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 IIT जैसे संस्थानों में जाति व्यवस्था की स्थिति 

प्रारम्भिक परीक्षा: संवैधानिक प्रावधान, वैधानिक प्रावधान।
मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र:2- केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

सुर्खियों में क्यों ?

  • हाल ही में, आईआईटी-बॉम्बे में 18 वर्षीय छात्र दर्शन सोलंकी की आत्महत्या से SC/ST वर्ग के छात्रों के लिए संस्थान में उपलब्ध करवाए जा रहे माहौल पर प्रश्न उठ रहा है। 

प्रमुख बिन्दु 

  • भारत के कुछ प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों में परिसरों को समावेशी स्थान बनाने के लिए कई उपायों के बावजूद, जाति एक परेशान करने वाला मुद्दा बना हुआ है।
  • दलित छात्र की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए संस्थान द्वारा एक 12 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था, जिसके अनुसार 
    • इस मामले में “प्रत्यक्ष जाति-आधारित भेदभाव का कोई विशिष्ट प्रमाण नहीं था" और संभावित कारण की बात की जाए तो उनका "बिगड़ता शैक्षणिक प्रदर्शन" था। 
  • दर्शन सोलंकी के पिता ने आंतरिक समिति के निष्कर्षों को खारिज करते हुए संस्थान निदेशक को पत्र लिखते हुए कहा कि “रिपोर्ट में मेरे बेटे को अपनी मौत के लिए खुद ज़िम्मेदार ठहराया गया है, जिससे मैं असहमत हूँ और किस तरह से यह संस्था, जो विशेष रूप से SC/ST पृष्ठभूमि के छात्रों को एक सुरक्षित और पोषण वातावरण प्रदान करने का वादा करती थी और अब वही संस्थान ऐसा करने में पूरी तरह विफल रही है। 

IITs जैसे संस्थानों में जाति भावना के बीज कैसे उत्पन्न होते हैं ?

JEE में रैंक क्या है?

  • भारत के कुछ प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में , एक ऐसा प्रश्न है जो अनिवार्य रूप से एक हॉस्टल के लगभग सभी साथियों से पूछा जाता है कि आपकी रैंक क्या है?
  • कुछ आरक्षित जातियों के छात्रों के लिए, यह असहज हो जाता है क्योंकि  रैंक से जाति का अनुमान लगाया जाने लगता है और यही कुछ समय बाद प्रॉक्सी वार की तरह बन जाता है।

पिछड़ी पृष्ठभूमि के छात्रों को समस्याएं क्या होती हैं ?

  • संतुलन बनाने की समस्या(शिक्षक एवं छात्र, छात्र एवं छात्र ) 
  • अधिकांश प्रथम वर्ष के छात्र अपने अंकों के साथ संघर्ष करते हैं(आरक्षित श्रेणी के छात्रों के लिए विशेष रूप से कठिन है) 
  • अंग्रेजी में दक्षता की कमी (ग्रामीण क्षेत्र से , एक हिंदी-माध्यम छात्र)
    • उदाहरण के लिए, एक छात्र अपना अनुभव साझा करते हुए कहता है कि 'पोटेंशियल एनर्जी' के बारे में सीखते हुए, मैं उस बिंदु तक खोया हुआ था बाद में मुझे एहसास हुआ कि यह 'स्थितिज ऊर्जा' थी जिसका जिक्र प्रोफेसर कर रहे थे। मैंने एक विषय का वाइवा पूरी तरह से छोड़ दिया क्योंकि मुझे पता था कि मैं अंग्रेजी में उत्तर नहीं दे पाऊंगा। प्रोफेसर मुझे अंग्रेजी में बोलने के लिए जोर देते... मैं अपने बैचमेट्स के सामने अपमानित नहीं होना चाहता था।
  • सर्वश्रेष्ठ की भावना - अपनी कक्षा में टॉपर, लेकिन आईआईटी में आने के बाद सबसे नीचे वाला स्थान – इससे तनाव का स्तर बढ़ जाता है, क्योंकि एक छात्र सोचता है कि मेरा परिवार मेरे बारे में बहुत सोचता है  और मैं उन्हें निराश नहीं करना चाहता हूँ।  
  • ग्रेड और खराब एकेडमिक परफॉर्मेंस
  • आत्मविश्वास की कमी 
    • "उदाहरण के लिए, विभिन्न पाठ्येतर गतिविधियों और क्लबों के लिए नेतृत्व की भूमिकाएं केवल एक निश्चित सीपीआई (क्रेडिट प्वाइंट इंडेक्स) वाले छात्रों द्वारा किए जाते हैं। यह अपने आप में ही हाशिए की पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों को बाहर कर देता है। 

