सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी दीपक धर को सांख्यिकीय भौतिकी में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रतिष्ठित डिराक पदक से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें तीन अन्य प्रमुख भौतिकविदों - बर्नार्ड डेरिडा, मार्क मेजार्ड और हैम सोम्पोलिंस्की के साथ संयुक्त रूप से मिला है।
दीपक धर इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाले दूसरे भारतीय वैज्ञानिक हैं। उनसे पहले 2012 में प्रसिद्ध स्ट्रिंग सिद्धांतकार अशोक सेन को डिराक पदक प्रदान किया गया था। धर के सम्मान से न केवल उनकी व्यक्तिगत वैज्ञानिक उपलब्धियों को वैश्विक मान्यता मिली है, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक परंपरा की प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
दीपक धर का जन्म 1951 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में हुआ।
इन्होने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और आईआईटी कानपुर से स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। इसके बाद वे अमेरिका के कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कैलटेक) गए, जहां उन्होंने 1978 में पीएचडी पूरी की।
कैलटेक में अपने अध्ययन के दौरान धर को प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी रिचर्ड फेनमैन के शिक्षण सहायक के रूप में काम करने का अवसर मिला। डॉक्टरेट पूरी करने के बाद उन्होंने अमेरिका में बसने के बजाय भारत लौटने का निर्णय लिया।
धर ने अपने वैज्ञानिक जीवन का अधिकांश समय मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) में बिताया। वर्ष 2016 में वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर), पुणे से जुड़े। वर्ष 2024 से वे बेंगलुरु स्थित अंतर्राष्ट्रीय सैद्धांतिक विज्ञान केंद्र में आईएनएसए के विशिष्ट प्रोफेसर हैं।
एबेलियन सैंडपाइल और सांख्यिकीय भौतिकी:
धर को विशेष रूप से एबेलियन सैंडपाइल मॉडल पर उनके महत्वपूर्ण कार्य के लिए जाना जाता है। यह सांख्यिकीय भौतिकी में एक महत्वपूर्ण गणितीय मॉडल है, जो ऐसी प्रणालियों के व्यवहार को समझने में मदद करता है, जिनमें धीरे-धीरे अस्थिरता जमा होती है और फिर अचानक उसका विस्फोटक रूप से निष्कासन होता है।
एबेलियन सैंडपाइल धर की सबसे प्रसिद्ध वैज्ञानिक उपलब्धि है, लेकिन उनका योगदान इससे कहीं व्यापक है। लगभग पांच दशकों के अपने करियर में उन्होंने सांख्यिकीय यांत्रिकी में महत्वपूर्ण कार्य किया है। यह भौतिकी की वह शाखा है, जो बड़ी संख्या में मौजूद कणों के सामूहिक व्यवहार और उससे उत्पन्न होने वाले बड़े पैमाने के पैटर्न का अध्ययन करती है।
प्रमुख सम्मान:
दीपक धर को उनके वैज्ञानिक योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।
1991 में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार,
2002 में विश्व विज्ञान अकादमी का टीडब्ल्यूएएस पुरस्कार और
2023 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
वर्ष 2022 में उन्हें जॉन हॉपफील्ड के साथ बोल्ट्जमैन पदक प्रदान किया गया। हॉपफील्ड को बाद में 2024 में न्यूरल नेटवर्क की नींव रखने में उनके योगदान के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। हर तीन वर्ष में प्रदान किया जाने वाला बोल्ट्जमैन पदक सांख्यिकीय भौतिकी के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है।
क्या है डिराक पदक?
आईसीटीपी डिराक पदक की स्थापना 1985 में महान ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी पॉल डिराक के सम्मान में की गई थी। डिराक के समीकरणों ने आधुनिक क्वांटम यांत्रिकी की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इटली के ट्राइस्टे स्थित अंतर्राष्ट्रीय सैद्धांतिक भौतिकी केंद्र (आईसीटीपी) द्वारा प्रदान किया जाने वाला यह पदक सैद्धांतिक भौतिकी में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। इसका नाम दिवंगत ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी पॉल ए. एम. डिराक के सम्मान में रखा गया है और उनके जन्मदिन पर इसकी घोषणा की जाती है।
डिराक पदक की एक विशेषता यह है कि इसे नोबेल पुरस्कार, फील्ड्स मेडल या वुल्फ पुरस्कार प्राप्त कर चुके वैज्ञानिकों को नहीं दिया जाता। इसके बावजूद इसके कई पूर्व विजेता बाद में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित हुए हैं।