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पदोन्नति में आरक्षण के नए मानदंड

चर्चा में क्यों

हाल ही में, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने केंद्र सरकार के सभी विभागों को सरकारी कार्यालयों में पदोन्नति में आरक्षण की नीति लागू करने से पहले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधित्व का डाटा एकत्र करने के निर्देश दिये है।

प्रमुख बिंदु

  • इससे केंद्रीय सचिवालय सेवा (CSS) के अधिकारियों को लाभ होने की संभावना है, जिन्हें पिछले छह वर्षों से पदोन्नत नहीं किया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि सी.एस.एस. में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में मध्य से लेकर वरिष्ठ प्रबंधन रैंक के अधिकारी शामिल हैं।
  • उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने प्रतिनिधत्व संबंधी वास्तविक आँकड़ें एकत्रित किये बिना अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिये पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करने के मानदंड में किसी प्रकार की छूट देने से इनकार कर दिया था।
  • साथ भी, इसके लिये कोई भी मानदंड निर्धारित करने से इनकार करते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि उनके अपर्याप्त प्रतिनिधित्व का निर्धारण राज्य का विवेक है।  

पदोन्नति में आरक्षण की प्रक्रिया 

हाल ही में, डी.ओ.पी.टी. ने केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों में भेजे ज्ञापन में पदोन्नति के मामले में आरक्षण लागू करने से पहले अपनाई जाने वाली प्रक्रिया निर्धारित की है, जो इस प्रकार है- 

  • अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता के संबंध में मात्रात्मक डाटा का संग्रह।
  • प्रत्येक संवर्ग (Cadre) के लिये अलग से इस डाटा का अनुप्रयोग।
  • यदि कोई रोस्टर मौजूद है, तो रोस्टर के संचालन की इकाई संवर्ग होनी चाहिये या रोस्टर में रिक्तियों को भरने के संबंध में मात्रात्मक डाटा एकत्र और लागू किया जाना चाहिये।
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