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आकाशगंगा में नए चतुर्तारकीय तंत्र की खोज

(प्रारंभिक परीक्षा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)

संदर्भ

हाल ही में खगोलविदों ने आकाशगंगा (Milky Way) में एक अत्यंत दुर्लभ चतुर्तारकीय तंत्र (Quadruple Star System) खोजा है। इस प्रकार की संरचना (Configuration) पहले कभी नहीं देखी गई थी।

नए चतुर्तारकीय तंत्र (New Quadruple Star System) के बारे में

  • क्या है: इसका नाम ‘UPM J1040−3551 AabBab’ है, यह एक अनुक्रमिक चतुर्तारकीय तंत्र (Hierarchical Quadruple System)है। इसमें दो बड़े तारे (लाल बौने तारे) मुख्य जोड़ी हैं और उनके चारों ओर अपेक्षाकृत छोटे व ठंडे भूरे बौने तारे परिक्रमा कर रहे हैं।
    • इस प्रणाली में कुल चार खगोलीय पिंड (Celestial Bodies) हैं।
    • दो टी-प्रकार के भूरे बौने तारे (T-type Brown Dwarfs)
    • दो युवा लाल बौने तारे (Young Red Dwarf Stars)
    • यह संरचना दुर्लभ है क्योंकि सामान्यतः कम द्रव्यमान वाले भूरे बौने तारे अकेले पाए जाते हैं।
  • खोजकर्ता: यह खोज चीन की नानजिंग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर झांग के नेतृत्व में हुई, जिसमें ब्रिटेन, ब्राज़ील, चिली और स्पेन के वैज्ञानिक शामिल थे।

 विशेषताएँ

  • यह पहली ज्ञात प्रणाली है जिसमें दो भूरे बौने तारे (Brown Dwarfs) एक जोड़ी तारों की परिक्रमा कर रहे हैं।
  • भूरे बौने तारे लगभग बृहस्पति (Jupiter) के आकार के हैं लेकिन इनसे लगभग कोई दृश्य प्रकाश (Visible Light) नहीं निकलता।
  • लाल बौने तारे अपेक्षाकृत युवा और अधिक चमकीले हैं, जिससे वैज्ञानिकों को पूरी प्रणाली का अध्ययन करना आसान होता है।
  • इस प्रकार की खोज की संभावना केवल 5% से भी कम मानी जाती है।

इसके पीछे का विज्ञान

  • भूरे बौने तारे (Brown Dwarfs) बहुत ठंडे और धुंधले (Faint) होते हैं, इसलिए इनका पता लगाना कठिन होता है।
  • जब वे किसी अधिक चमकीले साथी तारे (Brighter Companion Star) के साथ पाए जाते हैं, तब उनका अध्ययन आसान हो जाता है।
  • वैज्ञानिक इन चमकीले तारों की विशेषताओं को मापकर भूरे बौनों की उम्र, तापमान और संरचना का अनुमान लगा सकते हैं।
  • इस खोज से वैज्ञानिकों को तारों और ग्रहों के निर्माण की प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी।

खोज का महत्त्व

  • यह खोज तारकीय विकास (Stellar Evolution) के अध्ययन के लिए नए अवसर खोलती है।
  • इससे वैज्ञानिक समझ पाएंगे कि कम द्रव्यमान वाले पिंड (Low-mass Objects) ब्रह्मांड में किन परिस्थितियों में बनते हैं।
  • यह खोज ब्रह्मांड में द्रव्यमान के वितरण (Mass Distribution in Universe) पर प्रकाश डालती है, जो डार्क मैटर (Dark Matter) की प्रकृति समझने में सहायक हो सकता है।

इसे भी जानिए !

भूरे बौने तारे (Brown Dwarfs)

  • भूरे बौने तारे “विफल तारे (Failed Stars)” कहलाते हैं।
  • ये गैस और धूल के बादलों (Gas Clouds) के ध्वस्त होने से तारों की तरह बनते हैं, लेकिन इनमें इतना द्रव्यमान नहीं होता कि वे लगातार हाइड्रोजन संलयन (Hydrogen Fusion) कर सकें।
  • इनका वायुमंडल (Atmosphere) बृहस्पति और शनि जैसे गैस दानव ग्रहों (Gas Giant Planets) जैसा होता है।
  • ये आकार में बृहस्पति से 70 गुना तक बड़े हो सकते हैं।
  • चूँकि ये बहुत कम प्रकाश उत्सर्जित करते हैं, इन्हें खोजना मुश्किल होता है।

लाल ग्रह (Red Planets)

  • लाल ग्रह शब्द सामान्यतः मंगल ग्रह (Mars) के लिए प्रयोग किया जाता है क्योंकि इसकी सतह लोहे के ऑक्साइड (Iron Oxide) के कारण लाल दिखती है।
  • लेकिन खगोल विज्ञान में लाल बौने तारे (Red Dwarf Stars) भी महत्त्वपूर्ण हैं।
  • लाल बौने तारे ब्रह्मांड में सबसे सामान्य तारे हैं और हमारे सूर्य से छोटे तथा ठंडे होते हैं।
  • इनकी चमक कम होती है, पर इनकी आयु बहुत लंबी होती है, कभी-कभी खरबों वर्ष तक।
  • वैज्ञानिक मानते हैं कि लाल बौनों की परिक्रमा करने वाले ग्रहों पर जीवन की संभावना हो सकती है।
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