New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM GS Foundation (P+M) - Delhi : 19th Jan. 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 09th Jan. 2026, 11:00 AM

गरीब कैदी सहायता योजना के संशोधित दिशानिर्देश व उनके निहितार्थ

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, लोकनीति, अधिकारों संबंधी मुद्दे इत्यादि)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: केंद्र व राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ व निष्पादन; अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान तथा निकाय)

संदर्भ 

भारत की जेलों में एक बड़ी संख्या ऐसे कैदियों की है जो सजा पूरी करने के बाद भी केवल इसलिए सलाखों के पीछे हैं क्योंकि उनके पास अदालत द्वारा लगाया गया जुर्माना भरने के धन नहीं हैं। वर्ष 2023 में ‘गरीब कैदियों को सहायता’ योजना शुरू की गई थी। हालांकि, राज्यों की सुस्त प्रतिक्रिया को देखते हुए गृह मंत्रालय ने इसके दिशा-निर्देशों में परिवर्तन किए हैं। 

नया संस्थागत तंत्र: योजना का कार्यान्वयन 

संशोधित नियमों के अनुसार, अब जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों पर होगी:

  • अधिकार प्राप्त समिति: अब प्रत्येक जिले में एक 'एम्पावर्ड कमेटी' होगी, जिसमें जिला कलेक्टर का प्रतिनिधि एवं जिला न्यायाधीश द्वारा नामित जेल प्रभारी न्यायाधीश शामिल होंगे। 
  • 7 दिनों का डेडलाइन: यदि कोई कैदी जुर्माना न भर पाने के कारण जेल में रुका है तो जेल अधीक्षक को एक सप्ताह के भीतर जिला विधि सेवा प्राधिकरण (DLSA) को सूचित करना अनिवार्य होगा।
  • वित्तीय सहायता: DLSA कैदी की आर्थिक स्थिति की जाँच करेगा और समिति को रिपोर्ट भेजेगा। समिति रिहाई के लिए ₹25,000 तक की वित्तीय सहायता स्वीकृत कर सकती है जिसे सीधे अदालत में जमा किया जाएगा।  

सहायता की पात्रता 

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना केवल ‘आर्थिक रूप से अक्षम’ कैदियों के लिए है, न कि गंभीर अपराधियों के लिए। सहायता की पात्रता को लेकर कठोर मानक तय किए गए हैं और कुछ अपराधों के दोषियों को यह सहायता नहीं मिलेगी-

  • राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आतंकवाद: UAPA या देशद्रोह से संबंधित मामले से संबंधित व्यक्ति
  • जघन्य अपराध: बलात्कार, मानव तस्करी, दहेज हत्या एवं POCSO अधिनियम के तहत मामले से संबंधित अपराधी
  • आर्थिक एवं नशीले पदार्थ: मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और NDPS के तहत आरोपी साबित हुआ व्यक्ति

एक सामाजिक और प्रशासनिक आवश्यकता

यह संशोधन केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह एक मानवीय पहल है। इस योजना को ‘अक्षरशः एवं भावनापूर्वक’ (Letter and Spirit) लागू करने से न केवल गरीबों की कठिनाइयाँ कम होंगी, बल्कि भारतीय जेलों पर बढ़ता दबाव भी कम होगा। 

गरीब कैदियों को सहायता योजना 2023 के बारे में

1 फरवरी, 2023 को केंद्रीय बजट 2023-24 प्रस्तुत करते समय केंद्र सरकार ने ‘अंतिम व्यक्ति तक पहुँच, कोई भी पीछे न छूटे’ के उद्देश्य के तहत यह योजना शुरू करने की घोषणा की। इसका लक्ष्य जेलों में बंद उन गरीब लोगों को आर्थिक मदद प्रदान करना है जो जुर्माना या जमानत राशि न चुका पाने के कारण रिहा नहीं हो पा रहे हैं।