इस मुद्दे पर संस्थानों की प्रतिक्रिया क्या है ?

  • कई IITs संस्थानों द्वारा अपनी ओर से परिसरों को अधिक समावेशी बनाने के लिए वर्षों से उपायों की एक श्रृंखला शुरू की है – 
    • जैसे छात्रों की जेईई रैंक किसी भी आधिकारिक दस्तावेज या संचार में शामिल नहीं होगा 
  • IIT बॉम्बे द्वारा जारी एक बयान में, प्रशासन द्वारा कहा गया कि  
    • संस्थान परिसर को यथासंभव समावेशी बनाने के लिए अत्यधिक सावधानी बरतता है 
    • IIT बॉम्बे में संकाय द्वारा किसी भी भेदभाव के लिए शून्य सहिष्णुता है
    • एक बार प्रवेश हो जाने के बाद जाति की पहचान कभी भी किसी के सामने प्रकट नहीं की जाती... छात्रों के आईआईटी में प्रवेश के समय से ही हम भेदभाव के खिलाफ कड़ी चेतावनी देते हैं। जबकि कोई भी कदम 100% प्रभावी नहीं हो सकता है।
  • कई संस्थानों के प्रशासन द्वारा परिसर में एससी/एसटी छात्र सेल का  गठन किया गया,  जहां छात्र भेदभाव सहित किसी भी परेशानी के मामले में पहुंच सकते हैं। 
  • IIT बॉम्बे द्वारा भी एके सुरेश समिति की सिफारिश के बाद SC/ST सेल का भी  गठन किया गया था, जिसे 2014 में B. Tech दलित छात्र अनिकेत अंभोरे की आत्महत्या से मौत के मद्देनजर स्थापित किया गया था। 
    • हालांकि, छात्रों का कहना है कि ज्यादातर उपाय जमीनी स्तर के नहीं है ।

अनुसूचित जातियों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान  

  • अनुच्छेद 15(4) पिछड़े वर्गों (एससी सहित) की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान करने का प्रावधान करता है। 
  • अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता की प्रथा को समाप्त करता है।
  • अनुच्छेद 46 अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा समाज के कमज़ोर वर्गों के शैक्षणिक व आर्थिक हितों को प्रोत्साहन और सामाजिक अन्याय एवं शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • पंचायतों से संबंधित संविधान के भाग IX और नगर पालिकाओं से संबंधित भाग IXA में SC तथा ST के सदस्यों को आरक्षण दिया गया है।
  • अनुच्छेद 330 अनुसूचित जातियों के लिये लोकसभा में सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
  • अनुच्छेद 332 राज्य विधानसभाओं में सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
  • अनुच्छेद 335  केंद्र और राज्यों की सार्वजनिक सेवाओं में नियुक्तियां करने के लिए एससी और एसटी के दावों पर विचार करने का प्रावधान करता है।

अनुसुचित जातियों से संबंधित वैधानिक प्रावधान 

  • संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950
  • अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955
  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989
  • अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 2015

संबंधित प्रश्न- भारतीय संविधान में किए गए कई प्रावधानों के बावजूद भी अनुसूचित जाति/जनजाति  के सामाजिक स्तर में सुधार नहीं हो रहा है ? कथन की आलोचनात्मक समीक्षा करें?

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