चर्चा में क्यों ?
दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ह्यूमन रेबीज (इंसानों में रेबीज) को अब 'नोटिफायबल डिजीज' (Notifiable Disease) घोषित कर दिया है।

प्रमुख बिन्दु:
- इस फैसले के बाद अब दिल्ली के किसी भी हिस्से में रेबीज का संदिग्ध या कंफर्म केस मिलने पर उसकी जानकारी तुरंत स्वास्थ्य विभाग को देना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
- इस फैसले का उद्देश्य:
- रेबीज के मामलों की तत्काल मॉनिटरिंग कर मरीजों को बिना देरी उपचार उपलब्ध कराना।
- सरकारी-निजी सभी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और डॉक्टरों द्वारा हर मामले की अनिवार्य सूचना देकर सटीक और एकीकृत आंकड़े तैयार करना।
वर्तमान में रेबीज
- दिल्ली में 2025 में रेबीज के 49 और डॉग बाइट के 35,198 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि RTI के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 18 मौतें हुई हैं।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल रेबीज से लगभग 20,000 लोगों की जान जाती है।
- पूरी दुनिया में हर साल रेबीज संक्रमण की वजह से करीब 59,000 मौतें होती हैं।
रेबीज
- रेबीज एक घातक वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से RNA वायरस के कारण होता है।
- संक्रमण का स्रोत: संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर या नेवले के काटने, खरोंचने या उनकी लार के किसी खुले घाव के संपर्क में आने से।
- प्रभाव: यह वायरस सीधे इंसान के सेंट्रल नर्वस सिस्टम (ब्रेन) पर हमला करता है।
- परिणाम: यदि लक्षण दिखने के बाद इलाज न मिले, तो यह लगभग 100% जानलेवा है।
रेबीज के लक्षण:
रेबीज के लक्षण संक्रमण के कुछ दिनों से लेकर महीनों बाद तक दिख सकते हैं। इन्हें दो चरणों में समझा जा सकता है:
- शुरुआती लक्षण
- काटने वाली जगह पर झनझनाहट, चुभन या खुजली होना।
- हल्का बुखार और मांसपेशियों में दर्द।
- लगातार बेचैनी महसूस होना।
- गंभीर/न्यूरोलॉजिकल लक्षण
- हाइड्रोफोबिया: पानी को देखकर या पानी की आवाज से अत्यधिक डर लगना।
- एरोफोबिया: कूलर, पंखे या ताजी हवा के झोंके से डर लगना।
- व्यवहार में बदलाव: अत्यधिक गुस्सा, चिड़चिड़ापन या मतिभ्रम।
- निगलने में कठिनाई: गले की मांसपेशियों में ऐंठन के कारण थूक या पानी निगलने में असमर्थता।
रेबीज से बचाव
- रेबीज का कोई पुख्ता इलाज नहीं है, लेकिन समय पर वैक्सीन लगवाने से इसे 100% रोका जा सकता है। जानवर के काटते ही घाव को 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोएं और तुरंत डॉक्टर से मिलें।
नोटिफायबल डिजीज:
- नोटिफायबल डिजीज वह बीमारी होती है, जिसका कोई भी संदिग्ध या पुष्ट मामला सामने आते ही उसकी जानकारी सरकारी स्वास्थ्य विभाग को देना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है।
- इसे घोषित करने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- निगरानी और ट्रैकिंग: इससे सरकार को पता चलता है कि बीमारी कहाँ और कितनी तेजी से फैल रही है, जिससे हॉटस्पॉट की पहचान आसान हो जाती है।
- त्वरित कार्रवाई: हर केस की रिपोर्ट मिलने से स्वास्थ्य विभाग समय रहते मरीज का इलाज और प्रभावित इलाके में टीकाकरण जैसे कदम उठा सकता है।
- सटीक डेटा: निजी और सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों को एक साथ जोड़कर बीमारी की गंभीरता का सही आकलन किया जा सकता है।
- महामारी से बचाव: समय पर जानकारी मिलने से किसी भी बीमारी को स्थानीय स्तर पर ही रोककर उसे महामारी बनने से बचाया जा सकता है।
|
प्रश्न. रेबीज वायरस मुख्य रूप से मानव शरीर के किस तंत्र को प्रभावित करता है ?
(a) श्वसन तंत्र
(b) पाचन तंत्र
(c) सेंट्रल नर्वस सिस्टम
(d) रक्त परिसंचरण तंत्र
|