पीएसी ने संकल्प योजना के कार्यान्वयन में कमियों को उजागर किया

चर्चा में क्यों?

हाल ही में लोक लेखा समिति (PAC) ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के आधार पर संकल्प योजना के क्रियान्वयन में गंभीर कमियों को उजागर किया है। समिति ने योजना के धीमे कार्यान्वयन, अपर्याप्त निगरानी और कम वित्तीय उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार की आलोचना की है।

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संकल्प योजना: एक अवलोकन

  • आजीविका संवर्धन हेतु कौशल विकास एवं ज्ञान जागरूकता (SANKALP) योजना, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की एक प्रमुख कौशल विकास पहल है।
  • प्रमुख तथ्य
    • स्वीकृति: अक्टूबर 2017 (कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति द्वारा)
    • कुल लागत: ₹4,455 करोड़
    • शुभारंभ: जनवरी 2018
    • मूल अवधि: मार्च 2023 तक (बाद में मार्च 2024 तक विस्तार)

योजना के उद्देश्य

  • संकल्प परियोजना का लक्ष्य भारत में कौशल विकास प्रणाली को अधिक प्रभावी, समावेशी और उद्योग-उन्मुख बनाना था। 
  • इसके मुख्य उद्देश्य थे:
    • संस्थागत ढांचे को मजबूत करना
    • उद्योग के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना
    • हाशिए पर पड़े समुदायों को शामिल करना
    • निगरानी एवं शासन तंत्र में सुधार
    • रोजगारोन्मुख, मांग-आधारित कौशल प्रणाली विकसित करना

वित्तपोषण संरचना

  • संकल्प योजना में मिश्रित वित्तपोषण मॉडल अपनाया गया:
    • ₹3,300 करोड़ - विश्व बैंक से ऋण
    • ₹660 करोड़ - राज्य सरकारों का योगदान
    • ₹495 करोड़ - उद्योग की भागीदारी
    • यह योजना परिणाम-आधारित वित्तपोषण और प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन मॉडल पर आधारित थी।

सीएजी रिपोर्ट 

  • CAG की रिपोर्ट के अनुसार:
    • 2017-18 से 2023-24 के बीच आवंटित राशि का केवल 44% ही खर्च किया गया।
    • विश्व बैंक के पहले चरण के ऋण (USD 250 मिलियन) में से ₹1,606.15 करोड़ (86%) प्राप्त हुए, लेकिन दिसंबर 2023 तक केवल ₹850.71 करोड़ का ही उपयोग हुआ।
    • कार्यान्वयन दिशानिर्देशों का समुचित पालन नहीं हुआ।
    • परियोजना की प्रगति धीमी रही।
    • ऋण अवधि शुरू होने से पहले पर्याप्त तैयारी नहीं की गई।
    • मंत्रालय के भीतर “तैयारी की कमी” को ऑडिट में देरी का प्रमुख कारण बताया गया।

लोक लेखा समिति की टिप्पणियाँ

  • PAC ने योजना के क्रियान्वयन को “लापरवाह” बताते हुए कई गंभीर मुद्दे उठाए:
  • केंद्रीय निगरानी तंत्र का अभाव
  • राज्यों में योजना की प्रगति की निगरानी के लिए प्रभावी केंद्रीय तंत्र नहीं पाया गया।
  • अपर्याप्त संस्थागत तैयारी
  • ऋण लेने से पहले प्रशासनिक क्षमता और प्रणालीगत तैयारी का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया।
  • स्कूल स्तर पर कौशल एकीकरण का अभाव
  • प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक कौशल विकास को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए स्पष्ट रोडमैप नहीं बनाया गया, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्रारंभिक स्तर से व्यावसायिक शिक्षा पर जोर देती है।

भारत में कौशल विकास की चुनौतियाँ

  • भारत के पास विशाल युवा जनसंख्या है, जिसे “जनसांख्यिकीय लाभांश” कहा जाता है। लेकिन इस लाभांश का उपयोग तभी संभव है जब कौशल विकास योजनाएँ प्रभावी ढंग से लागू हों।
  • मुख्य चुनौतियाँ:
    • खंडित कार्यान्वयन
    • उद्योग-शिक्षा समन्वय की कमी
    • अपर्याप्त निगरानी
    • धन का कम उपयोग
    • परिणाम-आधारित मूल्यांकन की कमी

निष्कर्ष

  • संकल्प योजना का उद्देश्य सराहनीय था, लेकिन कमजोर योजना निर्माण, निगरानी की कमी और धन के कम उपयोग ने इसकी प्रभावशीलता को सीमित कर दिया। 
  • PAC और CAG की टिप्पणियाँ यह स्पष्ट करती हैं कि भविष्य की कौशल विकास योजनाओं में:
    • मजबूत संस्थागत तैयारी
    • स्पष्ट जवाबदेही
    • डेटा-आधारित निगरानी
    • शिक्षा और कौशल के बीच बेहतर तालमेल
    • अत्यंत आवश्यक है।
  • यह मामला न केवल एक योजना की कमियों को उजागर करता है, बल्कि भारत की कौशल विकास नीति के समग्र सुधार की आवश्यकता की ओर भी संकेत करता है।
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