(प्रारंभिक परीक्षा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास व अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव) |
संदर्भ
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence: AI) का विकास अब दो महत्वपूर्ण अवधारणाओं सिंथेटिक एआई (Synthetic AI) और सॉवरेन एआई (Sovereign AI) की ओर बढ़ रहा है। ये दोनों आधुनिक एआई के भविष्य को तय करने वाले मॉडल हैं और विशेषकर डेटा सुरक्षा, आर्थिक विकास एवं राष्ट्रीय तकनीकी स्वायत्तता के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण हैं।
क्या है सिंथेटिक एआई
- सिंथेटिक एआई वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता है जो वास्तविक दुनिया के डाटा की जगह कृत्रिम/सिंथेटिक डेटा (Synthetic Data) पर आधारित होती है।
- यह AI मॉडल कृत्रिम रूप से निर्मित डेटा का उपयोग करता है जो वास्तविक डाटा जैसा ही व्यवहार करता है।
- उदाहरण
- कृत्रिम (Synthetic) मेडिकल रिकॉर्ड बनाकर AI का प्रशिक्षण
- कृत्रिम ट्रैफिक फुटेज बनाकर सेल्फ-ड्राइविंग कारों का प्रशिक्षण
- वित्तीय धोखाधड़ी पता लगाने के लिए सिमुलेटेड डाटासेट
विशेषताएँ
- कंप्यूटर द्वारा बनाई गई डाटा-जनरेशन क्षमता
- वास्तविक डाटा जैसा पैटर्न, संरचना एवं व्यवहार
- गोपनीय डाटा की जगह सुरक्षित सिंथेटिक डाटा का उपयोग
- तीव्र एवं स्केलेबल ट्रेनिंग प्रोसेस
सिंथेटिक AI के लाभ
- डाटा गोपनीयता की रक्षा : वास्तविक उपयोगकर्ता डेटा की आवश्यकता नहीं।
- तीव्र डेटा उपलब्धता : वास्तविक डेटा इकट्ठा करने की प्रतीक्षा नहीं।
- दुर्लभ परिस्थितियों की मॉडलिंग : जैसे युद्ध, दुर्घटनाएँ, दुर्लभ बीमारियाँ।
- पक्षपात में कमी : संतुलित सिंथेटिक डाटासेट बनाए जा सकते हैं।
- आसानी से बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण
सिंथेटिक AI की सीमाएँ
- रियल-वर्ल्ड जटिलताओं की पूर्ण नकल संभव नहीं
- मॉडल में गलत पैटर्न सीखे जाने का जोखिम
- क्वालिटी कंट्रोल कठिन और खराब सिंथेटिक डाटा
- AI भ्रम (Hallucination) का जोखिम बढ़ सकता है
- ग़लत या भ्रामक डाटा पैदा करने का दुरुपयोग
सॉवरेन AI के बारे में
- सॉवरेन AI (Sovereign AI) का अर्थ है कि कोई देश अपने AI मॉडल, डाटा, अवसंरचना और कंप्यूटिंग क्षमता पर पूरी तरह नियंत्रण (Sovereignty) रखे।
- यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्वायत्तता एवं डाटा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है।
- भारत में ONDC, इंडियाAI मिशन और भविष्य की कंप्यूटिंग क्षमताएँ इसी दिशा में प्रयास हैं।
मुख्य तत्व
- घरेलू डेटा सेंटर्स
- स्वदेशी AI मॉडल
- राष्ट्रीय AI नीतियाँ और कानून
- स्थानीय कंप्यूटिंग क्षमता
- डेटा का देश से बाहर न जाना
प्रमुख विशेषताएँ
- डाटा पर राष्ट्रीय नियंत्रण
- नागरिकों के डेटा की सुरक्षा
- स्वदेशी क्लाउड और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
- देश द्वारा कानूनी और नैतिक मानक तय करना
- विदेशी टेक पर निर्भरता में कमी
- AI सुरक्षा (AI Safety) पर राष्ट्रीय मानक
सॉवरेन AI के लाभ
- राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूती
- डेटा की संप्रभुता
- देश में तकनीकी रोजगार और नवाचार में वृद्धि
- विदेशी कंपनियों पर निर्भरता में कमी
- स्थानीय जरूरतों के अनुसार AI मॉडल
- भू-राजनीतिक जोखिम से सुरक्षा
सीमाएँ और चुनौतियाँ
- उच्च लागत, जैसे- डेटा सेंटर, चिप्स, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
- देश में AI प्रतिभा की कमी
- डेटा की गुणवत्ता बनाए रखने में कठिनता
- नवाचार की गति वैश्विक स्तर से धीमी होने की संभावना
- इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) संबंधी चुनौतियाँ
- AI सुरक्षा एवं निगरानी के अत्यधिक केंद्रीकरण का खतरा
भारत के लिए : आगे की राह
- इंडियाAI मिशन का तेजी से क्रियान्वयन
- स्वदेशी चिप निर्माण (Semicon India)
- राष्ट्रीय AI सुरक्षा मानक
- सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) द्वारा कंप्यूट क्षमता बढ़ाना
- व्यापक सिंथेटिक डाटा फ्रेमवर्क
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग
- AI से संबंधित गोपनीयता कानून
- AI स्किलिंग मिशन
निष्कर्ष
सिंथेटिक AI और सॉवरेन AI दोनों ही आधुनिक AI विकास की अनिवार्य दिशाएँ हैं। सिंथेटिक AI भविष्य में सुरक्षित डेटा-आधारित नवाचार का आधार बनेगा, जबकि सॉवरेन AI देशों को डेटा एवं तकनीक पर स्वायत्तता प्रदान करेगा। भारत के लिए यह समय है कि वह इन दोनों क्षेत्रों में नेतृत्व करे और ‘उत्तरदायी, सुरक्षित एवं समावेशी AI’ का वैश्विक मॉडल प्रस्तुत करे।