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नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट ग्रीनफील्ड कॉरिडोर

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि)

संदर्भ 

हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने महाराष्ट्र के नासिक, सोलापुर एवं अक्कलकोट को जोड़ने वाले छह लेन के ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के निर्माण को 19,142 करोड़ रुपए की कुल लागत से मंजूरी दे दी है। 

परियोजना का स्वरूप एवं मॉडल

  • लगभग 374 किमी. लंबा यह कॉरिडोर बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) टोल मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। यह परियोजना प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा है। 
  • इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत भारत के एकीकृत परिवहन बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुए क्षेत्रीय एवं अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी में सुधार करना है।

मार्ग एवं कनेक्टिविटी

  • प्रस्तावित कॉरिडोर नासिक, अहिल्यानगर एवं सोलापुर जैसे प्रमुख क्षेत्रीय केंद्रों को कुरनूल से जोड़ेगा। इसे कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों एवं एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है जिनमें शामिल हैं:
    • वधावां बंदरगाह इंटरचेंज के पास दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे
    • नासिक में आगरा–मुंबई कॉरिडोर
    • पांगरी के समीप समृद्धि महामार्ग 
  • परियोजना के पूर्ण होने पर यह भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटों के बीच निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करेगा। 

यात्रा समय एवं रसद दक्षता पर प्रभाव 

  • सरकारी अनुमानों के अनुसार, इस कॉरिडोर के निर्माण से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। वर्तमान में लगभग 31 घंटे का सफर घटकर 17 घंटे रह जाएगा, अर्थात लगभग 45% की कमी आएगी। इसके साथ ही, यात्रा दूरी में लगभग 201 किलोमीटर की कमी होगी।
  • इससे विशेष रूप से कोप्पार्थी एवं ओरवाकल जैसे राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) से जुड़े केंद्रों के लिए माल ढुलाई व रसद दक्षता में सुधार होगा।

रोजगार सृजन 

  • रोजगार सृजन के संदर्भ में इस परियोजना से लगभग 251 लाख मानव-दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार और लगभग 314 लाख मानव-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। 
  • इसके अलावा, कॉरिडोर के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि के माध्यम से अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।

अन्य तथ्य 

  • इस परियोजना का नासिक-तालेगांव दिघे खंड पुणे-नासिक एक्सप्रेसवे की आवश्यकता को भी पूरा करेगा, जिसकी पहचान एन.आई.सी.डी.सी. द्वारा की गई है और महाराष्ट्र सरकार द्वारा इस पर काम किया जा रहा है। 
  • उच्च गति एवं नियंत्रण वाले कॉरिडोर के रूप में डिज़ाइन किया गया यह राजमार्ग 60 किमी. प्रति घंटे की औसत वाहन गति को सहन कर सकेगा, जबकि इसकी डिज़ाइन गति 100 किमी. प्रति घंटे तक है। 
  • इस परियोजना से यातायात जाम में कमी आने, सड़क सुरक्षा में सुधार होने, परिचालन लागत कम होने और यात्री एवं माल ढुलाई यातायात की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होने की उम्मीद है। 
  • यह कॉरिडोर नासिक, अहिल्यानगर, धराशिव एवं सोलापुर जिलों में बुनियादी ढांचे में सुधार करके क्षेत्रीय आर्थिक विकास में भी योगदान देने की उम्मीद है। 
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