भारतीय गुणवत्ता परिषद

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय, सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन व कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय)

संदर्भ

सुशासन दिवस 2025 की पूर्व संध्या पर भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) ने भारत के गुणवत्ता पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु अगली पीढ़ी के गुणवत्ता सुधारों की घोषणा की है। यह पहल गुणवत्ता-आधारित शासन, वैश्विक मानकों के अनुरूपता व प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

हालिया सुधार 

  • गुणवत्ता इकोसिस्टम को सशक्त बनाने के लिए प्रणाली-व्यापी सुधारों में क्यू मार्क (Q Mark)- देश का हक जारी किया जाना शामिल है। यह एक क्यूआर-कोडित गुणवत्ता चिह्न है। इससे नागरिकों को अपनी प्रयोगशाला, अस्पताल एवं एम.एस.एम.ई. के बारे में जानकारी मिल सकेगी, पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और फर्जी प्रमाणपत्रों का उन्मूलन होगा।
    • इन सुधारों से कम कागजी कार्रवाई, कम समय सीमा, कम निरीक्षण और उच्च विश्वास पर आधारित एक सहज प्रणाली के माध्यम से निरीक्षण से विश्वास की ओर बदलाव आएगा। 
  • भारतीय गुणवत्ता परिषद  समयबद्ध शिकायत निवारण और प्रतिक्रिया समाधान के लिए एक सुरक्षित टिकट-आधारित प्रणाली ‘गुणवत्ता सेतु’ की भी शुरूआत कर रहा है। कई प्रत्यायन पोर्टलों को प्रतिस्थापित करने के लिए एक एकल, पेपरलेस, मॉड्यूलर वन-स्टॉप प्रत्यायन प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा।
  • इसने भारत की गुणवत्ता व्यवस्था को निरीक्षण-आधारित नियंत्रण से हटाकर विश्वास-आधारित नियामक प्रणाली की ओर अग्रसर किया है। इसके माध्यम से भारतीय मानकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने में मदद मिल रही है जिससे विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की निर्यात विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि हो रही है।

भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के बारे में 

  • भारतीय गुणवत्ता परिषद एक स्वायत्त, गैर-लाभकारी राष्ट्रीय प्रत्यायन संस्था है जिसका उद्देश्य देश में विभिन्न क्षेत्रों में गुणवत्ता मानकों को प्रोत्साहित करना, अपनाना व संस्थागत रूप देना है। 
  • यह संस्था प्रत्यक्ष सरकारी नियंत्रण से स्वतंत्र रहते हुए सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर कार्य करती है तथा राष्ट्रीय गुणवत्ता लक्ष्यों के साथ समन्वय बनाए रखती है। 
  • QCI की स्थापना वर्ष 1996 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के पश्चात सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत की गई थी। 
  • इसकी परिकल्पना तत्कालीन औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (वर्तमान में DPIIT) द्वारा गठित एक बहु-हितधारक समिति की अनुशंसाओं के आधार पर की गई थी। 

उद्देश्य

  • अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक सुदृढ़ राष्ट्रीय गुणवत्ता अवसंरचना विकसित करना
  • भारतीय उत्पादों और सेवाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, उपभोक्ता हितों की रक्षा करना और जीवन स्तर में सुधार लाना

प्रमुख कार्य

  • राष्ट्रीय प्रत्यायन कार्यक्रम: वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रयोगशालाओं, प्रमाणन निकायों, निरीक्षण एजेंसियों, चिकित्सा प्रयोगशालाओं और परीक्षण सुविधाओं को मान्यता प्रदान करना
  • सेवा क्षेत्रों में गुणवत्ता आश्वासन: शिक्षा, स्वास्थ्य, शासन, पर्यावरण, अवसंरचना और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए कुशल ढाँचे विकसित करना
  • व्यापार सुगमता को बढ़ावा: अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य अनुरूपता मूल्यांकन सुनिश्चित कर WTO के अंतर्गत TBT एवं SPS जैसी तकनीकी बाधाओं को कम करना
  • क्षमता निर्माण: प्रशिक्षण, मानकीकरण एवं परामर्श के माध्यम से सरकारों, संस्थानों, MSMEs व उद्योगों में गुणवत्ता प्रणालियों को मजबूत करना
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: ILAC, IAF, OECD, ISQua, APLAC और PAC जैसे वैश्विक संगठनों के साथ साझेदारी कर पारस्परिक मान्यता और अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति को सक्षम बनाना 
  • गुणवत्ता जागरूकता: नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं और सेवाओं की मांग के लिए सक्षम बनाने हेतु राष्ट्रीय गुणवत्ता अभियानों का संचालन
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