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प्राइमरी स्क्लेरोसिंग कोलेंजाइटिस (PSC)

हाल ही में, विकसित एक नया मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचार प्राइमरी स्क्लेरोसिंग कोलेंजाइटिस (PSC) नामक दुर्लभ यकृत रोग के उपचार में उत्साहजनक परिणाम दिखा रहा है, जिससे इस जटिल बीमारी के प्रबंधन को लेकर नई उम्मीद जगी है। 

क्या है PSC

  • प्राइमरी स्क्लेरोसिंग कोलेंजाइटिस एक दीर्घकालिक और दुर्लभ यकृत रोग है जिसमें यकृत के भीतर स्थित पित्त नलिकाओं में सूजन एवं क्षति हो जाती है। 
  • ये पित्त नलिकाएँ यकृत में बनने वाले पित्त को पित्ताशय तक और फिर छोटी आंत तक पहुँचाती हैं जहाँ यह वसा के पाचन में सहायता करता है। 
  • लगातार सूजन के कारण पित्त नलिकाओं में निशान (स्कारिंग) पड़ जाते हैं और वे संकुचित हो जाती हैं। इससे पित्त का प्रवाह बाधित होता है और यकृत को धीरे-धीरे क्षति पहुँचती है। समय के साथ यकृत की रक्त शोधन और पाचन सहायता करने की क्षमता कम होने लगती है।
  • आगे चलकर यह स्थिति सिरोसिस और अंततः लिवर फेलियर का रूप ले सकती है। PSC से ग्रसित व्यक्तियों में लिवर फेलियर के साथ-साथ पित्त नलिकाओं, पित्ताशय एवं बृहदान्त्र (कोलन) के कैंसर का जोखिम भी सामान्य से अधिक होता है।

कारण व लक्षण

  • PSC का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है किंतु विशेषज्ञ इसे कई कारकों के संयुक्त प्रभाव से जोड़ते हैं, जैसे: आनुवंशिक प्रवृत्ति, प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्य प्रतिक्रिया, आंतों के माइक्रोबायोम में बदलाव, पर्यावरणीय प्रभाव 
  • यह रोग प्राय: धीमी गति से विकसित होता है और कई वर्षों तक बिना लक्षणों के भी रह सकता है। लक्षण शुरू होने पर वे कभी कम तो कभी अधिक हो सकते हैं किंतु प्राय: समय के साथ गंभीर होते जाते हैं।
  • अन्य प्रमुख लक्षणों में त्वचा में तेज़ खुजली, अत्यधिक थकान और कमजोरी, पेट में दर्द, त्वचा व आंखों का पीला पड़ना (पीलिया), पित्त नलिकाओं में संक्रमण के कारण बुखार व ठंड लगना शामिल है। 

उपचार एवं प्रबंधन

  • वर्तमान में PSC का कोई पूर्ण उपचार उपलब्ध नहीं है। उपचार का मुख्य लक्ष्य लिवर की स्थिति पर निगरानी रखना और लक्षणों को नियंत्रित करना होता है। 
  • कुछ चिकित्सकीय प्रक्रियाओं द्वारा अवरुद्ध पित्त नलिकाओं को अस्थायी रूप से खोला जा सकता है। रोग की उन्नत अवस्था में लिवर प्रत्यारोपण ही प्रभावी उपचार विकल्प माना जाता है। 
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