New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 10th Feb. 2026, 10:30 AM Spring Sale UPTO 75% + 10% Off GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026 Spring Sale UPTO 75% + 10% Off GS Foundation (P+M) - Delhi : 10th Feb. 2026, 10:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026

रमन ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक

संदर्भ 

  • हाल ही में, केंद्र सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान ‘रमन अनुसंधान संस्थान (RRI)’ के शोधकर्ताओं ने रमन ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी (RDSNS) नामक एक तकनीक का प्रदर्शन किया है।
  • वैज्ञानिकों द्वारा विकसित एक नई तकनीक ठंडे परमाणुओं के स्थानीय घनत्व का तत्क्षण मापन करने में सक्षम है, वह भी उनमें कोई बड़ा बदलाव किए बिना। 
  • यह क्वांटम कंप्यूटेशन और क्वांटम सेंसिंग के क्षेत्र में निकट भविष्य के अनुप्रयोगों के विकास में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है जहाँ परमाणुओं एवं उनकी क्वांटम अवस्था का तत्क्षण पता लगाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

रमन ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी (RDSNS) के बारे में 

यह तकनीक स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी को परमाणु नमूने से गुजरने वाले लेजर प्रकाश के ध्रुवीकरण उतार-चढ़ाव का पता लगाकर परमाणु स्पिन के प्राकृतिक उतार-चढ़ाव को निर्धारित करने के लिए संयोजित करके इन चुनौतियों को दूर करती है।

RDSNS की प्रक्रिया एवं विधि  

  • यह विधि दो आसन्न स्पिन अवस्थाओं के बीच परमाणुओं को सुसंगत रूप से संचालित करने के लिए दो अतिरिक्त लेजर बीम का भी उपयोग करती है। 
  • ये रमन किरणें परमाणु अवस्थाओं के बीच संक्रमण उत्पन्न करती हैं और सिग्नल को लगभग दस लाख गुना तक बढ़ा देती हैं। 
  • जांच का आयतन 0.01 मिमी³ है जो जांच को मात्र 38 माइक्रोमीटर तक केंद्रित करके प्राप्त किया जाता है। 
  • इसमें एटम क्लाउड के एक छोटे से क्षेत्र को लक्षित किया जाता है जिसमें लगभग 10,000 परमाणु होते हैं। 
  • महत्वपूर्ण बात यह है कि मापा गया सिग्नल केवल कुल परमाणु संख्या के बजाय स्थानीय घनत्व का प्रत्यक्ष माप प्रदान करता है।
  • शोधकर्ताओं के दल ने मैग्नेटो-ऑप्टिकल ट्रैप (MOT) में पोटैशियम परमाणुओं का अध्ययन करने के लिए आर.डी.एस.एन.एस. का उपयोग किया और पाया कि एटम क्लाउड का केंद्रीय घनत्व एक सेकंड के भीतर संतृप्त हो गया, जबकि प्रतिदीप्ति के माध्यम से मापी गई कुल परमाणु संख्या में लगभग दोगुना समय लगा।
  • यह एक महत्वपूर्ण अंतर को प्रदर्शित करता है- प्रतिदीप्ति वैश्विक परमाणु गणना को दर्शाती है जबकि आर.डी.एस.एन.एस. यह दिखाता है कि परमाणु स्थानीय रूप से कितनी सघनता से पैक किए गए हैं।

आर.डी.एस.एन.एस. की आवश्यकता

लेज़र शीतलन एवं ट्रैपिंग तकनीक

  • पारंपरिक ठंडे परमाणु प्रयोगों में लेज़र शीतलन और ट्रैपिंग तकनीकों के माध्यम से परमाणुओं की गतिज ऊर्जा को लगभग शून्य तापमान तक कम किया जाता है। 
  • इन प्रयोगों में परमाणुओं के क्वांटम गुण अधिक स्पष्ट होते हैं। इन ठंडे परमाणुओं का उपयोग क्वांटम कंप्यूटर और क्वांटम सेंसिंग के लिए संसाधनों के रूप में किया जा सकता है। 
  • इन परमाणुओं की क्वांटम अवस्था का पता लगाने के लिए अवशोषण एवं प्रतिदीप्ति इमेजिंग जैसी विधियों का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। 

तकनीकों की अंतर्निहित सीमाएँ 

  • सघन परमाणुओं (एटॉमिक क्लाउड्स) की इमेजिंग करते समय अवशोषण इमेजिंग में कठिनाई होती है क्योंकि प्रोब बीम सटीक घनत्व माप प्रदान करने के लिए पर्याप्त रूप से प्रवेश नहीं कर पाता है। 
  • दूसरी ओर, प्रतिदीप्ति इमेजिंग में बिखरे हुए फोटॉनों को एकत्रित करने के लिए अधिक समय तक एक्सपोज़र की आवश्यकता होती है और दोनों ही विधियां प्राय: विनाशकारी होती हैं जिससे माप के दौरान परमाणुओं की अवस्था में परिवर्तन हो जाता है। 

महत्त्व 

  • क्वांटम प्रौद्योगिकियों के लिए इस कार्य का व्यापक महत्व अमूल्य है; तीव्र, सटीक एवं बिना छेड़छाड़ वाला घनत्व मापन गुरुत्वाकर्षणमापी, चुंबकमापी व अन्य सेंसर जैसे उपकरणों में सहायक होते हैं जो परमाणु घनत्व की सटीक जानकारी पर निर्भर करते हैं। 
  • व्यवस्था को बाधित किए बिना सूक्ष्म-स्तरीय स्थानीय जांच को सक्षम करके आर.डी.एस.एन.एस. घनत्व तरंग प्रसार, क्वांटम परिवहन आदि जैसी घटनाओं के अध्ययन के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।  
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत समर्थित यह सफलता क्वांटम अनुसंधान में सटीक माप के क्षेत्र में आर.आर.आई. को अग्रणी स्थान पर रखती है।

ठंडे परमाणु 

  • लेजर और चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग करके परमाणुओं को परम शून्य के निकट अति निम्न तापमान तक ठंडा किया जाता है तो वे अपना तरंग जैसा स्वरूप प्रकट करते हैं और क्वांटम यांत्रिकी के नियम शास्त्रीय यांत्रिकी के नियमों का स्थान ले लेते हैं।
  • यह शीतलन परमाणुओं की गति को नाटकीय रूप से धीमा कर देता है जिससे उनके क्वांटम गुण प्रकट होते हैं और वैज्ञानिकों को मौलिक भौतिकी का अध्ययन करने, क्वांटम प्रणालियों का अनुकरण करने (क्वांटम सिमुलेशन), सटीक परमाणु घड़ियाँ बनाने और क्वांटम कंप्यूटर और सेंसर विकसित करने में मदद मिलती है। 
  • यह अत्यधिक शीतलन, जो प्राय: नैनोकेल्विन (0 K से ऊपर एक डिग्री के अरबवें भाग) तापमान तक होता है, परमाणुओं को तरंगों की तरह व्यवहार करने के लिए मजबूर करता है, जिससे क्वांटम घटनाओं जैसे कि अभूतपूर्व नियंत्रण और अवलोकन संभव हो पाता है। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X