(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, आर्थिक विकास) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 व 3: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप व उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय; बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि) |
संदर्भ
- केंद्र सरकार ने मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025 की धारा 13 के तहत पोर्ट सुरक्षा ब्यूरो (Bureau of Port Security: BoPS) को एक वैधानिक निकाय के रूप में गठित किया है। इसे ‘सिविल एविएशन सिक्योरिटी ब्यूरो (BCAS)’ की तर्ज पर मॉडल किया गया है तथा यह पोर्ट्स, शिपिंग एवं जलमार्ग मंत्रालय के अधीन कार्य करेगा।
- BoPS का मुख्य उद्देश्य जहाजों एवं पोर्ट सुविधाओं से संबंधित सुरक्षा के नियामक निरीक्षण व समन्वय को सुनिश्चित करना है। यह कदम भारत की बढ़ती समुद्री अर्थव्यवस्था एवं सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है जो ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से संरेखित है।
BoPS की स्थापना के कारण
- वर्तमान में तटीय सुरक्षा की जिम्मेदारी कई एजेंसियों के बीच बंटी हुई है जिसमें भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), राज्य समुद्री पुलिस एवं नौसेना शामिल हैं।
- इससे समन्वय एवं संचार में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं जो सुरक्षा खामियों को जन्म देती हैं। BoPS इन चुनौतियों का समाधान करेगा तथा एकल वैधानिक निकाय के रूप में कार्य करेगा।
- यह समुद्री आतंकवाद, हथियारों की तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, अवैध मत्स्यन, अवैध प्रवासन, समुद्री डकैती एवं साइबर सुरक्षा खतरे जैसी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करेगा।
- इसके अतिरिक्त BoPS में एक समर्पित डिवीजन होगा जो पोर्ट आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर की साइबर सुरक्षा पर ध्यान देगा। यह राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय करेगा। मर्चेंट शिपिंग एक्ट के तहत वैधानिक होने से BoPS को अंतर्राष्ट्रीय पोत एवं पत्तन सुविधा सुरक्षा कोड (ISPS Code) जैसे वैश्विक मानकों को लागू करने की कानूनी शक्ति प्राप्त होगी।
- ISPS Code (International Ship and Port Facility Security Code) अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के ‘समुद्र में जीवन सुरक्षा (SOLAS) अभिसमय का हिस्सा है, जिसे समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 2004 में लागू किया गया था।
- BoPS के तहत केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन के रूप में नामित किया गया है जो सभी प्रमुख एवं गैर-प्रमुख पत्तनों में मानकीकृत सुरक्षा योजनाएँ, मूल्यांकन एवं प्रशिक्षण सुनिश्चित करेगा। सुरक्षा उपायों को ग्रेडेड तरीके से लागू किया जाएगा, जिसमें जोखिम-आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।
भारत की समुद्री विकास यात्रा
- पिछले दशक में भारत की समुद्री क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, कार्गो ग्रोथ वर्ष 2014 के 974 मिलियन टन (MMT) से बढ़कर 2025 में 1,594 MMT हो गया है।
- पोर्ट क्षमता में 57% की वृद्धि हुई है जबकि जहाजों का टर्नअराउंड समय आधा होकर 48 घंटे रह गया है जो वैश्विक मानकों के अनुरूप है। तटीय शिपिंग में 118% की वृद्धि हुई है जबकि अंतर्देशीय जलमार्गों से कार्गो परिवहन वर्ष 2014 के 18.1 MMT से बढ़कर 2025 में 145.5 MMT हो गया है। विश्व बैंक के कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स में नौ भारतीय बंदरगाह शामिल हैं।
- वर्ष 2025 तक भारत में 12 प्रमुख बंदरगाह (Major Ports) एवं 217 लघु बंदरगाह (Minor Ports) हैं जिनमें से 66 कार्गो बंदरगाह हैं। प्रमुख बंदरगाह संघ सूची के अंतर्गत आते हैं तथा केंद्र सरकार द्वारा प्रशासित होते हैं। ये नौ राज्यों एवं तीन केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं।
|
इसे भी जानिए!
देश में 14 प्रमुख बंदरगाह हैं, जिनमें से 12 प्रमुख बंदरगाह परिचालन अवस्था में हैं और 200 गैर-प्रमुख बंदरगाह (लघु बंदरगाह) हैं।
|
- प्रमुख बंदरगाह कुल समुद्री कार्गो ट्रैफिक का 53% संभालते हैं, जबकि मुंद्रा एवं सिक्का जैसे निजी व लघु बंदरगाह 19% ट्रैफिक संभालते हैं। वर्ष 2021 में लॉन्च मेरिटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, शिपिंग को बढ़ावा, अंतर्देशीय जलमार्गों का विकास, ग्रीन शिपिंग एवं वैश्विक नेतृत्व जैसे लक्ष्य निर्धारित हैं। BoPS इसी विजन के अनुरूप है, विशेषकर ‘बेस्ट-इन-क्लास पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ के लक्ष्य से।
- इसके अतिरिक्त वर्ष 2015 में लॉन्च सागरमाला प्रोजेक्ट ने पोर्ट-लेड डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया है जिसमें 802 प्रोजेक्ट्स के तहत 5.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। इससे रोजगार सृजन एवं लॉजिस्टिक्स दक्षता में वृद्धि हुई है।
बंदरगाह कानूनों का आधुनिकीकरण
- इन विकासों ने बंदरगाह सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण एवं व्यापार सुगमता की आवश्यकता को जन्म दिया। इसलिए, पुराने भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 1908 को भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025 से प्रतिस्थापित किया गया।
- अन्य कानूनों में कोस्टल शिपिंग एक्ट, 2025; मॉडर्नाइज्ड मर्चेंट शिपिंग लेजिस्लेशन, 2025; एवं ब्यूरो ऑफ पोर्ट सिक्योरिटी, 2025 शामिल हैं। ये कानून तटीय व्यापार को प्रोत्साहित करते हैं, भारतीय जहाजों की मालिकाना हक को बढ़ावा देते हैं, लाइसेंसिंग को सरल बनाते हैं तथा पर्यावरण-अनुकूल समुद्री परिवहन को जोखिम-आधारित दृष्टिकोण से लागू करते हैं।
आलोचनाएं एवं चुनौतियां
- नए कानूनों में लघु या गैर-प्रमुख (राज्य-स्वामित्व वाले) बंदरगाह पर केंद्र को अधिक अधिकार दिए गए हैं, जिसे कुछ तटीय राज्यों ने ‘समुद्री संघवाद की मौन लागत’ करार दिया है।
- इंडियन पोर्ट्स एक्ट में पोर्ट अधिकारी, कंजर्वेटर एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रवेश एवं निरीक्षण की व्यापक शक्तियां दी गई हैं किंतु न्यायिक प्रक्रियागत सुरक्षा उपायों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। ये आलोचनाएं मुख्यतः विधेयकों पर हैं, न कि BoPS पर।
- इसके अलावा, साइबर खतरे बढ़ने से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा एक चुनौती है।
निष्कर्ष
BoPS की स्थापना भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो समन्वय, दक्षता एवं वैश्विक मानकों को सुनिश्चित करेगा। यह 'मेरिटाइम इंडिया विजन 2030' एवं 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा। हालांकि, संघीय संतुलन, न्यायिक सुरक्षा एवं साइबर रेजिलिएंस को मजबूत करने की आवश्यकता है।