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गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांतीय दर्जा

(प्रारंभिक परीक्षा : अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाओं एवं मानचित्र आधारित प्रश्न)
(मुख्य परीक्षा : भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों से संबंधित प्रश्न)

संदर्भ 

  • हाल ही में, पाकिस्तान के क़ानून एवं न्याय मंत्रालय ने गिलगि-बाल्टिस्तान क्षेत्र को पाकिस्तान के  प्रांत के रूप में शामिल करने के लिये कानूनी मसौदे को अंतिम रूप दिया है। इस मसौदे को पाकिस्तान के ’26वें संविधान संशोधन विधेयक’ के रूप में प्रधानमंत्री इमरान खान को सौंप दिया गया है।
  • पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र को प्रांत का दर्जा दिये जाने के बाद यह पाकिस्तान का पाँचवा प्रांत होगा। पाकिस्तान के क़ानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, गिलगित-बाल्टिस्तान के सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय को समाप्त किया जा सकता है तथा इस क्षेत्र के चुनाव आयोग का विलय  पाकिस्तान के चुनाव आयोग में हो सकता है।   

पृष्ठभूमि  

  • गिलगित जम्मू-कश्मीर रियासत का भाग था तथा इस पर अंग्रेजों का अधिकार था। अंग्रेजों ने इस क्षेत्र को जम्मू-कश्मीर रियासत के राजा हरि सिंह से पट्टे पर प्राप्त किया था। वर्ष 1947 में राजा हरि सिंह के भारत में शामिल होने के निर्णय पर कबाइलियों ने विद्रोह कर दिया। कबाइलियों ने बाल्टिस्तान पर कब्जा कर लिया। यह क्षेत्र उस समय लद्दाख का भाग था। इसके साथ ही इन्होनें कारगिल एवं द्रास पर भी कब्जा कर लिया। भारतीय सेना ने अगस्त 1947 में कारगिल एवं द्रास को उनके कब्जे से मुक्त करा लिया।
  • 1 जनवरी, 1949 को भारत पाकिस्तान युद्ध विराम के पश्चात अप्रैल 1949 में पाकिस्तान ने आज़ाद जम्मू और कश्मीर (जैसा कि पाकिस्तान मानता है) की अनंतिम सरकार के साथ समझौता किया। इस समझौते के अनुसार वे क्षेत्र, जिन पर पाकिस्तान ने नियंत्रण कर लिया था, के रक्षा एवं विदेश मामले पाकिस्तान को सौंप दिये गए। इसके साथ ही आज़ाद जम्मू और कश्मीर की अनंतिम सरकार ने गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र का प्रशासन भी पाकिस्तान को सौंप दिया।                     
  • पाकिस्तान ने अपना पहला पूर्ण नागरिक संविधान वर्ष 1974 में अपनाया। इस संविधान में पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान एवं खैबर पख्तुनवा को प्रांत के रूप में सूचीबद्ध किया गया। इसमें पाक के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (POK) एवं गिलगित बाल्टिस्तान के क्षेत्र को प्रांत के रूप में सम्मिलित नही किया गया। इसके पीछे पाकिस्तान की मंशा थी कि कश्मीर मुद्दे का समाधान संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के अनुसार किया जा, जिसमें उसने जनमत संग्रह की माँग की थी।
  • वर्ष 1975 में, पाक अधिकृत कश्मीर को अपना संविधान मिला। इसके बाद यह क्षेत्र एक स्वशासित स्वायत्त क्षेत्र बन गया। परंतु इस संविधान का उत्तरी क्षेत्र (गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र) पर कोई प्रभाव नहीं था। यह क्षेत्र अभी भी सीधे इस्लामाबाद से प्रशासित होता था।
  • पाक अधिकृत क्षेत्र में संविधान के लागू होने से वहाँ के लोगों के पास संविधान द्वारा प्रद्दत्त गारंटीकृत अधिकार एवं स्वतंत्रता थी, जबकि उत्तरी क्षेत्र के लोग इससे वंचित थे। उत्तरी क्षेत्र के लोगों का कोई राजनीतिक प्रतिनिधित्नहीं था। इस क्षेत्र के निवासियों को नागरिकता एवं पासपोर्ट पाकिस्तान से प्राप्त होता था, परंतु वे पाकिस्तान के अन्य चार क्षेत्रों एवं पाक अधिकृत कश्मीर में उपलब्ध संवैधानिक सुरक्षा के दायरे के बाहर थे।

गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र का महत्त्व

  • गिलगित-बाल्टिस्तान अपनी भू-सामरिक स्थिति के कारण भारत एवं पाकिस्तान दोनों के लिये महत्त्वपूर्ण है। इसके उत्तर में काराकोरम और लद्दाख श्रेणी तथा पश्चिम में खैबर पख्तुनवा स्थित है। इसका उत्तर-पूर्वी भाग चीन के साथ सीमा बनाता है। यहाँ चीन का जिनजियांग प्रांत स्थित है। इसके उत्तर-पश्चिम में अफगानिस्तान का वाखन गलियारा तथा दक्षिण-पश्चिम में पाक अधिकृत कश्मीर का क्षेत्र है। अपनी इस भू-सामरिक स्थिति के कारण यह क्षेत्र अति महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
  • गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र से होकर ही ‘चीन पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर’ गुजरता है। इसे भारत अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है। इसी कारण भारत द्वारा चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड’ परियोजना का विरोध किया जाता है।   

पाकिस्तान का दृष्टिकोण 

  • गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र के महत्त्व को देखते हुए नई सदी के पहले दशक में पाकिस्तान ने यहाँ की प्रशासनिक व्यवस्था में परिवर्तन करना प्रारंभ कर दिया। यह क्षेत्र पाकिस्तान एवं चीन के मध्य संपर्क के साथ ही चीन की परियोजनाओं के लिये भी महत्त्वपूर्ण था, जो कि प्रशासनिक अवरोधों के कारण साकार नहीं हो पा रहीं थीं।
  • वर्ष 2009 के गिलगित-बाल्टिस्तान (सशक्तीकरण और स्वशासन) आदेश, 2009 द्वारा पाकिस्तान ने उत्तरी क्षेत्र विधान परिषद् को विधान सभा में बदल दिया। उत्तरी क्षेत्र विधान परिषद् एक निर्वाचित निकाय था, परंतु इसकी भूमिका मात्र सलाहकारी थी। इस संबंध में विधान सभा एक मामूली सुधार है। इसमें 24 निर्वाचित एवं 9 मनोनीत सदस्य हैं। इसी आदेश के द्वारा उत्तरी क्षेत्र को गिलगित-बाल्टिस्तान का नाम दिया गया।
  • 1 नवंबर, 2020 को गिलगित-बाल्टिस्तान में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस क्षेत्र को ‘अनंतिम प्रांतीय दर्जा’ देने की घोषणा की थी। पाकिस्तान सरकार के हालिया कानूनी मसौदे को इसी घोषणा के क्रियान्वयन के रूप में देखा जा सकता है।  

    भारत का पक्ष  

    • भारत ने पाकिस्तान के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश, जिसमें गिलगित एवं बाल्टिस्तान क्षेत्र सम्मिलित हैं, पूरी तरह से देश का अभिन्न अंग है। इस क्षेत्र में पाकिस्तान का अवैध रूप से कब्ज़ा किये गए क्षेत्रों पर कोई अधिकार नहीं है।

    निष्कर्ष 

    • पाकिस्तान द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान को प्रांतीय दर्जा दिये जाने का यह निर्णय भारत के जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाने की प्रतिक्रिया स्वरुप देखा जा सकता है। भारत के इस निर्णय से पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर संशय में है। इसके अतिरिक्त, चीन द्वारा भी अपनी परियोजनाओं के मद्देनजर इस क्षेत्र को क़ानूनी दर्जा देने के लिये दबाव डाला जा रहा था।
    • भारत एवं पाकिस्तान के मध्य विवाद के अन्य प्रमुख मुद्दों में सियाचिन ग्लेशियर विवाद, सर क्रीक विवाद, सिंधु जल समझौता विवाद इत्यादि प्रमुख हैं। इन विवादों के समाधान के लिये आवश्यक है कि पाकिस्तान सीमापार से संचालित आतंकवादी गतिविधियों को रोके तथा सीमा पर युद्ध विराम के नियमों का पालन करे। तभी दोनों देशों के मध्य विवादों का उचित हल निकाला जा सकता है।
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