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पैक्स सिलिका (Pax Silica) पहल

(प्रारंभिक परीक्षा:  राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय व वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार; महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश)

संदर्भ 

  • संयुक्त राज्य अमेरिका ने यह संकेत दिया है कि भारत को अगले माह अमेरिका के नेतृत्व वाली ‘पैक्स सिलिका (Pax Silica)’ पहल से जुड़ने का निमंत्रण दिया जाएगा।
  • यह पहल भारत–अमेरिका के रणनीतिक एवं व्यापारिक संबंधों को सुदृढ़ करने तथा उन्हें दीर्घकालिक स्थिरता देने की दिशा में उठाया गया कदम है। 
  • वस्तुतः पैक्स सिलिका का लक्ष्य बढ़ती भू-राजनीतिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के दौर में सिलिकॉन, सेमीकंडक्टर एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। 

पैक्स सिलिका पहल के बारे में 

  • क्या है : अमेरिकी नेतृत्व वाली एक आर्थिक सुरक्षा एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी 
  • उद्देश्य : सिलिकॉन, सेमीकंडक्टर, एआई, महत्वपूर्ण खनिजों एवं उन्नत विनिर्माण के क्षेत्रों में सुरक्षित, लचीली व नवाचार-केंद्रित वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना  
  • संचालन: संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा अमेरिकी विदेश विभाग के माध्यम से
  • शिखर सम्मलेन: पहला शिखर सम्मेलन दिसंबर 2025 में आयोजित 
  • भागीदार देश: जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, यूनाइटेड किंगडम, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात एवं ऑस्ट्रेलिया 
  • अतिथि साझेदार: ताइवान, यूरोपीय संघ, कनाडा व आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) 

प्रमुख विशेषताएँ 

  • संपूर्ण तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान: कच्चे संसाधनों से लेकर उन्नत एआई चिप्स और डेटा अवसंरचना तक हर स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित कर संभावित बाधाओं को रोकना
  • भरोसेमंद तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र: डाटा चोरी, तोड़फोड़ एवं जासूसी जैसे जोखिम को कम करने के लिए केवल विश्वसनीय साझेदार देशों के साथ सहयोग 
  • दीर्घकालिक आपूर्ति एवं क्षमता विस्तार: स्थिर निवेश को प्रोत्साहन तथा नई फैब्स व प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर जोर 
  • एंटी-डंपिंग एवं दबाव-रोधी समन्वय: बाज़ार में अनुचित आपूर्ति या राजनीतिक दबाव के माध्यम से महत्वपूर्ण तकनीकों की आपूर्ति बाधित होने से बचाव
  • आर्थिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा का मेल: चिप्स व एआई पर नियंत्रण आज की वैश्विक व्यवस्था में रणनीतिक शक्ति का आधार  

महत्व

  • अमेरिका-नेतृत्व वाला एआई-चिप गठबंधन: एक प्रभावशाली तकनीकी समूह का गठन, जो उन्नत वैश्विक सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के बड़े हिस्से को प्रभावित करता है।
  • रणनीतिक निर्भरता में कमी: अस्थिर आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाकर, विशेष रूप से महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा तकनीकों में जोखिम कम करता है।
  • भारत के लिए अवसर: भारत को उच्च-स्तरीय चिप्स, अंतर्राष्ट्रीय निवेश और एआई आपूर्ति श्रृंखलाओं तक बेहतर पहुँच मिलेगी, जिससे उसकी डिजिटल एवं रक्षा क्षमताओं को नई गति मिल सकती है। 
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