संदर्भ
फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुआलालंपुर यात्रा भारत–मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों में एक निर्णायक मोड़ साबित हुई। इस यात्रा के दौरान हुए अनेक समझौतों ने दोनों देशों के बीच सहयोग को न केवल विस्तार दिया, बल्कि उसे एक स्पष्ट रणनीतिक दिशा भी प्रदान की।
ऐतिहासिक और सभ्यतागत पृष्ठभूमि
- भारत एवं मलेशिया के संबंध दो हज़ार वर्षों से भी अधिक पुराने हैं जिनकी नींव हिंद महासागर के पार हुए व्यापार, धार्मिक संपर्कों व सांस्कृतिक आदान-प्रदान में निहित है।
- मलेशिया के ऐतिहासिक विकास में संस्कृत भाषा तथा हिंदू-बौद्ध परंपराओं सहित भारतीय संस्कृति की गहरी छाप देखी जा सकती है। आधुनिक काल में भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हुए, जो निरंतर संवाद के माध्यम से आगे बढ़े हैं।
राजनीतिक एवं कूटनीतिक सहभागिता
- वर्ष 2024 में भारत और मलेशिया ने अपने संबंधों को समग्र रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया, जो बढ़ते राजनीतिक विश्वास को दर्शाता है।
- उच्च-स्तरीय यात्राएँ, विदेश मंत्रालयों के बीच नियमित परामर्श तथा संयुक्त राष्ट्र और आसियान-नेतृत्व वाले मंचों पर सहयोग द्विपक्षीय कूटनीति की मजबूत आधारशिला हैं।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार के संदर्भ में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए मलेशिया का समर्थन दोनों देशों के राजनीतिक दृष्टिकोण में बढ़ते सामंजस्य को रेखांकित करता है।
व्यापार एवं आर्थिक सहयोग
- आर्थिक क्षेत्र भारत-मलेशिया संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ है। मलेशिया, आसियान क्षेत्र में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। अप्रैल 2000 से मार्च 2025 के बीच मलेशिया से भारत में लगभग 1.27 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश हुआ।
- वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार 19.86 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
- मलक्का जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर के समीप स्थित होने के कारण मलेशिया, भारत की एक्ट ईस्ट नीति और समुद्री संपर्क रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
- संयुक्त सैन्य अभ्यासों, समुद्री सहयोग और क्षमता निर्माण पहलों के माध्यम से भारत एवं मलेशिया के रक्षा संबंध लगातार सुदृढ़ हुए हैं।
- हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री पड़ोसी होने के कारण दोनों देश नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री सुरक्षा तथा समुद्री डकैती व आतंकवाद जैसे गैर-पारंपरिक खतरों को लेकर समान चिंताएँ साझा करते हैं।
- हाल के वर्षों में खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद-रोधी सहयोग को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
प्रवासी भारतीय और जन-जन संपर्क
- मलेशिया में दो मिलियन से अधिक की संख्या वाला भारतीय प्रवासी समुदाय दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाता है।
- भारतीय मूल के नागरिक मलेशिया की राजनीति, व्यापार, शिक्षा एवं सांस्कृतिक जीवन में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। शैक्षणिक आदान-प्रदान, पर्यटन व सांस्कृतिक कूटनीति जन-जन संपर्क को और मजबूत बनाते हैं।
हालिया समझौते और प्रमुख परिणाम
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान भारत और मलेशिया ने रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य व ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में 11 समझौतों तथा समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। सेमीकंडक्टर सहयोग पर ढांचा समझौता इस यात्रा की प्रमुख उपलब्धि रहा, जो उन्नत विनिर्माण के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत होने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- इसके साथ ही, व्यापार निपटान को भारतीय रुपए और मलेशियाई रिंगिट में प्रोत्साहित करने का निर्णय भी लिया गया।
आतंकवाद एवं बहुपक्षीय सहयोग
दोनों नेताओं ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति को दृढ़ता से दोहराया और सीमा-पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की। आतंक वित्तपोषण, कट्टरपंथ और उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
भविष्य की दिशा और निष्कर्ष
भारत द्वारा मलेशिया में नए भारतीय महावाणिज्य दूतावास की स्थापना की घोषणा प्रवासी समुदाय से जुड़ाव को और सुदृढ़ करेगी। समग्र रूप से, यह यात्रा हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता, आसियान की केंद्रीय भूमिका और वैश्विक शासन संस्थानों में सुधार के संदर्भ में भारत-मलेशिया के बीच बढ़ते रणनीतिक सामंजस्य को स्पष्ट करती है। भविष्य में यह साझेदारी द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालने की क्षमता रखती है।