कार्यान्वयन के दिशानिर्देश 

  • इस योजना के लिए धन केंद्र सरकार द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय नोडल एजेंसी (CNA) के माध्यम से दिया जाएगा।
  • राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) को इस योजना के लिए केंद्रीय नोडल एजेंसी बनाया गया है।
  • राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आवश्यकता के अनुसार, हर मामले में अलग-अलग CNA से राशि निकालेंगे।
  • यह राशि कैदी को राहत देने के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी अर्थात ‘न्यायालय’ को जमा की जाएगी।
  • इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक सशक्त समिति बनाई जाएगी।
  • इस समिति में निम्नलिखित सदस्य होंगे:
    • जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट
    • सचिव, जिला विधि सेवा प्राधिकरण (DLSA)
    • पुलिस अधीक्षक
    • संबंधित जेल के अधीक्षक या उपाधीक्षक
    • जिला न्यायाधीश द्वारा नामित संबंधित जेल के प्रभारी न्यायाधीश
  • राज्य स्तर पर एक निगरानी समिति का गठन किया जा सकता है जिसमें निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे: 
    • प्रधान सचिव (गृह/जेल)
    • सचिव (कानून विभाग)
    • सचिव, राज्य विधि सेवा प्राधिकरण
    • महानिदेशक/महानिदेशक (कारागार) 
    • उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल

योजना के अंतर्गत आने वाले व्यक्ति

1. विचाराधीन कैदी (Undertrial Prisoners)

  1. यदि किसी विचाराधीन कैदी को जमानत मिल जाने के बाद भी वह 7 दिनों के भीतर जेल से बाहर नहीं आ पाता है तो जेल अधिकारी इसकी सूचना जिला विधि सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव को देंगे।
  2. DLSA सचिव यह जाँच करेंगे कि कैदी जमानत की शर्तों के अनुसार राशि जमा करने में आर्थिक रूप से असमर्थ है या नहीं। इस जाँच में सामाजिक कार्यकर्ताओं, गैर-सरकारी संगठनों, जिला परिवीक्षा अधिकारी या राजस्व अधिकारियों की मदद ली जा सकती है। यह प्रक्रिया 10 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी।
  3. DLSA सचिव ऐसे सभी मामलों को हर 2–3 सप्ताह में जिला स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति के सामने रखेंगे।
  4. यदि समिति यह पाती है कि कैदी वास्तव में गरीब है और उसे सहायता की आवश्यकता है तो ‘गरीब कैदियों को सहायता’ योजना के तहत प्रति कैदी अधिकतम ₹40,000 तक की राशि अदालत में जमा की जा सकती है ताकि उसकी जमानत सुनिश्चित हो सके।
  5. यह योजना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धन शोधन निवारण अधिनियम, एन.डी.पी.एस. अधिनियम, गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम या भविष्य में अधिसूचित किसी अन्य गंभीर कानून के तहत आरोपित व्यक्तियों पर लागू नहीं होगी।
  6. यदि मुकदमे के अंत में कैदी बरी हो जाता है या दोषी ठहराया जाता है तो अदालत उचित आदेश देकर जमानत के लिए जमा की गई राशि को सरकार के खाते में वापस करवा सकती है। यह राशि केवल जमानत के उद्देश्य से दी जाती है।
  7. यदि जमानत राशि ₹40,000 से अधिक है तो DLSA सचिव अतिरिक्त राशि के लिए अधिकार प्राप्त समिति को सिफारिश कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर जमानत राशि कम कराने के लिए कानूनी सहायता वकील की मदद भी ली जा सकती है। ₹40,000 से अधिक की राशि के लिए राज्य स्तरीय निगरानी समिति की मंजूरी आवश्यक होगी।

2. दोषी कैदी (Convicted Prisoners)

  1. यदि कोई दोषी कैदी केवल जुर्माना न चुका पाने के कारण जेल में बंद है तो जेल अधीक्षक 7 दिनों के भीतर इसकी सूचना DLSA सचिव को देंगे।
  2. DLSA सचिव सामाजिक कार्यकर्ताओं, गैर-सरकारी संगठनों, जिला परिवीक्षा अधिकारी और राजस्व अधिकारियों की मदद से कैदी की आर्थिक स्थिति की जाँच करेंगे। यह प्रक्रिया भी 7 दिनों में पूरी की जाएगी।
  3. जाँच के बाद अधिकार प्राप्त समिति कैदी की रिहाई के लिए अदालत में जमा किए जाने के लिए अधिकतम ₹25,000 तक की जुर्माना राशि देने की अनुमति दे सकती है।
  4. यदि जुर्माने की राशि ₹25,000 से अधिक है तो इसके लिए राज्य स्तरीय निगरानी समिति की स्वीकृति ली जाएगी। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR