संदर्भ
सरकार ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन आवर के दौरान 1.5 लाख रुपए तक का नकद उपचार प्रदान करने के लिए पीएम राहत (Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment: PM RAHAT) योजना शुरू की है।
पीएम राहत योजना के बारे में
- पीएम राहत एक राष्ट्रीय कैशलेस आपातकालीन उपचार योजना है जो सड़क दुर्घटना के प्रत्येक पीड़ित को दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपए तक का वित्तीय कवरेज प्रदान करती है जिसमें समय पर गोल्डन आवर हस्तक्षेप पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा नीतिगत निगरानी; इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (eDAR) प्लेटफॉर्म के माध्यम से एकीकरण किया जाएगा जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा लेनदेन प्रबंधन प्रणाली (TMS 2.0) के माध्यम से दावों का प्रसंस्करण किया जाएगा।
पीएम राहत योजना का उद्देश्य
- यह सुनिश्चित करना कि सड़क दुर्घटनाओं के बाद तत्काल चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण किसी की जान न जाए।
- भारत की संरचित आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करना
- अस्पतालों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करना, जिससे निर्बाध उपचार को प्रोत्साहन मिले।
पीएम राहत योजना की प्रमुख विशेषताएँ
- कैशलेस कवरेज: दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों तक प्रति पीड़ित ₹1.5 लाख तक का कवरेज
- गोल्डन आवर फोकस: त्वरित अस्पताल पहुंच के लिए 112 हेल्पलाइन के साथ एकीकरण
- स्टेबलाइजेशन विंडो: 24 घंटे (जीवन के लिए खतरा न होने की स्थिति में) और 48 घंटे (जीवन के लिए खतरा होने की स्थिति में)
- डिजिटल एकीकरण: संपूर्ण दावा प्रबंधन के लिए ई.डी.ए.आर. (MoRTH) और टी.एम.एस. 2.0 (NHA) के बीच निर्बाध जुड़ाव
- पुलिस प्रमाणीकरण: जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए 24-48 घंटों के भीतर अनिवार्य पुष्टि
- वित्तपोषण तंत्र: मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) के माध्यम से बीमाकृत मामलों में बीमा योगदान के माध्यम से और गैर-बीमाकृत/हिट एंड रन मामलों में बजटीय सहायता के माध्यम से वित्तपोषण किया जाता है।
- समयबद्ध भुगतान: राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा स्वीकृत दावों का भुगतान 10 दिनों के भीतर किया जाएगा।
- शिकायत निवारण: जिला कलेक्टर/डीएम की अध्यक्षता वाली सड़क सुरक्षा समिति द्वारा जिला स्तरीय निगरानी
पीएम राहत योजना का महत्व
- यह योजना भारत में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की उच्च दर को संबोधित करती है जहाँ समय पर उपचार से लगभग 50% मौतों को रोका जा सकता है।
- तत्काल अस्पताल समन्वय को सक्षम बनाकर यह नेक मददगार (राह-वीर) तंत्र को मजबूत करता है।
- एकीकृत प्लेटफार्मों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा और सड़क सुरक्षा में डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देता है।