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अफ्रीका में दुर्लभ नारंगी-मुख वाला बंदर खोजा गया: नई प्राइमेट प्रजाति Colobus congoensis की पहचान

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, जैव विविधता, समाचारों में प्रजातियाँ (Species in News), समसामयिकी

मुख्य परीक्षा 

GS Paper-I: भूगोल (कांगो बेसिन एवं अफ्रीकी वर्षावन पारिस्थितिकी तंत्र)

GS Paper-III (सबसे महत्वपूर्ण): पर्यावरण एवं जैव विविधता – जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव, वर्गिकी (Taxonomy), संरक्षित क्षेत्र एवं नई प्रजातियों की खोज

GS Paper-III (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी): आनुवंशिक विश्लेषण, वर्गिकी तथा नई प्रजातियों की पहचान की आधुनिक तकनीकें

चर्चा में क्यों ?

  • वैज्ञानिकों ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में पाए जाने वाले एक दुर्लभ नारंगी-मुख वाले बंदर को आधिकारिक रूप से नई प्राइमेट (वानर) प्रजाति घोषित किया है।

प्रमुख बिन्दु 

  • इस बंदर की पहली तस्वीर 2008 में ली गई थी, लेकिन लगभग 18 वर्ष बाद इसे नई प्रजाति के रूप में मान्यता मिली।
  • इस नई प्रजाति का वैज्ञानिक नाम Colobus congoensis तथा स्थानीय नाम लिक्वेली (Likweli) है।
  • यह पिछले 75 वर्षों में अफ्रीका में खोजी गई पाँचवीं नई प्राइमेट प्रजाति है।
  • इस शोध को वैज्ञानिक पत्रिका PLOS One में प्रकाशित किया गया है।

नई प्रजाति की पहचान कैसे हुई ?

  • 2008 में शोधकर्ताओं ने लोमामी बेसिन के जंगलों में एक अज्ञात बंदर की धुंधली तस्वीर ली।
  • तस्वीर स्पष्ट नहीं होने के कारण यह पुष्टि नहीं हो सकी कि यह नई प्रजाति है।
  • 2018 में वैज्ञानिकों ने उसी बंदर की अधिक स्पष्ट तस्वीरें लीं।
  • उसके मुंह और नाक के चारों ओर नारंगी-हल्के क्रीम रंग का विशिष्ट पैच देखकर वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित हुआ।
  • इसके बाद वैज्ञानिकों ने मैदानी सर्वेक्षण, तस्वीरों की तुलना, आनुवंशिक (DNA) विश्लेषण और आकारिकी (Morphological) अध्ययन किए।
  • सभी प्रमाणों के आधार पर इसे नई प्राइमेट प्रजाति घोषित किया गया।

यह कहाँ पाया जाता है ?

  • यह प्रजाति केवल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में पाई जाती है।
  • इसका आवास लोमामी नदी और कांगो (लुआलाबा) नदी के बीच स्थित घने वर्षावनों में है।
  • इसका वितरण क्षेत्र बहुत सीमित है, इसलिए यह अफ्रीका के सबसे दुर्लभ प्राइमेट्स में से एक है।

वैज्ञानिक वर्गीकरण

  • वैज्ञानिक नाम : Colobus congoensis
  • स्थानीय नाम : लिक्वेली (Likweli)
  • वंश (Genus) : Colobus
  • कुल (Family) : Cercopithecidae (पुरानी दुनिया के बंदर / Old World Monkeys)

विशिष्ट शारीरिक विशेषताएँ

  • इस नई प्रजाति की पहचान निम्नलिखित विशेषताओं से की जा सकती है -
    • अन्य Colobus बंदरों की तुलना में छोटा शरीर।
    • पूरा शरीर काले रंग के बालों से ढका होता है।
    • मुंह और नाक के चारों ओर चमकीला नारंगी-हल्के क्रीम रंग का पैच।
    • होंठों के आसपास गुलाबी-नारंगी रंग की त्वचा।
    • पूंछ के पास सफेद रंग का पैच, जो नर और मादा में अलग-अलग होता है।
    • स्वभाव से शांत, शर्मीला और आसानी से दिखाई न देने वाला।

आनुवंशिक अध्ययन से क्या पता चला ?

