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राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम (NUCFDC)

प्रारंभिक परीक्षा – राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम
मुख्य परीक्षा - सामान्य अध्ययन, पेपर-3

चर्चा में क्यों

केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम (NUCFDC) का 02 मार्च, 2024 को उद्घाटन किया।

NUCFDC

प्रमुख बिंदु 

  • राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम (NUCFDC) भारत में शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए एक अंब्रेला संगठन होगा।
  • यह सहकारिता क्षेत्र के लिए एक स्व-विनियामक संगठन के रूप में कार्य करेगा।

राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम (National Urban Co-operative Finance and Development Corporation, NUCFDC) :

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों पर विश्वनाथन समिति गठित की थी।
  • इस समिति ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक अंब्रेला संगठन के गठन की सिफारिश की थी।
  • वर्ष 2019 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए अंब्रेला संगठन के गठन हेतु नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसाइटीज लिमिटेड (NAFCUB) को विनियामक संबंधी मंजूरी दी।
  • राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम (NUCFDC) जमा स्वीकार नहीं करने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय निगम (NBFC) के रूप में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) में पंजीकृत है।

मुख्य उद्देश्य:

  • क्रेडिट सोसायटीज और शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) की संख्या को बढ़ाना
  • शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को आधुनिक और मजबूत करना
  • बैंकों और विनियामकों के बीच विचार-विमर्श को आसान बनाना
  • शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) को नकदी प्रदान करना
  • सदस्यों द्वारा साझा उपयोग के लिए आईटी (IT) अवसंरचना की स्थापना करना

नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन कोऑपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसाइटीज लिमिटेड(NAFCUB): 

  • देश में शहरी सहकारी बैंकों और क्रेडिट सोसाइटीज लिमिटेड का एक शीर्ष स्तरीय निकाय है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य शहरी सहकारी ऋण आंदोलन को बढ़ावा देना और सहकारिता क्षेत्र के हितों की रक्षा करना है।
  • इसे 17 फरवरी, 1977 को बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम के तहत एक बहु-राज्य सहकारी समिति के रूप में पंजीकृत किया गया था।

शहरी सहकारी बैंक (UCB):

  • इसे प्राथमिक सहकारी बैंक कहा जाता है।
  • ये बैंक शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थित होते हैं।
  • देश में कुल 11,000 शाखाओं वाले 1,500 से अधिक शहरी सहकारी बैंक हैं।
  • ये बैंक राज्य सहकारी समिति अधिनियम या बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत सहकारी समितियों के रूप में पंजीकृत होते हैं।
  • बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इनके बैंकिंग कार्यों का विनियमन और पर्यवेक्षण करता है।
  • ये बैंक सहकारी समितियों के राज्य / केंद्रीय रजिस्ट्रार इनके प्रबंधकीय, प्रशासनिक और अन्य मामलों का पर्यवेक्षण करते हैं।

शहरी सहकारी बैंक (UCB) के उद्देश्य:

  • वित्तीय सेवाएं प्रदान करना
  • मितव्ययिता और बचत को बढ़ावा देना
  • क्रेडिट आवश्यकताओं को पूरा करना
  • वित्तीय समावेशन को मजबूत बनाना 

शहरी सहकारी बैंक (UCB) की सीमाएं:

  • पूंजी की कमी
  • शासन और प्रबंधन संबंधित चुनौतियां
  • विनियामक अनुपालन
  • प्रौद्योगिकी के बुनियादी ढांचे में सीमित निवेश

गैर-बैंकिंग वित्तीय निगम (NBFC):

  • गैर-बैंकिंग वित्तीय निगम उस संस्था को कहते हैं जो कंपनी अधिनियम 1956 के अंतर्गत पंजीकृत होती है एवं जिसका प्रमुख कार्य उधार देना, विभिन्न प्रकार के शेयरों, प्रतिभूतियों, बीमा कारोबार और चिटफंड से संबंधित कार्यों में निवेश करना होता है।

प्रश्न: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम (NUCFDC) का 02 मार्च, 2024 को उद्घाटन किया।
  2. विश्वनाथन समिति ने सहकारी बैंकों के गठन का सुझाव दिया था।
  3. सहकारी बैंक राज्य सहकारी समिति अधिनियम या बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत सहकारी समितियों के रूप में पंजीकृत होते हैं।

उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं ?

(a) केवल एक 

(b) केवल दो 

(c) सभी तीनों 

(d)  कोई भी नहीं 

उत्तर: (c)

मुख्य परीक्षा प्रश्न : राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम के प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

 स्रोत: THE HINDU 

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