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शक्सगाम घाटी और भारत एवं चीन के मध्य टकराव

(प्रारंभिक परीक्षा: भारत का इतिहास, भारत एवं विश्व का प्राकृतिक भूगोल)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध; द्विपक्षीय, क्षेत्रीय व वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार, भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव)

संदर्भ

  • जम्मू एवं कश्मीर की शक्सगाम घाटी को लेकर भारत तथा चीन के बीच एक नया राजनयिक व रणनीतिक तनाव उभर आया है। यह गतिरोध पूर्वी लद्दाख में हाल ही में बनी स्थिति के बावजूद सुरक्षा चिंताओं को फिर से बढ़ा रहा है। 
  • शक्सगाम घाटी सियाचिन ग्लेशियर के पास स्थित है और उत्तर में चीन के शिनजियांग, दक्षिण व पश्चिम में पाकिस्तान के अधिकृत कश्मीर से लगी हुई है। इस स्थिति के कारण यह क्षेत्र भारत की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। 

शक्सगाम घाटी : भौगोलिक अवस्थिति 

  • अवस्थिति: शक्सगाम घाटी को ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट भी कहते हैं। यह पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के हुंजा क्षेत्र में स्थित है।
  • विस्तार: यह लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर का दुर्गम इलाका है।
  • कनेक्टिविटी: इसके उत्तर में चीन का शिनजियांग प्रांत और दक्षिण-पश्चिम में पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) है।

भारत के लिए रणनीतिक महत्व

  • शक्सगाम घाटी भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर में स्थित है और काराकोरम दर्रे तक पहुंच की सुविधा देती है।
    • भारत सियाचिन से पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों पर नजर रख सकता है।
    • काराकोरम दर्रा चीन के सैन्य अभ्यासों पर दृष्टि बनाए रखने का अवसर देता है। 
  • इस प्रकार, शक्सगाम घाटी में हो रहे घटनाक्रम का प्रभाव भारत की सुरक्षा पर चीन के साथ एल.ए.सी. एवं पाकिस्तान के साथ एल.ओ.सी. दोनों मोर्चों पर पड़ता है। 

चीन का बढ़ता अवसंरचना विस्तार

  • भू-रणनीतिज्ञों का कहना है कि शक्सगाम में चीन की ‘सलामी स्लाइसिंग’ रणनीति निर्णायक मोड़ पर है।
  • सलामी स्लाइसिंग रणनीति में क्षेत्रीय विस्तार या प्रभाव बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे, क्रमिक कदम उठाए जाते हैं। ये कदम व्यक्तिगत रूप से मामूली लग सकते हैं किंतु ये मिलकर विवादित क्षेत्रों में नियंत्रण में बदलाव लाते हैं।
  • वर्ष 2024 के मध्य तक चीन ने 4,805 मीटर ऊंचे अघिल दर्रे को पार करते हुए निचली शक्सगाम घाटी तक सड़क का निर्माण पूरा कर लिया। इसके परिणामस्वरूप चीनी निर्माण दल एवं संभावित सैन्य गश्त भारत सियाचिन के इंदिरा कॉल से केवल 50 किमी. दूर पहुंच गई। 

दो मोर्चों पर सुरक्षा चुनौती

  • ऐतिहासिक रूप से सियाचिन में भारत का ध्यान मुख्यत: दक्षिण में पाकिस्तान की ओर केंद्रित था।
  • उत्तर से चीन की नई पहुंच इस समीकरण को बदलती है और दो मोर्चों पर टकराव की संभावना बढ़ा देती है। इससे भारत की चिंताएँ बढ़ गई हैं कि चीन एवं पाकिस्तान संयुक्त रूप से भारतीय ठिकानों पर दबाव डाल सकते हैं।

पाकिस्तान द्वारा शक्सगाम घाटी का चीन को सौंपना

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: शक्सगाम घाटी पाकिस्तान के साथ वर्ष 1963 में हुए तथाकथित सीमा समझौते के बाद चीन के नियंत्रण में चली गई। भारत ने आपत्ति जताई किंतु इस पर भौतिक नियंत्रण स्थापित नहीं किया जा सका।
  • औपनिवेशिक काल: वर्ष 1936 में ब्रिटिश प्रभाव में हुंजा के मीर ने तघदुम्बाश पामीर और रसकम घाटी पर अधिकार छोड़ दिए। शक्सगाम घाटी एवं अघिल पर्वतमाला उनके नियंत्रण में बनी रही। 
  • स्वतंत्रता के बाद: अक्टूबर 1947 में जम्मू एवं कश्मीर के भारत में विलय के बाद यह घाटी कानूनी रूप से भारतीय क्षेत्र बन गई। किंतु पाकिस्तान ने आसपास के क्षेत्रों पर कब्जा कर भारत का नियंत्रण रोक दिया।
  • चीन का प्रवेश और पाकिस्तान की रणनीति: 1950 के दशक में चीन ने पूर्वी हुंजा में अपनी पैठ बनानी शुरू की। पाकिस्तान ने अयूब खान के नेतृत्व में भारत की चिंताओं की अनदेखी करते हुए चीन के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए।
  • 1963 का सीमा समझौता: पाकिस्तान ने यारकंद नदी क्षेत्र और शक्सगाम घाटी को औपचारिक रूप से चीन को सौंप दिया, हालांकि कानूनी अधिकार उसके पास नहीं थे।
  • वर्तमान सुरक्षा निहितार्थ: डोकलाम गतिरोध के बाद से चीन ने इस घाटी में सैन्य अवसंरचना विकास तेज कर दिया, जिससे भारत के लिए यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती बन गया। 

चीन का अवसंरचना विकास और भारत की चिंताएँ

  • रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने इस घाटी में लगभग 75 किमी. लंबी, 10 मीटर चौड़ी, हर मौसम में प्रयोग होने वाली सड़क का निर्माण पूरा कर लिया है।
  • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से जुड़े विकास ने भारत की चिंताएँ बढ़ा दी हैं कि ये दोनों देश मिलकर इस क्षेत्र में भारत पर दबाव डाल सकते हैं।

भारत की प्रतिक्रिया

  • भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने 1963 में शक्सगाम घाटी का 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अवैध रूप से चीन को सौंपा, जिसे नई दिल्ली ने कभी स्वीकार नहीं किया। यह इलाका जम्मू एवं कश्मीर का हिस्सा था, जिस पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा था।
  • विदेश मंत्रालय ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है और भारत अपने हितों की रक्षा के लिए ‘आवश्यक कदम’ उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

चीन का विरोधाभास

चीन इन निर्माण कार्यों को ‘वैध’ बताकर भारत की आपत्तियों को खारिज करता है। विडंबना यह है कि एक तरफ चीन कश्मीर को भारत-पाकिस्तान का ‘द्विपक्षीय मुद्दा’ कहता है, वहीं दूसरी ओर वह उसी विवादित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सामरिक बुनियादी ढांचा बना रहा है।

निष्कर्ष 

शक्सगाम घाटी में बढ़ता निर्माण कार्य यह संकेत देता है कि चीन एल.ए.सी. (LAC) के पश्चिमी क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। यह घटनाक्रम न केवल सैन्य बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है जहाँ उसे अब ‘ढाई मोर्चों’ की सुरक्षा रणनीति पर अधिक गंभीरता से विचार करना होगा।

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