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रिसा RISA (Timeless Tribal): जनजातीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की नई पहल

चर्चा में क्यों ?

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) के माध्यम से 10 जून 2026 को "RISA – Timeless Tribal" नामक एक प्रीमियम ब्रांड का शुभारंभ किया। इसके साथ ही नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित राजीव गांधी हस्तशिल्प भवन में पहले विशेष RISA स्टोर का उद्घाटन भी किया गया।

क्या है RISA – Timeless Tribal ?

  • RISA (Timeless Tribal) जनजातीय वस्त्रों, कढ़ाई और हस्तशिल्प उत्पादों के लिए विकसित एक प्रीमियम ब्रांड है। 
  • इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक विशिष्ट पहचान दिलाना है। 
  • यह पहल जनजातीय समुदायों की आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ उनकी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी बढ़ावा देती है।

RISA पहल के प्रमुख उद्देश्य

  • RISA की परिकल्पना जनजातीय उत्पादों के लिए एक अलग ब्रांड पहचान विकसित करने, जनजातीय कारीगरों के बाजार संपर्क को मजबूत बनाने, डिजाइन नवाचार और उत्पाद विविधीकरण को बढ़ावा देने तथा वैश्विक स्तर पर जनजातीय विरासत को लोकप्रिय बनाने के लिए की गई है। 
  • इसके माध्यम से जनजातीय कारीगरों, विशेषकर महिला शिल्पकारों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
  •   नोडल मंत्रालय : जनजातीय मामलों का मंत्रालय (MoTA)।
  •   कार्यान्वयन एजेंसी : भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (टीआरआईएफईडी)।

पहले चरण में शामिल प्रमुख जनजातीय वस्त्र एवं कढ़ाई परंपराएँ

  • इस पहल के प्रथम चरण में सांस्कृतिक महत्व और बाजार क्षमता के आधार पर सात प्रमुख जनजातीय वस्त्र एवं कढ़ाई परंपराओं का चयन किया गया है। 
  • इनमें असम का एरी सिल्क और मूगा सिल्क, झारखंड का संताल कॉटन, लद्दाख का चांगपा पश्मीना, ओडिशा का कोटपाड कॉटन और डोंगरिया कढ़ाई, तथा तमिलनाडु की टोडा कढ़ाई शामिल हैं।

प्रोत्साहित किए जाने वाले प्रमुख हस्तशिल्प

  • पहले चरण में कुछ विशिष्ट जनजातीय हस्तशिल्पों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इनमें मणिपुर की लोंगपी पॉटरी, लद्दाख के तुरतुक पीतल शिल्प (ब्रास कट्लरी) तथा छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध डोखरा कला शामिल हैं। 
  • इन उत्पादों के लिए बाजार विस्तार और आय वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

डिजाइन एवं उत्पाद विकास

  • RISA के अंतर्गत पारंपरिक शिल्प की मौलिकता बनाए रखते हुए आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं। 
  • इसके लिए प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर अंजू मोदी, मनीष त्रिपाठी, गौरव जय गुप्ता, अबू जानी-संदीप खोसला और समीरा दलवी को इस परियोजना से जोड़ा गया है।

कार्यान्वयन एवं संस्थागत सहयोग

  • इस पहल को वस्त्र मंत्रालय के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय डिजाइन केंद्र (NDC) के माध्यम से लागू किया जा रहा है। 
  • परियोजना के अंतर्गत डिजाइन विकास, परिधान प्रोटोटाइप निर्माण, जनजातीय बुनकरों एवं कारीगरों का कौशल विकास, सिलाई सुविधाओं की स्थापना, हस्तशिल्प समूहों को सुदृढ़ करना तथा उत्पाद प्रस्तुति और पैकेजिंग में सुधार शामिल हैं।
  • इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID), हरियाणा को RISA ब्रांड के उत्पादों के लिए प्रीमियम और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

महत्त्व

  • RISA पहल जनजातीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, पारंपरिक ज्ञान एवं शिल्पकला को संरक्षित रखने तथा भारतीय जनजातीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 
  • यह पहल ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप समावेशी विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत आजीविका को बढ़ावा देने का कार्य करेगी।
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