  • वैज्ञानिकों के अनुसार -
    • यह प्रजाति Colobus वंश से संबंधित है।
    • इसका सबसे निकट संबंधी Colobus satanas (ब्लैक कोलोबस) है।
    • दोनों प्रजातियों के बीच लगभग 1,200 किमी की भौगोलिक दूरी है।
    • दोनों का विकास एक समान पूर्वज से लगभग 4.1 से 5 मिलियन वर्ष पहले हुआ था।

स्थानीय समुदाय क्या जानते हैं ?

  • इस बंदर के बारे में स्थानीय लोगों को भी बहुत कम जानकारी थी। 
  • 52 सर्वेक्षित गाँवों में से केवल 8 गाँव ही इसे सही ढंग से पहचान पाए। 
  • कुछ शिकारी इसके शरीर से आने वाली तेज गंध का उल्लेख करते हैं। 
  • बालांगा समुदाय ने इसका नाम "लिक्वेली" रखा। 
  • मितुकू समुदाय इसे "कसाबा न्कोनी" कहता है, जिसका अर्थ है "शाखाओं को हिलाने वाला"।

यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?

  • यह पिछले 75 वर्षों में अफ्रीका में खोजी गई पाँचवीं नई प्राइमेट प्रजाति है।
  • इससे कांगो बेसिन की समृद्ध जैव विविधता का पता चलता है।
  • यह दर्शाता है कि दूरस्थ वर्षावनों में अभी भी कई प्रजातियाँ खोजे जाने की प्रतीक्षा में हैं।
  • यह वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा की आवश्यकता को मजबूत करता है।
  • इससे अफ्रीकी प्राइमेट्स के विकासक्रम (Evolution) को समझने में भी मदद मिलेगी।

निष्कर्ष

Colobus congoensis (लिक्वेली) की खोज हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण प्राइमेट खोजों में से एक है। यह खोज न केवल अफ्रीका की ज्ञात जैव विविधता को समृद्ध बनाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कांगो बेसिन के घने जंगलों में अभी भी अनेक प्रजातियाँ खोजे जाने की प्रतीक्षा कर रही हैं। यह वैज्ञानिक अनुसंधान और जैव विविधता संरक्षण के महत्व को और अधिक रेखांकित करती है।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: Colobus congoensis के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-

  1. यह Colobus वंश से संबंधित है। 
  2. इसका स्थानीय नाम लिक्वेली (Likweli) है। 
  3. इसकी पहली वैज्ञानिक तस्वीर वर्ष 2008 में ली गई थी। 

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्न:"नई प्रजातियों की खोज जैव विविधता हॉटस्पॉट की पारिस्थितिक समृद्धि तथा उनके संरक्षण की आवश्यकता को दर्शाती है।" डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में हाल ही में खोजी गई Colobus congoensis के संदर्भ में चर्चा कीजिए।  

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न  

प्रश्न 1. दुर्लभ नारंगी-मुख वाला बंदर चर्चा में क्यों है ?

उत्तर : वैज्ञानिकों ने लगभग 18 वर्ष बाद Colobus congoensis को नई प्राइमेट प्रजाति के रूप में मान्यता दी है।

प्रश्न 2. इस नई प्रजाति का वैज्ञानिक नाम क्या है ?

उत्तर : इसका वैज्ञानिक नाम Colobus congoensis है और स्थानीय नाम लिक्वेली (Likweli) है।

प्रश्न 3. यह नई प्रजाति कहाँ पाई गई है ?

उत्तर : यह डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के लोमामी बेसिन में, लोमामी और कांगो (लुआलाबा) नदियों के बीच पाई गई है।

प्रश्न 4. यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है ?

उत्तर : यह पिछले 75 वर्षों में अफ्रीका में खोजी गई पाँचवीं नई प्राइमेट प्रजाति है और अफ्रीका की जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

प्रश्न 5. Colobus congoensis की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं ?

उत्तर: इसका शरीर काले रंग का होता है, जबकि मुंह और नाक के चारों ओर नारंगी-हल्के क्रीम रंग का पैच इसकी सबसे विशिष्ट पहचान है। यह आकार में छोटा, शर्मीला तथा दुर्लभ प्राइमेट है।

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