पंचायती राज मंत्रालय की प्रमुख डेटा-आधारित शासन पहल, पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) को संवर्ग सात के तहत स्वर्ण पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान जयपुर में आयोजित होने वाले 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन (1-2 जुलाई 2026) के दौरान प्रदान किया जाएगा।
वस्तुतः पंचायत उन्नति सूचकांकने केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में डेटा एनालिटिक्स के प्रभावी उपयोग से ग्रामीण शासन में उल्लेखनीय बदलाव लाने का काम किया है।
पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) के बारे में
पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित, पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) साक्ष्य-आधारित नियोजन (डेटा पर आधारित प्लानिंग), प्रदर्शन की निगरानी और पंचायती राज संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक मजबूत साधन के रूप में कार्य करता है।
इसके साथ ही यह जमीनी स्तर पर पारदर्शिता और तकनीक-संचालित शासन को बढ़ावा देता है।
पंचायत उन्नति सूचकांक के अंक ही राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कारों का निष्पक्ष (वस्तुनिष्ठ) आधार बनते हैं। उनके कुल अंकों के आधार पर, ग्राम पंचायतों को पांच प्रदर्शन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
अचीवर (Achiever) : 90 और उससे अधिक
फ्रंट रनर (Front Runner) : 75 से 90 से कम
परफॉर्मर (Performer) :60 से 75 से कम
एस्पिरेंट (Aspirant) :40 से 60 से कम
बिगिनर (Beginner) : 40 से कम
यह वर्गीकरण पारदर्शी बेंचमार्किंग (तुलनात्मक मूल्यांकन), स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और जमीनी स्तर पर लक्षित विकासात्मक प्रयासों को सक्षम बनाता है।
पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0
इस सूचकांक का नवीनतम और काफी बेहतर संस्करण पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 है, जो 150 संकेतकों (इंडेक्स) और 230 डेटा बिंदुओं के आधार पर 2.6 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन करता है।
इसमें 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 2,59,867 ग्राम पंचायतों ने भाग लिया, जो डेटा जमा करने वाली कुल ग्राम पंचायतों का 97.3 प्रतिशत है।
यह पंचायत उन्नति सूचकांक 1.0 की तुलना में एक बड़ा सुधार है, जिसमें भागीदारी दर 80.79 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
सूचकांक की उपयोगिता:
सार्वजनिक रूप से सुलभ पंचायत उन्नति सूचकांक पोर्टल (pai.gov.in) के माध्यम से, नागरिक बिना किसी लॉगिन के अपनी ग्राम पंचायत का प्रदर्शन देख सकते हैं। इससे वे स्थानीय विकास के परिणामों पर नज़र रख सकते हैं और अपनी पंचायत की विकास यात्रा में अधिक सार्थक रूप से भाग ले सकते हैं।
यह सूचकांक नीति निर्माताओं, सरकारी विभागों, अनुसंधान संस्थानों, विकास भागीदारों और नागरिक समाज संगठनों (CSOs) के लिए भी एक मूल्यवान संसाधन है।
यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विकासात्मक कार्यों को प्राथमिकता देने, ग्राम पंचायत विकास योजनाएं तैयार करने और बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को सर्वोत्तम प्रथाओं के मॉडल और सीखने के केंद्र के रूप में पहचानने में मदद करता है।
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के बारे में
इस सम्मेलन का आयोजन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG), इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
इस वर्ष की थीम - "विकसित भारत 2047: एआई-सक्षम, डेटा-आधारित और सुरक्षित डिजिटल शासन" निर्धारित की गई है, जो उभरती प्रौद्योगिकियों, डेटा-संचालित निर्णयों और मजबूत साइबर सुरक्षा के माध्यम से जन-केंद्रित सार्वजनिक सेवाएं देने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में उत्कृष्टता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए यह राष्ट्रीय पुरस्कार प्रतिवर्ष दिए जाते हैं। वर्ष 2026 में सात श्रेणियों के अंतर्गत कुल 17 परियोजनाओं का चयन किया गया है।
स्वर्ण पुरस्कार के विजेता को एक ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और लोक कल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए 10 लाख रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।