हाल ही में, केरल में ड्रैगनफ्लाई की एक नई प्रजाति की खोज की गई है जिसे राज्य की समृद्ध जैव-विविधता के सम्मान में लिरियोथेमिस केरलेंसिस (Lyriothemis keralensis) नाम दिया गया है।
लिरियोथेमिस केरलेंसिस (Lyriothemis keralensis) के बारे में
खोज एवं प्राकृतिक आवास
यह दुर्लभ ड्रैगनफ्लाई एर्नाकुलम जिले के वरापेट्टी (कोथमंगलम) में पाई गई है। यह मुख्य रूप से रबर व अनानास के उन बागानों में रहती है जहाँ घनी छाया होती है और पास में वनस्पति से ढके तालाब या सिंचाई नहरें मौजूद होती हैं।
जीवन चक्र और उपस्थिति
- मानसून का समय: यह प्रजाति केवल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अर्थात मई के अंत से अगस्त के अंत तक ही सक्रिय दिखाई देती है।
- शेष वर्ष: साल के बाकी महीनों में यह अपने जलीय लार्वा (Nymph) के रूप में तालाबों एवं नहरों के नेटवर्क में छिपी रहती है।
शारीरिक विशेषताएँ (लैंगिक द्विरूपता)
- इस ड्रैगनफ्लाई में नर एवं मादा के बीच स्पष्ट अंतर देखा जा सकता है-
- नर: चमकीले गहरे लाल रंग के होते हैं जिन पर काले निशान इनकी सुंदरता को बढ़ाते हैं।
- मादा: शारीरिक रूप से थोड़ी भारी होती हैं और इनका रंग पीला होता है जिस पर काले धब्बे पाए जाते हैं।
पहचान का इतिहास और वैज्ञानिक शोध
- यह प्रजाति 2013 से केरल में देखी जा रही थी किंतु एक दशक तक इसे गलती से लिरियोथेमिस एसिगास्ट्रा (Lyriothemis acigastra) समझा गया, जो मूल रूप से उत्तर-पूर्वी भारत में पाई जाती है।
- वैज्ञानिकों ने सूक्ष्मदर्शी (Microscope) जांच और संग्रहालय के नमूनों से तुलना करने के बाद पाया कि यह एक पूरी तरह से अलग प्रजाति है। इसके पतले पेट और जननांगों की विशेष बनावट ने इसकी एक नई पहचान स्थापित करने में मदद की।