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प्रधानमंत्री प्रणाम योजना (PM-PRANAM): सतत कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल

वर्ष 2023-24 के बजट में घोषित प्रधानमंत्री प्रणाम योजना (PM-PRANAM), एक दूरदर्शी प्रयास है जो रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग की समस्या को सुलझाने और वैकल्पिक उपायों को प्रोत्साहन देने की दिशा में कार्य कर रही है।

PM-PRANAM

PM-PRANAM  योजना 

  • PM-PRANAM का पूरा नाम है: "प्रधान मंत्री योजना फॉर रिस्टोरेशन, अवेयरनेस, नर्चरिंग एंड इम्प्रूवमेंट ऑफ मदर अर्थ", अर्थात “धरती माता की उर्वरता की बहाली, जागरूकता, पोषण और सुधार हेतु प्रधानमंत्री योजना”। 
  • यह योजना कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों की खपत को कम करके प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

उद्देश्य और प्राथमिकताएँ

मुख्य उद्देश्य:

  • इस योजना का मूल लक्ष्य रासायनिक उर्वरकों (जैसे यूरिया, DAP, MOP, NPK आदि) के अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग को रोकना है, जो न केवल मिट्टी की उर्वरता को घटाता है बल्कि जल स्रोतों को भी प्रदूषित करता है।

अन्य उद्देश्य:

  • प्राकृतिक, जैविक और वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा देना।
  • किसानों को संतुलित पोषक प्रबंधन (Balanced Nutrient Management) के प्रति जागरूक करना।
  • कृषि-पर्यावरणीय स्थायित्व को सुनिश्चित करना।
  • राज्यों को प्रोत्साहित करना कि वे उर्वरकों की खपत को कम करने हेतु ठोस प्रयास करें।

योजना की अवधि

प्रधानमंत्री प्रणाम योजना को 3 वर्षों की अवधि के लिए लागू किया गया है:

  • प्रारंभ वर्ष: वित्त वर्ष 2023-24
  • अंतिम वर्ष: वित्त वर्ष 2025-26

इस अवधि के दौरान केंद्र सरकार राज्यों को मूल्य आधारित प्रोत्साहन देगी जिससे वे उर्वरकों के प्रयोग में कमी लाकर टिकाऊ कृषि की ओर अग्रसर हों।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रोत्साहन तंत्र

  • योजना की एक अनूठी विशेषता यह है कि इसमें उर्वरक खपत में कटौती को सीधे प्रोत्साहन से जोड़ा गया है।

कैसे मिलेगा प्रोत्साहन?

  • यदि कोई राज्य या केंद्र शासित प्रदेश किसी विशिष्ट वित्तीय वर्ष में रासायनिक उर्वरकों की खपत को पिछले तीन वर्षों की औसत खपत की तुलना में कम करता है, तो केंद्र सरकार द्वारा उस राज्य को दी जाने वाली उर्वरक सब्सिडी में से 50% भाग अनुदान के रूप में उस राज्य को वापस दिया जाएगा।

प्रोत्साहन का उपयोग:

इस सब्सिडी का उपयोग राज्य सरकारें निम्नलिखित कार्यों में कर सकती हैं:

  • जैविक उर्वरकों को बढ़ावा देना
  • किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • जागरूकता अभियान
  • सतत कृषि तकनीकों को लागू करना

योजना का महत्व

PM-PRANAM योजना का महत्व कई स्तरों पर देखा जा सकता है:

कृषि क्षेत्र के लिए:

  • मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता बनी रहती है।
  • किसानों को वैकल्पिक, पर्यावरण-अनुकूल उर्वरकों के प्रयोग का प्रशिक्षण मिलता है।

पर्यावरण के लिए:

  • रासायनिक अपशिष्ट में कमी आती है।
  • जलाशयों और भूजल स्रोतों में नाइट्रेट और फॉस्फेट प्रदूषण कम होता है।
  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर नियंत्रण संभव होता है।

आर्थिक दृष्टिकोण से:

  • सरकार की सब्सिडी बोझ में दीर्घकालिक कमी संभव है।
  • किसानों की उत्पादन लागत घट सकती है यदि प्राकृतिक विकल्प अपनाए जाएं।

योजना को सफल बनाने हेतु आवश्यक सुझाव

PM-PRANAM योजना को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए कुछ आवश्यक उपाय अपनाने की जरूरत है:

  • प्रभावी निगरानी तंत्र: उर्वरकों के प्रयोग पर नजर रखने के लिए मजबूत डेटा संग्रह और विश्लेषण प्रणाली बनानी होगी।
  • प्रशिक्षण और जागरूकता: किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन और वैकल्पिक उपायों पर व्यापक प्रशिक्षण देना चाहिए।
  • प्रायोगिक मॉडल फार्म: प्रत्येक जिले में कुछ खेतों को मॉडल फार्म के रूप में विकसित कर योजनाओं को व्यवहार में लाने की जरूरत है।
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