भारतीय न्यायपालिका ने जेल सुधारों और मानवाधिकारों की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिया है कि वे अधिक उम्र के और असाध्य या गंभीर बीमारियों (Terminal Illness) से जूझ रहे कैदियों की समय से पहले रिहाई के लिए तीन महीने के भीतर एक समान व व्यापक नीति तैयार करें। अदालत का मानना है कि ऐसे कैदियों को मानवीय आधार पर और एक तय समय-सीमा के भीतर सजा माफी या रिहाई का अधिकार मिलना चाहिए।
राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के बारे में:
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सुप्रीम कोर्ट ने इस नीति के क्रियान्वयन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। केंद्र और राज्य सरकारों को आगामी छह महीनों के भीतर अदालत में अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) जमा करना होगा, जिसमें रिहा किए गए और विचाराधीन कैदियों का पूरा डेटा देना होगा। इस मामले की अगली समीक्षा 19 जनवरी, 2027 को तय की गई है।