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प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल

(मुख्य परीक्षा - सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2 : द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।)

संदर्भ

भारत और यूनाइटेड किंगडम (यू.के.) द्वारा रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने के लिए ‘प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल’(Technology Security Initiative) की शुरुआत की गई है। 

प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल के बारे में 

  • यह पहल दोनों देशों में राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका के संदर्भ में भारत-यू.के. रोडमैप 2030 पर आधारित है।  
  • इसका पहल का उद्देश्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को मजबूत करना, मौजूदा तंत्र के दायरे को व्यापक बनाना और सहयोग के लिए नए चैनल स्थापित करना है।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

  • दूरसंचार : पहल के अंतर्गत दोनों देश भविष्य की दूरसंचार साझेदारी विकसित करेंगे, जो ओपन आरएएन प्रणालियों, दूरसंचार सुरक्षा, स्पेक्ट्रम नवाचार और 6जी प्रौद्योगिकियों के विकास पर केंद्रित होगी।
    • इस सहयोग में ब्रिटेन की सोनिक लैब्स, भारत का सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (सी-डॉट) और डॉट का टेलीकॉम स्टार्टअप मिशन शामिल होंगे।
  • महत्वपूर्ण खनिज : महत्वपूर्ण खनिजों पर डाटा साझा करने के लिए कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, आईआईटी धनबाद और आईआईटी बॉम्बे के नेतृत्व में एक वेधशाला स्थापित की जाएगी।
    • पहल टिकाऊ निष्कर्षण प्रौद्योगिकियों और अपशिष्ट उत्पादों से महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण पर केंद्रित है।
  • सेमीकंडक्टर : दोनों देश द्वारा व्यापक सेमीकंडक्टर साझेदारी को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें चिप डिजाइन, मिश्रित सेमीकंडक्टर और उन्नत पैकेजिंग में अनुसंधान एवं विकास जैसे विषय शामिल हैं।
    • यह साझेदारी कार्यबल विकास, व्यापार मिशनों और आपूर्ति श्रृंखलाओं के एकीकरण में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं में चुनौतियों का समाधान पर केन्द्रित है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) : दोनों देश सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित एआई पर सहयोग करने तथा वैश्विक भलाई और एआई गवर्नेंस ढांचे में अंतर-संचालन पर ध्यान केंद्रित करने पर सहमति व्यक्त की है।
    • इसमें नीतिगत आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान, पूर्वाग्रह पहचान चुनौतियां, तथा उत्तरदायी एआई के लिए संयुक्त केंद्र का निर्माण शामिल है।
  • क्वांटम प्रौद्योगिकी : क्वांटम प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और उद्योग सहयोग के अवसरों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय वार्ता मंच की स्थापना।
    • क्वांटम क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त हैकथॉन, उद्यमिता प्रशिक्षण और शैक्षणिक आदान-प्रदान जैसे कार्यक्रमों को लागू किया जाना। 
  • जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी : जीनोमिक्स, सटीक चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों को आगे का प्रयास।
    • आपसी सहयोग में किफायती स्वास्थ्य देखभाल उपाय और जैव प्रौद्योगिकी में जिम्मेदार नवाचार भी शामिल होंगे। 
  • उन्नत सामग्री : दोनों देश नवीन मिश्रधातुओं, पाउडरों और नैनो प्रौद्योगिकी सहित उन्नत सामग्रियों के लिए अनुसंधान एवं विकास पर सहयोग पर भी सहमती व्यक्त की है। 
    • सहयोग के अंतर्गत औद्योगिक स्थिरता और चरम वातावरण के लिए प्रौद्योगिकियों के विकास पर फोकस किया जाएगा।

समन्वय और कार्यान्वयन

  • इस पहल की प्रगति की समीक्षा के प्रत्येक दो वर्ष में डिप्टी एनएसए स्तर पर की जाएगी।
  • महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में व्यापार को सुविधाजनक बनाने और विनियामक और लाइसेंसिंग मुद्दों को हल करने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय और यू.के. सरकार के नेतृत्व में एक द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किया जाएगा।

निष्कर्ष

प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल के अंतर्गत विभिन्न प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में टिकाऊ और ठोस साझेदारी को बढ़ावा देना, वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने और शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सहयोग शामिल है।

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