चर्चा में क्यों ?
- भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने गेट्स मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (Gates MRI) के साथ M72/AS01E नामक संभावित तपेदिक (टीबी) वैक्सीन के निर्माण हेतु रणनीतिक साझेदारी की है।
- यह वैक्सीन वर्तमान में फेज-III क्लीनिकल ट्रायल में है। यदि इसे नियामकीय स्वीकृति मिलती है, तो यह बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (BCG) के बाद 100 वर्षों से अधिक समय में विकसित होने वाली पहली नई टीबी वैक्सीन होगी।

प्रमुख बिंदु
सीरम इंस्टीट्यूट और गेट्स MRI के बीच साझेदारी
- सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने M72/AS01E टीबी वैक्सीन के निर्माण के लिए गेट्स मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ समझौता किया है।
- बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी हेतु SII 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश करेगा।
- गेट्स MRI वैक्सीन के एंटीजन निर्माण की तकनीक सीरम इंस्टीट्यूट को हस्तांतरित करेगा।
- ब्रिटिश दवा कंपनी GSK (ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन) AS01E एडजुवेंट की आपूर्ति जारी रखेगी, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को मजबूत बनाता है।
- नियामकीय स्वीकृति से पहले ही उत्पादन की तैयारी की जा रही है, ताकि स्वीकृति मिलने पर वैक्सीन का तेजी से वैश्विक वितरण किया जा सके।
M72/AS01E वैक्सीन क्या है ?
- M72/AS01E एक प्रोटीन सबयूनिट वैक्सीन है।
- इसका उद्देश्य लेटेंट (सुप्त) टीबी संक्रमण को सक्रिय फुफ्फुसीय टीबी में बदलने से रोकना है।
- यह मुख्य रूप से टीबी संक्रमित, HIV-नेगेटिव वयस्कों के लिए विकसित की गई है।
- इसका प्रारंभिक विकास ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन (GSK) ने किया था।
- बाद में इसके विकास के अधिकार गेट्स मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट को हस्तांतरित कर दिए गए।
- इस परियोजना को बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन तथा वेलकम ट्रस्ट का समर्थन प्राप्त है।
क्लीनिकल ट्रायल की स्थिति
फेज-IIb परीक्षण
- 3,575 प्रतिभागियों पर परीक्षण किया गया।
- सक्रिय फुफ्फुसीय टीबी को रोकने में लगभग 50% प्रभावशीलता प्राप्त हुई।
- तीन वर्षों तक सुरक्षा प्रभाव देखा गया।
- परीक्षण में 18–50 वर्ष आयु के HIV-नेगेटिव वयस्क शामिल थे।
फेज-III परीक्षण
- मार्च 2024 में प्रारम्भ हुआ।
- लगभग 20,000 प्रतिभागियों को शामिल किया गया।
- 54 परीक्षण स्थलों पर अध्ययन किया जा रहा है।
- परीक्षण निम्न देशों में चल रहा है —
- दक्षिण अफ्रीका
- केन्या
- मलावी
- जाम्बिया
- इंडोनेशिया
- प्रतिभागियों का पंजीकरण अप्रैल 2025 में पूरा हुआ।
- इस चरण का उद्देश्य वैक्सीन की सुरक्षा, प्रभावशीलता तथा वास्तविक उपयोगिता का आकलन करना है।
संभावित वैश्विक प्रभाव
सीरम इंस्टीट्यूट और गेट्स MRI के अनुमान के अनुसार, यदि यह वैक्सीन समान प्रभावशीलता दिखाती है, तो अगले 25 वर्षों में —
- लगभग 7.6 करोड़ नए टीबी मामलों को रोका जा सकेगा।
- लगभग 85 लाख लोगों की जान बचाई जा सकेगी।
- टीबी प्रभावित परिवारों को लगभग 41.5 अरब अमेरिकी डॉलर की आर्थिक बचत होगी।
- निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में स्वास्थ्य व्यय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
नई टीबी वैक्सीन की आवश्यकता क्यों है ?
