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एयरटेल की प्रायोरिटी पोस्टपेड योजना और नेट न्यूट्रैलिटी पर नई बहस

चर्चा में क्यों ?

भारत में 5जी सेवाओं के विस्तार के बीच भारती एयरटेल ने अपनी नई ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ सेवा लॉन्च की है। कंपनी का दावा है कि यह सेवा नेटवर्क की भीड़भाड़ के दौरान पोस्टपेड ग्राहकों को अधिक स्थिर और बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। यह भारत में उपभोक्ताओं के लिए 5जी नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक की पहली व्यावसायिक तैनाती मानी जा रही है। हालांकि, इस नई सेवा ने नेट न्यूट्रैलिटी (Net Neutrality) को लेकर एक नई बहस भी छेड़ दी है।

5G नेटवर्क स्लाइसिंग क्या है ?

  • 5G नेटवर्क स्लाइसिंग एक ऐसी तकनीक है जिसमें एक ही भौतिक नेटवर्क को कई आभासी (Virtual) हिस्सों या "स्लाइस" में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक स्लाइस को विशेष जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एक स्लाइस औद्योगिक स्वचालन के लिए, दूसरा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए और तीसरा प्रीमियम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए बनाया जा सकता है।
  • एयरटेल की नई योजना में पोस्टपेड ग्राहकों को एक समर्पित नेटवर्क स्लाइस का लाभ मिलेगा, जिससे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों जैसे स्टेडियम, हवाई अड्डे, मेट्रो स्टेशन या बाजारों में भी बेहतर नेटवर्क अनुभव प्राप्त होगा।

प्रीमियम ब्रॉडबैंड प्लान और नेटवर्क स्लाइसिंग में अंतर

  • सामान्य प्रीमियम ब्रॉडबैंड योजनाएं केवल अधिकतम इंटरनेट गति (Speed) प्रदान करती हैं, लेकिन नेटवर्क पर दबाव बढ़ने पर सभी उपयोगकर्ताओं को धीमी गति का सामना करना पड़ सकता है।
  • इसके विपरीत, नेटवर्क स्लाइसिंग में कुछ उपयोगकर्ताओं को नेटवर्क संसाधनों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंच मिलती है। इसका अर्थ है कि भीड़भाड़ के समय भी उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर और स्थिर कनेक्टिविटी मिल सकती है।

एयरटेल ने यह योजना क्यों शुरू की ?

  • एयरटेल के कुल ग्राहकों में पोस्टपेड उपयोगकर्ताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन ये ग्राहक कंपनी के लिए अधिक राजस्व उत्पन्न करते हैं। पोस्टपेड ग्राहक लंबे समय तक एक ही सेवा प्रदाता के साथ बने रहते हैं और उनका औसत राजस्व (ARPU) भी अधिक होता है।
  • ऐसे में कंपनी का उद्देश्य अधिक ग्राहकों को पोस्टपेड सेवाओं की ओर आकर्षित करना और मौजूदा ग्राहकों को बेहतर अनुभव देकर बनाए रखना है।

नेट न्यूट्रैलिटी क्या है ?

  • नेट न्यूट्रैलिटी वह सिद्धांत है जिसके अनुसार इंटरनेट पर उपलब्ध सभी वेबसाइटों, ऐप्स और ऑनलाइन सेवाओं के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए। इंटरनेट सेवा प्रदाता किसी विशेष वेबसाइट, ऐप या सेवा को अतिरिक्त प्राथमिकता नहीं दे सकते और न ही किसी अन्य सेवा को धीमा कर सकते हैं।
  • भारत ने वर्ष 2015 में फेसबुक के ‘फ्री बेसिक्स’ विवाद के बाद नेट न्यूट्रैलिटी के मजबूत नियम अपनाए थे। इन नियमों का उद्देश्य इंटरनेट को खुला, निष्पक्ष और सभी के लिए समान बनाए रखना है।

क्या एयरटेल की योजना नेट न्यूट्रैलिटी का उल्लंघन करती है ?

एयरटेल का पक्ष

  • एयरटेल का कहना है कि उसकी प्रायोरिटी पोस्टपेड सेवा पूरी तरह कंटेंट-न्यूट्रल है। इसका मतलब है कि नेटवर्क स्लाइस के भीतर सभी ऐप्स और वेबसाइटों को समान प्राथमिकता मिलेगी। कंपनी किसी विशेष प्लेटफॉर्म, वेबसाइट या कंटेंट को बढ़ावा नहीं दे रही है, बल्कि केवल भुगतान करने वाले ग्राहकों को बेहतर नेटवर्क अनुभव उपलब्ध करा रही है।

आलोचकों की चिंता

  • आलोचकों का मानना है कि यह व्यवस्था इंटरनेट पर "फास्ट लेन" और "स्लो लेन" जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। यदि कुछ उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त भुगतान के बदले बेहतर नेटवर्क संसाधन मिलते हैं, तो अन्य उपयोगकर्ताओं को अपेक्षाकृत कम गुणवत्ता वाली सेवा मिल सकती है।
  • विशेषज्ञों का तर्क है कि इससे भविष्य में दो-स्तरीय इंटरनेट व्यवस्था विकसित हो सकती है, जहां अधिक भुगतान करने वाले ग्राहकों को बेहतर अनुभव और सामान्य उपभोक्ताओं को कम गुणवत्ता वाली सेवा प्राप्त होगी।

नियामकीय स्थिति

  • सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। समिति यह अध्ययन कर रही है कि क्या यह सेवा भारत के दूरसंचार ढांचे में मौजूद गैर-भेदभाव (Non-Discrimination) के सिद्धांत के अनुरूप है या नहीं। फिलहाल इस विषय पर कोई अंतिम नियामकीय निर्णय नहीं लिया गया है।

निष्कर्ष

एयरटेल की प्रायोरिटी पोस्टपेड योजना ने भारत में 5जी नेटवर्क प्रबंधन और नेट न्यूट्रैलिटी के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण बहस शुरू कर दी है। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या अतिरिक्त भुगतान करने वाले ग्राहकों को बेहतर नेटवर्क गुणवत्ता देना सामान्य ग्राहकों के साथ भेदभाव माना जाएगा। इस प्रश्न का उत्तर भारत में 5जी सेवाओं, डिजिटल समानता और इंटरनेट की निष्पक्षता के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

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