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ट्रांसफैट की अनुमन्य मात्रा

संदर्भ

हाल ही में, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य पदार्थ सुरक्षा और मानक (बिक्री पर प्रतिबंध और प्रतिबंध) विनियम में एक संशोधन  किया है।

प्रमुख बिंदु

  • इस संशोधन के द्वारा तेल एवं वसा में ट्रांस फैटी एसिड (TFA) की अनुमन्य मात्रा वर्ष 2021 तक 3% और वर्ष 2022 तक 2% निर्धारित की गई है, वर्तमान में यह अनुमन्य मात्रा 5% है।
  • वर्ष 2011 में भारत ने पहली बार ट्रांस फैटी एसिड की अनुमन्य मात्र को विनियमित कर 10% निर्धारित किया, जिसे वर्ष 2015 में घटाकर 5% कर दिया गया था
  • हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) ने भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल एवं भूटान तथा कुछ अन्य देशों को ट्रांस फैट के जोखिम से जुड़ी चेतवानी दी है और इस पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा है। ध्यातव्य है कि सिर्फ ट्रांस फैट की वजह से पूरे विश्व में प्रत्येक वर्ष लगभग 500,000 लोगों की हृदय रोगों से मृत्यु हो जाती है। इनमें से दो-तिहाई मौतें मात्र 15 देशों में होती हैं।

ट्रांस फैट अथवा ट्रांस फैटी एसिड (TFA)

  • ट्रांस फैट अथवा ट्रांस फैटी एसिडअत्यधिक हानिकारक प्रकार के असंतृप्त वसा होते हैं, जो वानस्पतिक वसा, जैसे मार्जरीन (कृत्रिम मक्खन) तथा घी (प्रशोधित मक्खन), हाइड्रोजनीकृत वनस्पति तेल आदि के अलावा स्नैक्स, विभिन्न बेकरी उत्पादों तथा तले हुए खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं।
  • दीर्घकाल तक खराब न होने, अन्य विकल्पों की तुलना में सस्ते होने के साथ ही स्वाद व लागत को प्रभावित नहीं करने के कारण उत्पादकों द्वारा ट्रांस फैट का अधिक प्रयोग किया जाता है।
  • येन सिर्फ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाते हैं, बल्कि हमें हृदय रोग से बचाने में मदद करने वाले अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को भी कम कर देते हैं।
  • इसके प्रयोग सेमोटापा, टाइप 2 मधुमेह, हृदय रोग, उपापचयी सिंड्रोम, इंसुलिन प्रतिरोध, बांझपन तथा कैंसर आदि का खतरा होता है तथा यह गर्भ में भ्रूण के विकास को भी हानि पहुँचा सकता है।
  • डब्ल्यू.एच.ओ.ने प्रति व्यक्ति कुल कैलोरी मात्रा में 1% से कम कृत्रिम ट्रांस फैटी एसिड को अनुमन्य माना है। साथ ही, वर्ष 2023 तक वैश्विक खाद्य आपूर्ति से औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस-फैट को पूर्णतः खत्म करने का आह्वान किया है।
  • एफ.एस.एस.ए.आई. (FSSAI) ने भी खाद्य पदार्थों में ट्रांस फैटी एसिड की सीमा को 2% तक सीमित करने तथा वर्ष 2022 तक खाद्य पदार्थों से ट्रांस फैट को खत्म करने की अनुशंसा की है।

 

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