तपेदिक (टीबी) आज भी दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक है।
वैश्विक स्थिति (WHO, 2024)
- लगभग 1.1 करोड़ लोग टीबी से संक्रमित हुए।
- लगभग 12.3 लाख लोगों की मृत्यु टीबी के कारण हुई।
- टीबी आज भी एकल संक्रामक रोग से होने वाली मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है।
- यह विश्व में मृत्यु के शीर्ष 10 कारणों में शामिल है।
अधिक टीबी भार वाले देश
- भारत
- इंडोनेशिया
- फिलीपींस
- चीन
- पाकिस्तान
- नाइजीरिया
टीबी वैक्सीन विकसित करना कठिन क्यों रहा है ?
COVID-19 वैक्सीन की तुलना में टीबी वैक्सीन विकसित करने में कई दशक लगे क्योंकि —
- Mycobacterium tuberculosis जीवाणु की जैविक संरचना अत्यंत जटिल है।
- टीबी का जीवाणु वर्षों तक सुप्त अवस्था (Latent Infection) में रह सकता है।
- दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
- प्रभावी प्रतिरक्षा संकेतकों (Immune Correlates of Protection) की कमी है।
- लंबे समय तक चलने वाले प्रभावशीलता परीक्षण अत्यधिक महंगे एवं समय लेने वाले होते हैं।
वैश्विक वैक्सीन निर्माण में भारत की भूमिका
- सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया विश्व के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माताओं में से एक है।
- इसने 170 से अधिक देशों को किफायती वैक्सीन उपलब्ध कराई हैं।
- COVID-19 महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर वैक्सीन उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- भविष्य में इंडोनेशिया एवं दक्षिण अफ्रीका के निर्माताओं के साथ मिलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की योजना है।
विकासाधीन अन्य टीबी वैक्सीन
Immuvac (MIP)
विकासकर्ता
- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)
- कैडिला फार्मास्यूटिकल्स
MTBVAC
विकासकर्ता
- यूनिवर्सिटी ऑफ ज़ारागोज़ा (स्पेन)
- बायोफैब्री
साझेदारी
WHO का TB Vaccine Accelerator Council
- वर्ष 2023 में WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस द्वारा स्थापित।
- उद्देश्य —
- टीबी वैक्सीन अनुसंधान में तेजी लाना।
- नियामकीय स्वीकृतियों को सरल बनाना।
- विनिर्माण क्षमता बढ़ाना।
- भविष्य की टीबी वैक्सीन तक सभी देशों की समान पहुँच सुनिश्चित करना।
BCG (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) वैक्सीन
- 1921 में शुरू की गई।
- वर्तमान में टीबी के विरुद्ध एकमात्र लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन है।
- इसका विकास फ्रांसीसी वैज्ञानिक अल्बर्ट कैलमेट एवं कैमिली गुएरिन ने किया।
- यह Mycobacterium bovis से विकसित जीवित कमजोर (Live Attenuated) वैक्सीन है।
- बच्चों में गंभीर टीबी से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती है, जैसे —
- टीबी मेनिन्जाइटिस
- मिलियरी टीबी
- वयस्कों में फुफ्फुसीय टीबी के विरुद्ध इसकी सुरक्षा सीमित एवं परिवर्तनीय होती है।
- यह भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) का हिस्सा है।
तपेदिक (टीबी):
कारक जीवाणु :- Mycobacterium tuberculosis
संक्रमण का तरीका :- संक्रमित व्यक्ति के खाँसने, छींकने, बोलने या गाने के दौरान निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के माध्यम से।
मुख्य प्रभावित अंग :- फेफड़े (फुफ्फुसीय टीबी)
अन्य प्रकार (Extrapulmonary TB)
- मस्तिष्क
- हड्डियाँ
- गुर्दे
- लसीका ग्रंथियाँ
- रीढ़
लक्षण
- दो सप्ताह से अधिक समय तक खाँसी
- बुखार
- रात में पसीना आना
- वजन कम होना
- अत्यधिक थकान
- खाँसी के साथ खून आना
निदान
- थूक (स्पुटम) माइक्रोस्कोपी
- CBNAAT/GeneXpert
- ट्रूनैट (Truenat)
- छाती का एक्स-रे
- कल्चर परीक्षण
उपचार
- राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत बहु-दवा (Multi-drug) उपचार।
