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भारत में कृषि निर्यात की स्थिति

(मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र-3 : मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न, कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी) 

संदर्भ 

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में भारत के कृषि निर्यात में 16.5% की वृद्धि हुई है। 

प्रतिबंधों के बावज़ूद निर्यात में वृद्धि 

  • गेहूँ, चावल और चीनी जैसे उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावज़ूद इनके निर्यात में प्रभावशाली वृद्धि हुई है।
  • केंद्र सरकार ने इस वर्ष मई में गेहूँ के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इसके उपरांत, वाणिज्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान गेहूँ का निर्यात 45.90 लाख टन (LT) रहा जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 23.76 एल.टी. का लगभग दोगुना है। 
  • इस वर्ष मई में चीनी निर्यात को ‘मुक्त’ से ‘प्रतिबंधित’ सूची में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बावजूद चीनी वर्ष 2021-22 (अक्तूबर से सितंबर) के लिये कुल चीनी निर्यात 100 एल.टी. रहा। 
    • अप्रैल-सितंबर 2022 के दौरान मूल्य के संदर्भ में चीनी निर्यात 45.5% बढ़कर 2.65 बिलियन डॉलर हो गया जो वित्त वर्ष 2021-22 में 4.6 बिलियन डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर को पार करने की ओर अग्रसर है।
  • सितंबर 2022 में टूटे हुए चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और अन्य सभी बिना उबाले (Non-Parboiled) गैर-बासमती चावल के लदान (Shipment) पर 20% शुल्क लगाया गया था। 
    • इसके बावज़ूद, गैर-बासमती चावल का निर्यात अप्रैल-सितंबर 2021 में 82.26 एल.टी. से बढ़कर अप्रैल-सितंबर 2022 में 89.57 एल.टी. तथा इसी अवधि के दौरान बासमती चावल का निर्यात 19.46 एल.टी. से बढ़कर 21.57 एल.टी. हो गया।  

आयात में वृद्धि 

  • वित्त वर्ष 2021-22 में भारत का कृषि निर्यात 50.2 बिलियन डॉलर जबकि आयात 32.4 बिलियन डॉलर था। इस प्रकार, 17.8 बिलियन डॉलर का अधिशेष रहा, जो वित्त वर्ष 2013-14 के सर्वकालिक उच्च स्तर (27.7 बिलियन डॉलर) से काफी कम है।   
  • चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कुल कृषि अधिशेष में और भी कमी देखी गई है जिसका कारण निर्यात (16.5%) की तुलना में आयात में अधिक वृद्धि दर (27.7%) का होना है। कृषि अधिशेष का देश के भुगतान संतुलन में विशेष महत्त्व है क्योंकि यह सॉफ्टवेयर सेवाओं के अलावा एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ भारत तुलनात्मक रूप से लाभ की स्थिति में है। 
  • वस्तुओं के परिप्रेक्ष्य में, भारत का समग्र वस्तु व्यापार खाते का घाटा अप्रैल-सितंबर 2021 में 76.25 बिलियन डॉलर था जो बढ़कर इस वर्ष अप्रैल-सितंबर में 146.55 बिलियन डॉलर हो गया है। इसी अवधि के दौरान, कृषि व्यापार में अधिशेष 7.86 अरब डॉलर से कम होकर 7.46 अरब डॉलर हो गया है। 

व्यापार संरचना में रुझान 

cotton

  • तालिका में भारत की शीर्ष कृषि निर्यात वस्तुओं को दर्शाया गया है। इन 15 वस्तुओं का निर्यात व्यक्तिगत रूप से वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 1 बिलियन डॉलर से अधिक रहा। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में भी दो फसलों (कपास और मसालों) के निर्यात को छोड़कर सभी ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है। 
  • कपास निर्यात 
    • अप्रैल-सितंबर 2021 के दौरान कपास निर्यात 1.1 बिलियन डॉलर था जो अप्रैल-सितंबर 2022 में कम होकर 436 मिलियन डॉलर हो गया है तथा आयात लगभग 300 मिलियन डॉलर से बढ़कर 1.1 बिलियन डॉलर हो गया है। 
    • यह मुख्य रूप से कम घरेलू उत्पादन के कारण हुआ है जिसने मिलों को आयात करने के लिये मज़बूर किया। 
  • मसाला निर्यात 
    • भारत से मसाला निर्यात मुख्य रूप से मिर्च, पुदीना उत्पादों, तेलों, जीरा, हल्दी और अदरक आदि का होता है। दूसरी ओर, काली मिर्च और इलायची जैसे पारंपरिक मसालों में देश निर्यातक के साथ-साथ आयातक भी बन गया है। 
    • काली मिर्च के निर्यात में भारत वियतनाम, श्रीलंका, इंडोनेशिया और ब्राज़ील से पीछे है, जबकि इलायची में ग्वाटेमाला के मुकाबले भारत की बाजार हिस्सेदारी कम हो गई है। 
  • काजू निर्यात 
    • एक अन्य पारंपरिक निर्यात वस्तु काजू के मामले में भी भारत आयातक देश बन गया है। वित्त वर्ष 2021-22 में, 1.26 बिलियन डॉलर के आयात की तुलना में, देश का काजू निर्यात 453.08 मिलियन डॉलर था। 
    • चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान काजू का आयात बढ़कर 1.4 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। 
  • वनस्पति तेल निर्यात 
    • भारत के कुल कृषि आयात के लगभग 60% में वनस्पति तेलों की हिस्सेदारी है। वित्त वर्ष 2021-22 में इनके आयात का मूल्य 19 बिलियन डॉलर था जिसमें चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 25% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। 
    • वनस्पति तेल वर्तमान में पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना और कोयले के बाद देश की पाँचवीं सबसे बड़ी आयात की जाने वाली वस्तु है।
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