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ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग प्रोजेक्ट

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, पर्यावरणीय पारिस्थितिकी, जैव-विविधता और जलवायु परिवर्तन संबंधी सामान्य मुद्दे)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय, संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

संदर्भ 

हाल ही में, भारत ने अंडमान सागर में अपनी पहली ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग परियोजना की शुरुआत की है जो विज्ञान-संचालित एवं आजीविका-केंद्रित समुद्री संसाधनों के उपयोग के माध्यम से नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

ओपन-सी मरीन फिश फार्मिंग प्रोजेक्ट के बारे में

भारत ने अपनी पहली पायलट ओपन-सी एक्वाकल्चर पहल शुरू की है जिसमें मरीन फिनफिश एवं समुद्री शैवाल को प्राकृतिक महासागरीय परिस्थितियों में उगाया जाएगा। इस पहल में स्वदेशी रूप से विकसित ओपन-सी केज और मरीन तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।

स्थान 

  • नॉर्थ बे, श्री विजयापुरम के पास, अंडमान सागर
  • अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, केंद्र शासित प्रदेश 

कार्यान्वयन एजेंसियाँ 

  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES)
  • नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT) 

उद्देश्य 

  • महासागर आधारित आर्थिक अवसरों का विकास करना
  • तटीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करना
  • भारत की ब्लू इकोनॉमी नीति के तहत ओपन-सी एक्वाकल्चर के विस्तार के लिए तकनीकी संभाव्यता स्थापित करना

प्रमुख विशेषताएँ 

  • ओपन-सी फिनफिश फार्मिंग: NIOT द्वारा डिज़ाइन किए गए टिकाऊ केज, जो प्राकृतिक महासागरीय परिस्थितियों में स्थिर हैं।
  • डीप-वाटर समुद्री शैवाल की कृषि: स्थानीय मछुआरों को बीज प्रदान करना
  • आजीविका-केंद्रित पायलट: विज्ञान, तकनीक एवं समुदाय की भागीदारी को एकीकृत करना
  • भविष्य के विस्तार के लिए PPP मॉडल तैयार: फील्ड अनुभव एवं व्यवहार्यता अध्ययन पर आधारित
  • समुद्री खाद्य सुरक्षा, रोजगार सृजन और तटीय लचीलापन बढ़ाने में योगदान

अंडमान सागर के बारे में

  • अंडमान सागर पूर्वोत्तर हिंद महासागर का एक सीमांत सागर है। यह ऐतिहासिक रूप से व्यापार के लिए महत्वपूर्ण रहा है और सामरिक दृष्टि से समुद्री कनेक्टिविटी व क्षेत्रीय पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भौगोलिक स्थिति

  • स्थान: पूर्वोत्तर हिंद महासागर, दक्षिण-पूर्व एशिया के समीप
  • सीमाएँ: इरावडी नदी डेल्टा (म्यांमार व थाईलैंड), सुमात्रा (इंडोनेशिया) और मलक्का जलसंधि 

प्रमुख विशेषताएँ 

  • विस्तृत सीमांत सागर (~7.98 लाख वर्ग किलोमीटर): अंडमान सागर उत्तर-पूर्वी हिंद महासागर का एक बड़ा भाग है जो महासागरीय परिसंचरण, तलछट के जमाव और समुद्री संसाधनों के उपयोग के लिए व्यापक क्षेत्र उपलब्ध कराता है।
  • अंडमान–निकोबार रिज (सक्रिय सबडक्शन क्षेत्र): यह क्षेत्र एक सक्रिय विवर्तनिक सीमा पर स्थित है जहाँ भारतीय प्लेट बर्मा माइक्रोप्लेट के नीचे धँसती है। इसी प्रक्रिया के कारण यहाँ भूकंपीय एवं ज्वालामुखीय गतिविधियाँ देखने को मिलती हैं।
  • डीप सबमरीन घाटियाँ (>4,400 मीटर): विवर्तनिक गतिविधियों से बनी गहरी समुद्री खाइयाँ एवं घाटियाँ इस सागर की विशेषता हैं जो इसके कुछ हिस्सों को पूर्वी हिंद महासागर के सबसे गहरे क्षेत्रों में शामिल करती हैं।
  • उत्तरी महाद्वीपीय शेल्फ का उथलापन: इरावदी नदी द्वारा लाई गई भारी मात्रा में तलछट के जमाव से उत्तरी हिस्से में अपेक्षाकृत उथला समुद्र तल विकसित हुआ है जिसका प्रभाव समुद्री जल की लवणता, धुंधलापन एवं समुद्री आवासों पर पड़ता है। 
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