New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 26th Sept. 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 26th Sept. 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

तरंग पोर्टल एवं वन अधिकारों का डिजिटलीकरण

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, पर्यावरणीय पारिस्थितिकी, जैव-विविधता)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

संदर्भ

वन अधिकार अधिनियम-2006 (FRA) को एक ऐतिहासिक सुधार माना गया, जिसका उद्देश्य वनवासियों के साथ हुए अन्याय को समाप्त करना था। हालांकि, विगत दो दशकों में कार्यान्वयन की धीमी प्रगति और दावों के निपटान में होने वाली देरी एक बड़ी बाधा रही है। केंद्र सरकार इस पूरी प्रक्रिया को ‘तरंग’ (TARANG) नामक एक राष्ट्रीय वेब पोर्टल के माध्यम से डिजिटल स्वरूप देने जा रही है। 

एकल खिड़की समाधान: दावों से लेकर डिजिटल विलेख (Digital Title Deed) तक

इस पोर्टल की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘सिंगल विंडो’ मॉडल है।

  • दावा प्रक्रिया का सरलीकरण: ग्राम सभा की वन अधिकार समिति से लेकर राज्य स्तरीय निगरानी समितियों तक दावों को दाखिल करना और उनकी प्रगति को ट्रैक करना अब ऑनलाइन होगा।
  • डिजिटल टाइटल डीड: पात्र लाभार्थियों को अब ‘डिजिटल स्वामित्व विलेख’ (Digital Title Deed) जारी किए जाएंगे, जो उनकी भूमि सुरक्षा को पुख्ता करेंगे।
  • ऐतिहासिक डेटा का संरक्षण: विरासत में मिले अधिकारों और पुराने रिकॉर्ड्स का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की गुंजाइश न रहे। 

सटीक मैपिंग: उपग्रह एवं ड्रोन का समन्वय

  • प्राय: वन अधिकारों के दावों में सबसे बड़ी समस्या ‘सटीक भूमि सीमा’ के निर्धारण की आती है। मंत्रालय ने इस समस्या का समाधान GPS मैपिंग एवं सैटेलाइट इमेजिंग में खोजा है।
  • जनजातीय कार्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार ‘उपग्रह छवियों के साथ जी.पी.एस. मैपिंग से न केवल सटीक भूमि सीमाओं का निर्धारण होगा, बल्कि यह प्रतिस्पर्धी दावों के बीच विवादों को सुलझाने एवं हेराफेरी को रोकने में भी सहायक सिद्ध होगा’।  
  • भविष्य में इसे स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के डेटा के साथ एकीकृत करने की भी तैयारी है जिसमें ड्रोन-आधारित विश्लेषण का उपयोग करके ‘FRA एटलस’ तैयार किया जाएगा। 

कल्याणकारी योजनाओं के साथ एकीकरण

  • इस डिजिटल पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू लाभार्थियों की पहचान करना है। 
  • सरकार की योजना है कि FRA रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के बाद इन आंकड़ों का उपयोग अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को खोजने के लिए किया जाए। 
  • इससे यह सुनिश्चित होगा कि जिन जनजातीय समुदायों को वन अधिकार मिले हैं उन्हें आवास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ भी प्राथमिकता के आधार पर मिले।

हैकाथॉन से ‘तरंग’ तक का सफर

  • इस अत्याधुनिक पोर्टल की नींव ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2025’ में रखी गई थी। देश के छह स्नातक छात्रों की एक टीम द्वारा विकसित किया गया यह प्रोटोटाइप अब एक विशाल राष्ट्रीय परियोजना में तब्दील हो चुका है।
  • इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया है जो पुराने कागजी दस्तावेजों को डिजिटल प्रारूप में बदलने में मदद करेंगी। 

चुनौतियाँ और राज्यों की भूमिका

  • यद्यपि केंद्र सरकार ने मार्ग प्रशस्त कर दिया है किंतु इसकी सफलता की कुंजी राज्य सरकारों के पास है। चूँकि कानून के कार्यान्वयन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों की है, इसलिए महाराष्ट्र व ओडिशा जैसे राज्यों के सफल डिजिटल मॉडलों को राष्ट्रीय स्तर पर दोहराने की आवश्यकता है।
  • वर्ष 2026 की पहली छमाही तक इस रोडमैप को अंतिम रूप देने का लक्ष्य है। यदि ‘तरंग’ पोर्टल अपनी संभावनाओं पर खरा उतरता है तो यह न केवल 15% लंबित दावों का समाधान करेगा, बल्कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के ‘पर्यावास अधिकारों’ (Habitat Rights) को भी सुरक्षित करेगा। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR