई संयुक्त समीक्षा तंत्र नहीं।
  • NHM की तरह वित्तीय प्रोत्साहन या दंड संरचना नहीं दी गई है।
  • AMR सेल और राज्य योजना बनाने के लिए ठोस कानूनी या प्रशासनिक दबाव नहीं।
  • बिना राज्य-स्तरीय सक्रियता, राष्ट्रीय योजना "दस्तावेज़" बनकर रह जाने का खतरा।

चुनौतियाँ

  • भिन्न-भिन्न राज्यों की क्षमता और संसाधनों में बड़ा अंतर
  • कृषि व पशु चिकित्सा क्षेत्रों में एंटीबायोटिक उपयोग पर कम निगरानी
  • निजी क्षेत्र में डेटा रिपोर्टिंग न्यूनतम
  • पर्यावरण और कचरा प्रबंधन की निगरानी कमजोर
  • बहु-विभागीय समन्वय का अभाव
  • वन हेल्थ ढाँचा अभी भी प्रशासनिक रूप से मजबूत नहीं
  • AMR से जुड़े जैविक कचरे का सुरक्षित निपटान बड़ी चुनौती

आगे की राह

  • केंद्र–राज्य संयुक्त AMR परिषद की स्थापना
    • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में
    • नियमित समीक्षा, संयुक्त निर्णय और समस्या समाधान
  • राज्यों को औपचारिक रूप से निर्देश
    • निर्धारित समय सीमा में राज्य AMR कार्य योजना बनाना और लागू करना
    • वार्षिक समीक्षा अनिवार्य
  • वित्तीय प्रोत्साहन प्रणाली
    • NHM के तहत शर्त आधारित अनुदान
    • लैब नेटवर्क, सर्विलांस और स्ट्यूअर्डशिप को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त फंडिंग
  • निजी क्षेत्र की नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग
    • अस्पताल, फार्मेसी, पशु चिकित्सा और खाद्य व्यवसायों से डेटा संग्रह
  • सार्वजनिक जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन अभियान
    • मानव और पशु दोनों क्षेत्रों के लिए
  • पर्यावरणीय निगरानी को मजबूत करना
    • नदियों, अपशिष्ट नालों, सीवेज सिस्टम में एंटीबायोटिक अवशेष की जाँच
  • मल्टी-सेक्टरल प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण
    • स्वास्थ्य, पशुपालन, कृषि, नगर निकाय सभी विभागों में कौशल विकास

निष्कर्ष

NAP-AMR 2.0 भारत के लिए वैज्ञानिक, रणनीतिक और प्रशासनिक रूप से एक मजबूत ढाँचा प्रस्तुत करता है। लेकिन इसकी सफलता का मुख्य आधार केंद्र और राज्यों की साझा प्रतिबद्धता और समन्वय है। यदि राज्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है, वित्तीय और प्रशासनिक प्रोत्साहन दिए जाते हैं, और बहु-क्षेत्रीय ‘वन हेल्थ’ ढाँचा प्रभावी रूप से लागू होता है, तो NAP-AMR 2.0 भारत की AMR लड़ाई को एक निर्णायक मोड़ दे सकता है। अन्यथा, यह योजना केवल एक दस्तावेज़ बनकर रह जाने का जोखिम रखती है।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X