संदर्भ
हाल ही में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) के माध्यम से रीसा – टाइमलेस ट्राइबल नामक एक विशेष प्रीमियम ब्रांड की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य देश की समृद्ध जनजातीय कला, वस्त्र परंपराओं और हस्तशिल्प को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करते हुए उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाना है।
रीसा ब्रांड के बारे में
- रीसा एक समर्पित प्रीमियम ब्रांड है, जिसे विशेष रूप से जनजातीय वस्त्रों, कढ़ाई कला और हस्तशिल्प उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए विकसित किया गया है।
- यह पहल न केवल जनजातीय उत्पादों को ब्रांडेड पहचान प्रदान करेगी, बल्कि कारीगरों को बेहतर बाजार अवसरों से भी जोड़ेगी।
प्रमुख उद्देश्य:
रीसा पहल को कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों के साथ प्रारंभ किया गया है, जिनमें शामिल हैं -
- जनजातीय उत्पादों के लिए एक मजबूत और विशिष्ट ब्रांड पहचान विकसित करना।
- जनजातीय बुनकरों और कारीगरों को व्यापक बाजार से जोड़ना।
- उत्पादों के डिजाइन नवाचार और विविधीकरण को बढ़ावा देना।
- घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों में जनजातीय विरासत का विस्तार करना।
- पारंपरिक शिल्प, सांस्कृतिक ज्ञान और स्थानीय कौशल का संरक्षण सुनिश्चित करते हुए जनजातीय समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ बनाना।
प्रथम चरण का कार्यान्वयन
रीसा के प्रारंभिक चरण में सांस्कृतिक महत्व, विशिष्टता और बाजार क्षमता को ध्यान में रखते हुए सात प्रमुख जनजातीय वस्त्र एवं कढ़ाई परंपराओं का चयन किया गया है -
- चयनित जनजातीय वस्त्र एवं कसीदाकारी
- असम – एरी सिल्क एवं मूँगा सिल्क
- झारखंड – संथाल कॉटन
- लद्दाख – चांगपा पश्मीना
- ओडिशा – कोटपाड़ कॉटन एवं डोंगरिया कढ़ाई
- तमिलनाडु – टोडा कढ़ाई
- चयनित जनजातीय हस्तशिल्प
- मणिपुर – लोंगपी पॉटरी
- लद्दाख – तुर्तुक ब्रास कटलरी
- छत्तीसगढ़ – डोकरा कला
इन उत्पादों के लक्षित प्रचार-प्रसार और विपणन के माध्यम से उन्हें उच्च मूल्य वाले बाजारों तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।
डिजाइन एवं उत्पाद विकास
- रीसा पहल को आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए देश के प्रतिष्ठित फैशन डिजाइनरों को इससे जोड़ा गया है। उनका दायित्व पारंपरिक जनजातीय शिल्प को समकालीन डिजाइन और उपभोक्ता मांग के साथ जोड़ना है।
- इस परियोजना का क्रियान्वयन वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत स्वायत्त संस्था राष्ट्रीय डिजाइन केंद्र (NDC) द्वारा किया जा रहा है।
परियोजना के प्रमुख घटक
रीसा कार्यक्रम के अंतर्गत निम्नलिखित गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है -
- नवीन डिजाइन विकास
- परिधानों एवं उत्पादों के प्रोटोटाइप तैयार करना
- जनजातीय कारीगरों एवं बुनकरों का कौशल विकास
- सिलाई एवं प्रसंस्करण सुविधाओं की स्थापना
- बुनाई एवं हस्तशिल्प क्लस्टरों को सशक्त बनाना
- उत्पाद प्रस्तुति, ब्रांडिंग और पैकेजिंग में सुधार
- पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग
- रीसा ब्रांड के उत्पादों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली तथा टिकाऊ पैकेजिंग विकसित करने का दायित्व राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID), हरियाणा को सौंपा गया है। इसका उद्देश्य उत्पादों को आकर्षक बनाने के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता को भी बढ़ावा देना है।
पहला विशेष रीसा स्टोर
- रीसा ब्रांड का पहला विशेष बिक्री केंद्र नई दिल्ली स्थित राजीव गांधी हस्तशिल्प भवन, कनॉट प्लेस (गैलरी संख्या–2) में स्थापित किया गया है।
- यह केंद्र जनजातीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा।