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औषधि नियम, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव

संदर्भ 

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में फार्मास्युटिकल अनुसंधान एवं विकास (R&D) को गति देने और व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से औषधि नियम, 1945 (Drugs Rules, 1945) में दो महत्वपूर्ण संशोधनों के मसौदे प्रस्तावित किए हैं। इन बदलावों से विनियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और फार्मा आपूर्ति शृंखला की दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है। 

परीक्षण के लिए दवाओं के आयात की प्रक्रिया का सरलीकरण 

मंत्रालय ने परीक्षण, विश्लेषण या जांच (Examination, Test or Analysis) के उद्देश्य से कम मात्रा में दवाओं के आयात की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा है।

स्वीकृति (Acknowledgement) आधारित प्रणाली 

  • नई व्यवस्था : विश्लेषणात्मक (Analytical) और गैर-नैदानिक (Non-clinical) परीक्षणों के लिए अब सभी प्रकार की दवाओं के आयात हेतु एक सरल प्रणाली लागू की जाएगी।
  • प्रक्रिया : आयात करने के इच्छुक आवेदकों को सबसे पहले एक पूर्व सूचना प्रपत्र (Prior Intimation Form) ऑनलाइन जमा करना होगा। इसके बाद प्राप्त होने वाली स्वीकृति (Acknowledgement) के आधार पर वे सीधे दवाओं का आयात कर सकेंगे।
  • लाभ : कम मात्रा में दवाओं के आयात के लिए पहले से चली आ रही अनिवार्य लाइसेंस की प्रक्रिया समाप्त होगी, जिससे आवेदकों पर अनुपालन (Compliance) का बोझ काफी कम हो जाएगा। 

अपवाद (इनके लिए पूर्व लाइसेंस अनिवार्य रहेगा): 

  • लैंगिक हार्मोन (Sex Hormones), साइटोटॉक्सिक दवाएँ (Cytotoxic Drugs), बीटा-लैक्टम दवाएँ (Beta Lactam Drugs), जीवित सूक्ष्मजीवों वाले जैविक उत्पाद (Biologics) तथा मादक एवं मनःप्रभावी पदार्थ (Narcotic and Psychotropic Substances)। 
  • यह कदम जनवरी 2026 में नई दवा एवं नैदानिक परीक्षण नियम, 2019 में घरेलू परीक्षण लाइसेंस के लिए किए गए संशोधनों का ही विस्तार है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार, यह ऑनलाइन पूर्व-सूचना प्रणाली स्टार्टअप्स और उद्योगों को परीक्षण कार्य शीघ्र शुरू करने में मदद करेगी और हितधारकों के लिए एक त्वरित प्रवेश-द्वार बनेगी। 

शेष शेल्फ-लाइफ (Residual Shelf-Life) के नियमों में बदलाव 

मंत्रालय ने आयातित दवाओं की शेष शेल्फ-लाइफ (Residual Shelf-Life) से जुड़े नियम 31 में भी संशोधन का एक अलग मसौदा जारी किया है। इसका उद्देश्य कठोर नियमों को युक्तिसंगत बनाकर दवा-हानि को रोकना है।

श्रेणी

वर्तमान नियम

प्रस्तावित नियम

सामान्य आयातित दवाएँ

आयात के समय 60% से अधिक शेष शेल्फ-लाइफ अनिवार्य

आयात के समय न्यूनतम 12 माह की शेष शेल्फ-लाइफ अनिवार्य

जैविक उत्पाद और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स

आयात के समय 60% से अधिक शेष शेल्फ-लाइफ अनिवार्य

यथावत (कोई बदलाव नहीं, विशेष प्रकृति के कारण पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी) 

इस संशोधन के मुख्य लाभ 

  • दक्ष आपूर्ति प्रबंधन : आयात के समय कम से कम 12 महीने की अवधि मिलने से दवाओं के वितरण और उपयोग के लिए पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे मरीजों को सही समय पर दवा मिल सकेगी।
  • अपव्यय में कमी (Wastage Reduction) : कठोर नियमों के कारण होने वाली दवाओं की अनावश्यक बर्बादी रुकेगी, जिससे आपूर्ति शृंखला अधिक कुशल होगी और लागत में कमी आएगी।
  • बाजार में उपलब्धता : देश में आवश्यक दवाओं का भंडार मजबूत होगा। 

विनियामक सुरक्षा सुनिश्चित 

  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह ढील केवल आयात के समय लागू होने वाली शेल्फ-लाइफ और परीक्षण प्रक्रिया तक ही सीमित है। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता (Quality, Safety and Efficacy) से समझौता नहीं किया जाएगा और इससे जुड़े अन्य सभी कड़े नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।

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