हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) तथा भारतीय वायु सेना (IAF) ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से स्वदेशी तकनीक द्वारा निर्मित रुद्रम-II (वायु-से-सतह) मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण संपन्न किया।
रुद्रम-II के बारे में
रुद्रम-II उच्च गति वाली एक अत्याधुनिक एंटी-रेडिएशन मिसाइल है।
इसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों से संचालित करने के लिए विकसित किया गया है।
यह मिसाइल दुश्मन के रडार, संचार तंत्र तथा सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) साइटों से उत्सर्जित होने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी को ट्रैक करके उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है।
विकासकर्ता:
हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने डीआरडीओ की नोडल प्रयोगशाला के रूप में अन्य सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर इसका विकास किया है।
रणनीतिक उद्देश्य:
इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय वायु सेना को दुश्मन की हवाई सुरक्षा को ध्वस्त करने (SEAD क्षमता) की शक्ति प्रदान करना है, ताकि युद्ध के शुरुआती दौर में ही दुश्मन के रडार बुनियादी ढाँचे को नष्ट कर हमारे विमानों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
प्रमुख तकनीकी विशेषताएं:
हाइपरसोनिक गति : यह मिसाइल मैक 5.5 की अधिकतम गति प्राप्त कर सकती है, जिससे दुश्मन को सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया का समय नहीं मिलता।
स्टैंड-ऑफ रेंज : लगभग 300 किलोमीटर की मारक क्षमता के कारण भारतीय लड़ाकू विमान शत्रु के हवाई सुरक्षा दायरे से बाहर रहकर भी हमला कर सकते हैं।
पेलोड क्षमता :यह 200 किलोग्राम के पारंपरिक वॉरहेड से लैस है, जो कंक्रीट के सैन्य बंकरों को नष्ट करने के लिए अनुकूलित है।
लॉन्च लचीलापन : इसे 3 किमी से लेकर 15 किमी तक की विभिन्न ऊंचाइयों पर उड़ रहे विमानों (जैसे Su-30MKI) से सुरक्षित रूप से दागा जा सकता है।
मार्गदर्शन प्रणाली : इसमें आईएनएस और जीपीएस के साथ एक अत्यंत संवेदनशील पैसिव होमिंग हेड (PHH) का हाइब्रिड संयोजन है, जो विस्तृत फ्रीक्वेंसी बैंड पर दुश्मन के सिग्नलों को तुरंत लॉक कर लेता है।