पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना (Nutrient Based Subsidy - NBS)

योजना का उद्देश्य

  • पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराना है, जिससे कृषि उत्पादकता बढ़े और पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो।

Nutrient-Based-Subsidy

योजना का प्रकार

  • यह योजना केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे कृषि और सहकारिता विभाग द्वारा संचालित किया जाता है।

पृष्ठभूमि:-

  • 1992 में केंद्र सरकार ने फॉस्फेट और पोटाश (P & K) उर्वरकों को विनियमन से मुक्त किया था। 
  • इसके कारण उनकी कीमतें बढ़ गईं, जबकि नाइट्रोजन (N) की कीमत नियंत्रित रही। 
  • इससे नाइट्रोजन का अत्यधिक उपयोग हुआ और मिट्टी में पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा हो गया, जिससे मिट्टी की उत्पादकता प्रभावित हुई।
  • वर्ष -1992 से 2010 तक एक अस्थायी रियायती योजना संचालित की गई, जिसके बाद वर्ष 2010 में स्थायी रूप से पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना शुरू की गई।

योजना की मुख्य विशेषताएं

  • सब्सिडी की गणना उर्वरकों की मात्रा के बजाय नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), पोटाश (K) और सल्फर (S) जैसे पोषक तत्वों के आधार पर की जाती है।
  • प्रत्येक वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले अंतर-मंत्रालयी समिति (IMC) पोषक तत्वों के लिए सब्सिडी दरों की सिफारिश करती है।
  • सब्सिडी भुगतान सीधे उर्वरक कंपनियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से किया जाता है।
  • 2016 में शुरू की गई एकीकृत उर्वरक निगरानी प्रणाली (iFMS) के जरिये सब्सिडी भुगतान से लेकर उत्पादन, बिक्री और आवाजाही तक की जानकारी ऑनलाइन निगरानी की जाती है।
  • कंपनियों को उर्वरक बैग पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) स्पष्ट रूप से मुद्रित करना अनिवार्य है। MRP से अधिक कीमत पर बिक्री करना दंडनीय है।
  • कंपनियों को P&K उर्वरकों की MRP की तर्कसंगतता के लिए प्रमाणित लागत डेटा प्रस्तुत करना होता है।

अनुकूलित और मिश्रित उर्वरक

  • अनुकूलित और मिश्रित उर्वरक विनिर्माता/आयातक सब्सिडी पाने के पात्र हैं।
  • अनुकूलित और मिश्रित उर्वरकों की बिक्री पर कोई अतिरिक्त सब्सिडी नहीं दी जाती।

माल भाड़ा में छूट

  • देश में उर्वरकों की व्यापक उपलब्धता के लिए रेल और सड़क मार्ग द्वारा विनियंत्रित उर्वरकों की आवाजाही एवं वितरण पर माल भाड़ा छूट भी दी जाती है।

NBS योजना के प्रमुख लाभ

क्रम संख्या

लाभ

विवरण

1.

मृदा की उर्वरता में सुधार

पोषक तत्वों का संतुलित अनुप्रयोग मिट्टी की गुणवत्ता और पोषक तत्वों के संतुलन को बनाए रखता है।

2.

फसल उत्पादकता में वृद्धि

उपयुक्त पोषक तत्वों की उपलब्धता से पौधों की वृद्धि और पैदावार में वृद्धि होती है।

3.

संधारणीय कृषि पद्धतियों को बढ़ावा

योजना पर्यावरण-अनुकूल और दीर्घकालिक कृषि रणनीतियों को प्रोत्साहित करती है।

4.

उर्वरकों का तर्कसंगत उपयोग

केवल आवश्यक पोषक तत्वों के उपयोग से अंधाधुंध और असंतुलित उर्वरक प्रयोग की प्रवृत्ति में कमी आती है।

5.

सरकार पर सब्सिडी बोझ में कमी

पोषक तत्वों पर आधारित प्रणाली से सब्सिडी लक्ष्यित रूप से वितरित होती है, जिससे व्यर्थ व्यय में कटौती होती है।

6.

पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले उर्वरकों के उपयोग में कमी

नाइट्रोजन जैसे उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से होने वाले प्रदूषण में कमी आती है।

पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना का सारांश

विशेषता

विवरण

योजना का उद्देश्य

किसानों को रियायती कीमतों पर उर्वरक उपलब्ध कराना, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना

योजना का प्रकार

केंद्रीय क्षेत्र की योजना

सब्सिडी आधार

नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), पोटाश (K), सल्फर (S) के आधार पर

IMC की भूमिका

वित्त वर्ष के पहले सब्सिडी दरों की सिफारिश करना

सब्सिडी भुगतान

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से उर्वरक कंपनियों को

निगरानी प्रणाली

एकीकृत उर्वरक निगरानी प्रणाली (iFMS)

उर्वरक बैग पर आवश्यक अंकन

अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) स्पष्ट रूप से मुद्रित करना आवश्यक

अनुकूलित उर्वरक

विनिर्माता/आयातक सब्सिडी पाने के पात्र, लेकिन अतिरिक्त सब्सिडी नहीं

माल भाड़ा में छूट

रेल और सड़क मार्ग से विनियंत्रित उर्वरकों की आवाजाही पर छूट

कंपनियों की जिम्मेदारियां

MRP की रिपोर्टिंग और प्रमाणित लागत डेटा प्रस्तुत करना

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