- दवा-प्रतिरोधी टीबी (Drug-resistant TB) में उपचार अधिक लंबा एवं जटिल होता है।
भारत की टीबी उन्मूलन पहलें
- राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) (पूर्व में RNTCP)
- निक्षय पोर्टल
- निक्षय पोषण योजना
- टीबी मुक्त भारत अभियान
- सार्वभौमिक औषधि संवेदनशीलता परीक्षण (UDST)
- सक्रिय रोगी खोज (ACF)
- सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क जाँच एवं उपचार
- भारत का लक्ष्य 2025 तक टीबी उन्मूलन, जो WHO के 2030 End TB Strategy लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले है।
महत्त्व
- एक शताब्दी से अधिक समय बाद टीबी टीकाकरण में ऐतिहासिक सफलता सिद्ध हो सकती है।
- भारत की वैश्विक वैक्सीन निर्माण क्षमता और नेतृत्व को मजबूत करेगी।
- सतत विकास लक्ष्य (SDG-3) अर्थात अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण को बढ़ावा देगी।
- विकासशील देशों में सस्ती एवं समान वैक्सीन उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
- टीबी से होने वाली मृत्यु, गरीबी तथा स्वास्थ्य व्यय में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
चुनौतियाँ
- फेज-III क्लीनिकल परीक्षण का सफल समापन।
- विभिन्न देशों से नियामकीय स्वीकृति प्राप्त करना।
- बड़े पैमाने पर उत्पादन एवं वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था।
- कोल्ड-चेन एवं समान वितरण सुनिश्चित करना।
- दीर्घकालिक सुरक्षा एवं प्रभावशीलता की निगरानी।
- टीकाकरण के साथ-साथ दवा-प्रतिरोधी टीबी की चुनौती का समाधान।
निष्कर्ष
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और गेट्स मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच यह साझेदारी वैश्विक टीबी नियंत्रण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यदि M72/AS01E वैक्सीन फेज-III परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर नियामकीय स्वीकृति प्राप्त कर लेती है, तो यह एक सदी से अधिक समय में विकसित होने वाली पहली नई टीबी वैक्सीन बन सकती है। इससे वैश्विक टीबी बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी तथा वैक्सीन नवाचार, निर्माण और वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य में भारत की अग्रणी भूमिका और अधिक सुदृढ़ होगी।
FAQs: सीरम इंस्टीट्यूट की M72/AS01E TB वैक्सीन
Q1. M72/AS01E वैक्सीन खबरों में क्यों है ?
उत्तर :-सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने गेट्स मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (गेट्स MRI) के साथ M72/AS01E बनाने के लिए पार्टनरशिप की है, जो एक अच्छी ट्यूबरकुलोसिस (TB) वैक्सीन कैंडिडेट है और अभी फेज III क्लिनिकल ट्रायल्स में है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो यह 100 से ज़्यादा सालों में पहली नई TB वैक्सीन बन सकती है।
Q2. M72/AS01E क्या है ?
उत्तर :-M72/AS01E एक एक्सपेरिमेंटल प्रोटीन सबयूनिट वैक्सीन है जिसे लेटेंट TB इन्फेक्शन को एक्टिव पल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस में बदलने से रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है, खासकर बड़ों में।
Q3. M72/AS01E वैक्सीन किसने बनाई?
उत्तर :-यह वैक्सीन असल में ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन (GSK) ने बनाई थी। बाद में, इसका डेवलपमेंट गेट्स मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (गेट्स MRI) को ट्रांसफर कर दिया गया, जो अभी Phase III क्लिनिकल ट्रायल कर रहा है।
प्रश्न: तपेदिक (टीबी) किस जीवाणु के कारण होता है ?
(A) Plasmodium falciparum (B) Mycobacterium tuberculosis (C) Mycobacterium leprae (D) Salmonella typhi
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